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कोरोनावायरस की जंग में सीएसआर बना हथियार

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कोरोनावायरस की जंग में, सीएसआर बना हथियार
 
कोरोनावायरस की महामारी से बचने के लिए भारत कड़े कदम उठा रहा है, वैश्विक स्तर पर जहां कोरोनावायरस मानवीय आबादी को बुरी तरह प्रभावित किया है वही भारत हर मोर्चे पर डट कर ना सिर्फ सामना कर रहा है बल्कि हमारे इन प्रयासों को विश्व भी सराह रहा है, जनता कर्फ्यू के बाद अब संपूर्ण भारत लॉक डाउन है, इस बीच भारत सरकार इस महामारी को रोकने के लिए हर संभव कोशिश में जुटा है और हम बड़े पैमाने पर कामयाब भी हो रहे है। इस बीमारी के रोकथाम के लिए कड़े कानून का इस्तेमाल किया जा रहा है। तो कहीं कानून में ढील दिया जा रहा है। इस वैश्विक महामारी से बचने के लिए केंद्र सरकार ने अपने सीएसआर नियमों में बदलाव किया है।

कंपनियों का कोरोनावायरस पर खर्च माना जाएगा CSR

कंपनियों के कोरोनावायरस से निपटने को लेकर किए जा रहे व्यय को उनके Corporate Social Responsibility यानि CSR का हिस्सा माना जाएगा। कॉर्पोरेट कार्य मामलों के मंत्रालय ने इसके लिए एक अधिसूचना जारी कर कहा कि कोरोना वायरस से निपटने पर किया जा रहा कंपनियों का खर्च सीएसआर के दायरे में आने योग्य है। कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने ट्वीट कर कहा, कि देश में कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को देखते हुए भारत सरकार ने इसे आपदा घोषित करने का निर्णय किया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे वैश्विक महामारी घोषित किया है। इसलिए यह स्पष्ट किया जाता है कि कंपनियों के इस पर किए जाने वाले सीएसआर कोष के खर्च को सीएसआर गतिविधि माना जाएगा।
सरकारी छूट मिलने के बाद देश के तमाम कॉर्पोरेट सरकार के साथ खड़े होकर कोरोना को हराने में जुटे है। जहां कई राज्य सरकारें कॉर्पोरेट्स से निवेदन कर रही है कि कंपनियां सामने आएं और सरकारों की मदद करें। महाराष्ट्र सरकार के स्वास्थय मंत्री राजेश टोपे ने हालही में कॉर्पोरेट के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और सीएसआर के तहत मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराने की अपील की थी। गोवा सरकार भी Corporate Social Responsibility के तहत फंड की अपील की है। देश के प्रधानमंत्री खुद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कॉर्पोरेट्स से बात की।

रिलायंस फाउंडेशन ने 2 हफ़्तों के भीतर तैयार किया 100 बेडेड अस्पताल

सरकार की अपील और CSR कानून में बदलाव के बाद देश के तमाम कॉर्पोरेट्स सरकार के लिए मदद के हाथ आगे कर रहे है। रिलायंस फाउंडेशन ने भारत का पहला समर्पित कोरोनावायरस अस्पताल तैयार किया है, ये अस्पताल सिर्फ दो हफ़्तों के भीतर बनकर तैयार हुआ है। सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन हॉस्पिटल ने बीएमसी के सहयोग से, सेवन हिल्स हॉस्पिटल, मुंबई में एक समर्पित 100 बिस्तर का सेंटर स्थापित किया है। ये सेंटर मुंबई के उन मरीजों के लिए है जो कि कोविड-19 के लिए हुए टेस्ट में पॉजिटिव आए हैं। यह भारत में अपनी तरह का पहला सेंटर है, जो कि पूरी तरह से रिलायंस फाउंडेशन द्वारा फंडेंड है। सभी बेड आवश्यक बुनियादी ढांचे, बायो मेडिकल उपकरण जैसे वेंटिलेटर, पेसमेकर, डायलिसिस मशीन और रोगी निगरानी उपकरणों से सुसज्जित हैं।

