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ऑक्सीजन पर खर्च सीएसआर माना जायेगा – MCA

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ऑक्सीजन पर खर्च सीएसआर माना जायेगा
 
ऑक्सीजन की भारी किल्लत को देखते हुए मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला लिया है। मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स ने एक सर्कुलर जारी करते हुए कहा है कि अब ऑक्सीजन के प्रोडक्शन में होने वाला खर्च, कॉर्पोरेट्स का सीएसआर खर्च (CSR Expenditure) माना जायेगा। इसके पहले भी मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स ने अपने सीएसआर नियमों में कई बदलाव किये है।

ऑक्सीजन की किल्लत को खत्म करने के लिए खर्च होगा सीएसआर

कोरोना के इस महामारी में लोगों को Corporate Social Responsibility से मदद मिल सके इसके लिए भारत सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स ने कई पहल किये। हालही में कॉर्पोरेट मंत्रालय ने कोरोना की महामारी में अपने नियमों में ढील देते हुए ये फैसला लिया था कि कोविड अस्पतालों के निर्माण में आने वाला कंपनियों के खर्च को सीएसआर खर्च माना जायेगा। अब ऑक्सीजन की कमी को देखते हुए मंत्रालय ने ये अहम फैसला लिया है।

मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) ने जारी किया सर्कुलर

अब तक के लिए अस्पतालों और हेल्थ केयर के लिए सीएसआर था लेकिन CSR के खर्चों में कन्फ्यूजन को देखते हुए मंत्रालय ने बुधवार को एक सर्कुलर जारी करते हुए कहा कि ऑक्सीजन के प्रोडक्शन, मैन्युफैक्चरिंग, सप्लाई, ऑक्सीजन प्लांट्स और ऑक्सीजन कंसंट्रेटर (Oxygen Concentrator) में आने वाला खर्च सीएसआर खर्च के तहत काउंट किया जायेगा। ऑक्सीजन की किल्लत में ये फैसला लोगों की जान बचाने वाला है।
देश में कोरोना के बढ़ते मामलों की वजह से एकाएक ऑक्सीजन की मांग इतनी ज्यादा हो गयी कि ऑक्सीजन की कमी होने लगी। कोरोना मरीजों को समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाने से मौतों का अकड़ा बहुत बढ़ गया। स्टील प्लांट्स अपने स्टील प्रोडक्शन को रोककर ऑक्सीजन की मैन्युफैक्चरिंग करने लगे और देश के एक कोने से दूसरे कोने में ऑक्सीजन युद्ध स्तर पर पहुंचाया जा रहा है। ताकि ऑक्सीजन की किल्लत को दूर किया जा सके।