सितंबर में खुदरा महंगाई ने पकड़ी रफ्तार, 23 महीने के उच्चतम स्तर 5.54% पर पहुंची

The CSR Journal Magazine

महंगाई का नया रिकॉर्ड

सितंबर 2023 में भारत की रिटेल महंगाई दर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई है। यह दर जुलाई में 4.83 प्रतिशत से बढ़कर अब तक की सबसे ऊंची स्थिति में है। इस वृद्धि का मुख्य कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी है, जिससे आम परिवारों का खर्च बढ़ गया है। 12 अक्टूबर को जारी आंकड़ों के अनुसार, यह लगातार छठा महीना है जब महंगाई दर में वृद्धि हुई है। इस बढ़ोतरी के साथ ही महंगाई दर भारतीय रिज़र्व बैंक के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर चली गई है, लेकिन यह केंद्रीय बैंक की 2-6 प्रतिशत की स्वीकार्य सीमा में बनी हुई है।

खाद्य महंगाई में उछाल

कंज्यूमर फ़ूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के अनुसार, खाद्य महंगाई दर अगस्त में 5.97 प्रतिशत से बढ़कर सितंबर में 7.74 प्रतिशत हो गई है। प्याज़ की कीमतों में सबसे अधिक बढ़ोतरी देखी गई है। अगस्त में प्याज़ की महंगाई दर 48.78 प्रतिशत थी, जो सितंबर में बढ़कर 108.09 प्रतिशत हो गई। लहसुन की महंगाई दर भी 43.60 प्रतिशत से बढ़कर 54.62 प्रतिशत हो गई है। नींबू की कीमतों में भी 36.41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो पिछले महीने 15.15 प्रतिशत थी।

सब्जियों में राहत

हालांकि, कुछ सब्जियों में राहत देखने को मिली है। आलू की कीमतों में सालाना 11.50 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि टमाटर की कीमतें 8.62 प्रतिशत कम हुई हैं। चांदी के गहनों में महंगाई दर 87.80 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बनी रही है, जबकि अगस्त में यह 106.81 प्रतिशत थी। पान-तंबाकू की महंगाई 4.71 प्रतिशत से बढ़कर 4.80 प्रतिशत पर रही। फूड एंड बेवरेजेज महंगाई भी 5.66 प्रतिशत से बढ़कर 7.36 प्रतिशत पर पहुंच गई है।

ग्रामीण और शहरी महंगाई का अंतर

ग्रामीण इलाकों में महंगाई की दर 6 प्रतिशत के पार पहुंच गई है। सितंबर में ग्रामीण भारत की खुदरा महंगाई अगस्त के 5.24 प्रतिशत से बढ़कर 6.08 प्रतिशत हो गई। वहीं, शहरी इलाकों में महंगाई 4.31 प्रतिशत से बढ़कर 4.88 प्रतिशत पर पहुंच गई है। इस प्रकार, ग्रामीण और शहरी महंगाई के बीच का अंतर बढ़कर 1.20 प्रतिशत हो गया है। बड़े राज्यों में, तमिलनाडु की रिटेल महंगाई दर 6.81 प्रतिशत, ओडिशा में 6.70 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 6.68 प्रतिशत, तेलंगाना में 6.64 प्रतिशत और आंध्र प्रदेश में 6.29 प्रतिशत दर्ज की गई है।

सेवाओं में भी महंगाई का दबाव

ताज़ा आंकड़ों से पता चलता है कि महंगाई का दबाव सिर्फ खाने-पीने की चीज़ों तक ही सीमित नहीं है। पर्सनल केयर और मिसिलेनियस महंगाई घटकर 13.75 प्रतिशत पर रही है। वहीं, रेस्टोरेंट और एकॉमडेशन सर्विस महंगाई बढ़कर 9.36 प्रतिशत पर पहुंच गई है। एजुकेशन सर्विसेस महंगाई 3.73 प्रतिशत से बढ़कर 3.94 प्रतिशत पर रही। सितंबर में रिक्रिएशन, स्पोर्ट और कल्चर महंगाई बढ़कर 2.16 प्रतिशत पर आ गई है।

मॉनिटरी पॉलिसी पर असर

सितंबर में महंगाई के आंकड़े भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के लिए एक चुनौती बन गए हैं। मार्च से कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के कारण हेडलाइन महंगाई दर RBI की तय सीमा के ऊपरी स्तर के करीब पहुंच गई है। इन दबावों का बने रहना RBI के भविष्य के पॉलिसी फैसलों के लिए महत्वपूर्ण होगा। अब यह देखना होगा कि क्या खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी कुछ समय के लिए है या यह आम कंज्यूमर कीमतों पर भी असर डालने लगेगी। RBI की अगली बैठक दिसंबर में होगी।

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