कोरोनावायरस से लड़ने के लिए महिंद्रा बनाएगी वेंटिलेटर

इसके आलावा रिलायंस ने कोरोना वायरस महामारी को देखते हुए मास्क की उत्पादन क्षमता बढ़ाकर एक लाख मास्क प्रतिदिन करने, कोविड 19 के मरीजों को ले जाने वाले वाहनों को मुफ्त ईंधन देने और अलग अलग शहरों में मुफ्त भोजन उपलब्ध कराने की घोषणा भी की है। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने यह भी कहा कि अगर इस संकट के कारण उसका काम रूकता है तो भी वह स्थायी और ठेका पर काम करने वाले कर्मचारियों को पूरा वेतन देगी। वही रिलायंस ही नहीं महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने भी कोरोना वायरस से जारी इस जंग में सरकार का साथ देने का ऐलान किया है । कंपनी की ओर से कहा गया कि उनकी कंपनी तुरंत इन संभावनाओं पर काम करना शुरू कर रही है कि कैसे उनकी निर्माण इकाइयों में वेंटिलेटर तैयार किए जा सकते हैं। साथ ही अपनी 100 फीसदी सैलरी का योगदान करेंगे ।

CSR के तहत वेदांता देगी 100 करोड़, पेटीएम 5 करोड़

इसी कड़ी में वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड के कार्यकारी अध्यक्ष अनिल अग्रवाल ने भी सरकार की मदद के लिए 100 करोड़ का योगदान दिया है। वहीं पेटीएम के संस्थापक और सीईओ विजय शेखर शर्मा ने भारतीय रिसर्चर्स को कोरोना वायरस की दवा खोजने के लिए 5 करोड़ रुपये देने की बात कही है। निजी क्षेत्र के डीसीबी बैंक ने भी देश में कोरोनावायरस महामारी से निपटने के उपायों के लिए अगले 3 महीने में 1 करोड़ रुपए का योगदान करेगा। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक भारतीय स्टेट बैंक भी कोरोनावायरस से लड़ने के लिए एक आपात फंड तैयार किया है। एसबीआई ने इस फंड में अपने सालाना प्रॉफिट का 0.25 फीसदी हिस्सा देने का ऐलान किया है। इस फंड का इस्तेमाल बैंक मुख्य रूप से उन लोगों पर किया जाएगा, जिन्हें पैसों की कमी से हेल्थ सर्विस नहीं मिल पाती हैं। एसबीआई इस महामारी के समय में स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

इंफोसिस 200 बिस्तर ब्रॉडवे अस्पताल को करेगी तैयार

जो संस्थान और कॉर्पोरेट्स सीधे तौर पर भारत सरकार और राज्य सरकारों को आर्थिक मदद नहीं कर रहे है वो इस वायरस के रोकथाम के लिए प्रचार प्रसार कर रहे है साथ ही जिन इलाकों में कॉर्पोरेट्स के बिजनेस है वहां उन इलाकों को सीएसआर फंड का इस्तेमाल कर इलाके में सेनिटाइज़ किया जा रहा है। नवीन जिंदल की JSPL फाउंडेशन भी प्रचार प्रसार और सेनिटाइज़ का काम कर रही है। इंफोसिस फाउंडेशन कर्नाटक सरकार की मदद के लिए आगे आया है। सुधा मूर्ति के नेतृत्व में इंफोसिस फाउंडेशन ब्रॉडवे अस्पताल में सुविधाएं स्थापित करेगा इस पहल से 200 बिस्तर ब्रॉडवे अस्पताल में तैयार हो पाएंगे जहां पर अत्याधुनिक मेडिकल उपकरण और वेंटीलेटर मौजूद रहेंगे।