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March 10, 2026

NCERT ने ज्यूडिशरी करप्शन चैप्टर पर मांगी माफी: SC ने कहा, न्यायपालिका को बदनाम करने की इजाजत नहीं

The CSR Journal Magazine
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने 10 मार्च को एक प्रेस रिलीज जारी करते हुए 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब में मौजूद ‘ज्यूडिशरी करप्शन’ चैप्टर पर माफी मांगी है। इस किताब में हुए विवाद के चलते इसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई थी। NCERT ने स्वीकार किया कि ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – ग्रेड 8 (भाग II)’ नाम की किताब में “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” नामक चैप्टर विवाद का केंद्र बन गया।

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने 25 फरवरी को NCERT द्वारा प्रकाशित इस चैप्टर पर नाराजगी जताई और किताब की बिक्री पर रोक लगा दी। NCERT ने तुरंत सभी किताबों को वापस लेने का निर्णय लिया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक सिंघवी ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया, जहां उन्होंने कोर्ट को बताया कि क्लास 8 के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में सिखाना निंदनीय है।

NCERT की कार्रवाई की पृष्ठभूमि

NCERT के सूत्रों के मुताबिक, चैप्टर का सुझाव देने वाले एक्सपर्ट्स और इसे मंजूरी देने वाले अधिकारियों की एक इंटरनल मीटिंग बुलाई गई है। इसके अलावा पाठ्यक्रम को NCERT की वेबसाइट से भी हटा लिया गया है। CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोई भी संस्था न्यायपालिका को बदनाम करने का प्रयास नहीं कर सकती, यह एक गंभीर मसला है।

सरकारी सूत्रों की सलाह

सरकारी सूत्रों ने कहा कि अगर NCERT ने भ्रष्टाचार का मामला उठाना था, तो न्यायपालिका के साथ-साथ अन्य संस्थाओं का भी जिक्र किया जाना चाहिए था। उन्होंने बताया कि अदालतों में पेंडिंग मामलों की संख्या भी दी जानी चाहिए, जिससे छात्रों को सही जानकारी मिल सके। NCERT की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार से संबंधित आंकड़े मौजूद हैं, लेकिन उनके सत्यापन के लिए केंद्र से परामर्श नहीं लिया गया।

NCERT की नई किताब और उसके विकल्प

NCERT ने 23 फरवरी को 8वीं कक्षा के छात्रों के लिए सोशल साइंस की नई किताब जारी की थी, जिसमें ‘एक्सप्लोरिंग सोसायटी: इंडिया एंड बियॉंड’ के भाग 2 में ‘द रोल ऑफ द ज्यूडीशियरी इन अवर सोसायटी’ नामक चैप्टर शामिल है। इस चैप्टर में कहा गया है कि न्यायपालिका के सामने प्रमुख चुनौतियों में भ्रष्टाचार और पेंडिंग मामले शामिल हैं।

पेनडिंग केस और उनके प्रभाव

इस किताब में प्रकट किया गया है कि अदालती सिस्टम में 81,000 केस सुप्रीम कोर्ट में और 62 लाख 40 हजार केस हाईकोर्ट्स में लंबित हैं। इसके अलावा, डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में लगभग 4 करोड़ 70 लाख पेंडिंग केस की संख्या भी दर्शाई गई है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए NCERT ने अपनी किताबों की उपलब्धता पर ध्यान दिया है।

भ्रष्टाचार और ट्रांसपेरेंसी की आवश्यकता

किताब में पूर्व CJI बीआर गवई का उल्लेख है, जिन्होंने भ्रष्टाचार के मामलों के हमारे समाज पर पड़ने वाले प्रभावों पर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने कहा था कि ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी लोकतंत्र के गुण हैं। इससे साफ है कि शिक्षा के क्षेत्र में इन मुद्दों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
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