भूकंप पर 24 घंटे नजर, देश में खुलेंगी 100 नई ऑब्जर्वेटरी, जानें क्या होगा फायदा

The CSR Journal Magazine

भूकंप निगरानी में नया अध्याय

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने देशभर में 100 नई भूकंप वेधशालाएं स्थापित करने की योजना बनाई है। यह कदम भूकंप निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करेगा। इनमें जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में चार-चार नई वेधशालाएं शामिल होंगी। यह जानकारी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दी। मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कुमार तुम्माला ने किश्तवाड़ में देश की 183वीं भूकंप ऑब्जर्वेटरी का उद्घाटन करते हुए यह घोषणा की। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस वेधशाला का उद्घाटन किया।

नए तकनीकी उपायों का लाभ

तुम्माला ने बताया कि इस विस्तार से भूकंप का पता लगाने की क्षमता को 2.5 तीव्रता तक कम किया जा सकेगा। इससे छोटे भूकंपों का भी पता लगाना संभव होगा। उन्होंने कहा कि मंत्रालय राष्ट्रीय भूकंप निगरानी नेटवर्क का विस्तार करने की दिशा में काम कर रहा है। पिछले वर्षों में इस नेटवर्क में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। 2014 में इस नेटवर्क में 84 स्टेशन थे, जो अब बढ़कर 183 हो गए हैं।

24 घंटे की निगरानी प्रणाली

यह नेटवर्क पूरे देश में 24 घंटे भूकंप की निगरानी करता है, जिसमें हिमालयी क्षेत्र और सीमावर्ती इलाके भी शामिल हैं। तुम्माला के अनुसार, पहले नेटवर्क की क्षमता चार या उससे अधिक तीव्रता के भूकंपों का पता लगाने तक सीमित थी। अब यह क्षमता तीन या उससे अधिक तीव्रता के भूकंपों का पता लगाने की हो गई है। प्रस्तावित विस्तार के बाद, 2.5 तीव्रता तक के भूकंपों की निगरानी संभव होगी।

डिजिटल तकनीक का उपयोग

किश्तवाड़ में स्थापित नई वेधशाला में डिजिटल रिकॉर्डिंग तकनीक का उपयोग किया गया है। यह पुरानी एनालॉग प्रणाली की जगह लेगी और भूकंप संबंधी आंकड़ों को अधिक प्रभावी तरीके से दर्ज करने में मदद करेगी। मंत्रालय आपदा तैयारियों को मजबूत करने के लिए भूकंपीय माइक्रोजोनेशन अध्ययन भी करा रहा है। सचिव ने बताया कि राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र ने पांच शहरों में यह अध्ययन पूरा कर लिया है, जिनमें श्रीनगर भी शामिल है।

आम लोगों के लिए जानकारी का प्रसार

भूकंप संबंधी जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र की वेबसाइट और ‘भूकंप’ मोबाइल एप के जरिए वास्तविक समय की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके अलावा, एसएमएस, ईमेल और सोशल मीडिया के माध्यम से भी लोगों को जानकारी दी जाती है। इस पहल से लोगों को भूकंप की स्थिति के बारे में समय पर जानकारी मिल सकेगी।

भूकंप निगरानी का महत्व

तुम्माला ने कहा कि किश्तवाड़ की नई वेधशाला चिनाब घाटी और आसपास के हिमालयी क्षेत्र में भूकंप निगरानी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी। इसके अलावा, मौसम निगरानी और पूर्वानुमान व्यवस्था में सुधार का भी उल्लेख किया गया। मौसम संबंधी अवलोकन नेटवर्क, रडार और स्वचालित मौसम केंद्रों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे मौसम की निगरानी और पूर्वानुमान क्षमता बेहतर होगी।

भविष्य की योजनाएं

इस नेटवर्क के विस्तार से न केवल भूकंपों की निगरानी में सुधार होगा, बल्कि इससे आपदा प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। मंत्रालय के अधिकारी ने कहा कि यह कदम देश के विभिन्न हिस्सों में भूकंप के खतरे को कम करने में सहायक होगा। भूकंपों की सही समय पर जानकारी मिलने से नागरिकों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

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