बिहार-यूपी से दिल्ली तक… चोरी के मोबाइल खोजने में कौन से राज्य की पुलिस आगे?

The CSR Journal Magazine
देशभर में चोरी के 60 लाख से ज्यादा मोबाइल ब्लॉक हो चुके हैं, जिनमें से 37.48 लाख मोबाइल को ट्रेस किया गया है। वहीं, 13.80 लाख मोबाइल को वापस पाया गया है। अगर हम राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो भारत का औसत मोबाइल रिकवरी रेट 36.83% है। मतलब, अगर 100 फोन चोरी होते हैं, तो लगभग 37 ही वापस लौटते हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि कौन से राज्य की पुलिस इस मामले में सबसे आगे है और कौन से राज्य पिछड़ रहे हैं।

दिल्ली का रिकवरी रेट सबसे कम

दिल्ली की स्थिति इस मामले में सबसे खराब देखी गई है। यहां पर 10,59,962 मोबाइल ब्लॉक किए गए, जिनमें से केवल 52,930 मोबाइल ही रिकवर हो पाए। दिल्ली का रिकवरी रेट मात्र 7.93% है, जो पूरे देश में सबसे कम है। यह आंकड़ा साफ बताता है कि राजधानी में चोरी के मोबाइल को वापस पाने की उम्मीद बेहद कम है। अन्य राज्य भी जो पीछे हैं, उनमें पंजाब और बिहार का नाम भी शामिल है।

बेस्ट परफॉर्मर्स: आंध्र प्रदेश और गुजरात

अगर बात करें बेहतरीन प्रदर्शन की, तो आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्य इस मामले में आगे हैं। आंध्र प्रदेश में 2.31 लाख मोबाइल ब्लॉक हुए, जिनमें से 82,397 मोबाइल को रिकवर किया गया, यानि की रिकवरी रेट 58.13% है। गुजरात में भी 50% से ऊपर का रिकवरी रेट देखने को मिला, जो इसे बेहतर बनाता है।

पूर्वोत्तर के राज्य भी अच्छे प्रदर्शन में शामिल

पूर्वोत्तर भारत के मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश ने भी 50% से ज्यादा मोबाइल खोजने में शानदार काम किया है। मणिपुर का रिकवरी रेट 51.88% है, जबकि मिजोरम में यह 50.92% है। ऐसे में यह साफ है कि छोटे राज्य भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।

खराब प्रदर्शन वाले राज्य

कुछ अन्य राज्यों का प्रदर्शन भी निराशाजनक रहा है। भारतीय रेलवे के मामलों में 12,889 मोबाइल चोरी हुए, जिनमें से केवल 1,570 मोबाइल ही बरामद हुए, जो कि 19.48% की रिकवरी रेट बनाता है। बिहार में 1.46 लाख मोबाइल ब्लॉक हुए, जिनमें से केवल 23,779 मिले, मतलब कि रिकवरी रेट 24.26% है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल में भी 28.04% की रिकवरी रेट से स्थिति उतनी बेहतर नहीं दिखाई दे रही।

क्या है CEIR?

देश में मोबाइल चोरियों को रोकने और चोरी हुए मोबाइल को ट्रेस करने के लिए भारत सरकार ने सीईआईआर (Central Equipment Identity Register) नाम का पोर्टल 2019 में शुरू किया। इस प्लेटफॉर्म ने चोरी के मोबाइल्स को ब्लॉक करने और उन्हें ढूंढने की प्रक्रिया को आसान बना दिया है। लेकिन क्या तस्वीर उतनी ही बेहतर है? आंकड़े बताते हैं कि जमीनी स्तर पर स्थिति में सुधार की आवश्यकता है।

सिस्टम में सुधार की जरूरत

CEIR पोर्टल ने चोरी के मोबाइल को ट्रेस करने में मदद की है, लेकिन असली जिम्मेदारी राज्य की पुलिस की है। दिल्ली, बिहार और पंजाब को इस मामले में आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। जिन क्षेत्रों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, वे ही इस समस्या को सही तरीके से हैंडल कर पा रहे हैं।

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