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श्रमिक एक्सप्रेस कितनी सुरक्षित ? जानिए इसकी सुविधाएं

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श्रमिक एक्सप्रेस कितनी सुरक्षित ? जानिए इसकी सुविधाएं
 
महाराष्ट्र में बढ़ते मामले को देखते हुए मजदूरों का लगातार पलायन जारी है, मुंबई हो या पुणे मजदुरों को जो साधन मिल गया सब अपने गांव चले जा रहें है। कोई पैदल तो कोई ट्रक का सहारा ले रहा है। श्रमिक एक्सप्रेस भी उतनी मात्रा में नहीं चल रही है जितनी मात्रा में उत्तर भारत की ओर लोग जाना चाह रहें है। जाहिर है ये कोरोना का संकट काल चल रहा है ऐसे में जिंदगी की जद्दोजहद ही काफी है लेकिन जिस तरह से मजदूर पलायन कर रहें है, सरकार का रवैया बेहद ही उदासीन है, राज्य सरकारों के लाख दावों के बाद भी मजदूर मजबूर है, सवाल ये कि आखिरकार मजदूर क्यों सरकार पर भरोसा नहीं कर रहें है।
1 मई से केंद्र सरकार ने श्रमिक एक्सप्रेस चलाने का ऐलान किया, लाखों की संख्या में मजदूर फंसे है और श्रमिक एक्सप्रेस चंद है जो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहें है। जिन्हे श्रमिक एक्सप्रेस में जाने का मौक़ा मिल गया मानों उनकी लॉटरी लग गयी। लेकिन ये सफ़र भी आसान नहीं है। दर दर भटकने के बाद मजदूरों की जैसे तैसे नंबर लग रहा है, इन्हें महज 2 या 3 घंटों पहले बताया जा रहा है और स्टेशन पहुंचने के लिए बोला जा रहा है या पुलिस स्टेशन से रेलवे स्टेशन लाया जा रहा है। फिर कतार में इन्हें ट्रेन में बिठाया जा रहा है। पहले तो एक सीट पर दो लोग ही बैठते से लेकिन अब तीन लोगों को बिठाया जा रहा है।

दो गज की दूरी है जरूरी लेकिन ट्रेन में है मज़बूरी

कोरोना से लड़ने के लिए पीएम नरेंद्र मोदी ने दो गज की दूरी है जरूरी का मंत्र सिखाया लेकिन श्रमिक एक्सप्रेस ट्रेन में ये संभव भी नहीं हो पा रहा है। एक सीट पर तीन लोगों में एक फूट की दूरी भी नहीं हो पा रही है, दो गज दूरी दूर की बात है। ट्रेन में टिकट की कॉन्ट्रवर्सी के बाद तो सरकार जाग गयी लेकिन बेस्ट बसों से जिनको स्टेशन लाया गया उनसें पैसे वसूले गए। मजदूरों के लिए पैसे मायने फिलहाल नहीं है। ये मजदूर अगर साढ़े तीन तीन हज़ार देकर भेड़ बकरियों की तरह ट्रक में जा सकते है तो पैसे खर्च करना इनके लिए बड़ी बात नहीं है, बशर्ते इनकी यात्रा को सरकार सुरक्षित बनाये।

श्रमिक एक्सप्रेस कितनी सुरक्षित

श्रमिक एक्सप्रेस कितनी सुरक्षित है ये सवाल इसलिए क्योंकि इसमें यात्रा करने वालों के बीच कोई सोशल डिस्टेंसिंग नहीं होती है, और जब से ये सफर की शुरवात होती है आप की दुश्वारी शुरू हो जाती है, ट्रेन में चढ़ते वक़्त आपको एक मास्क दे दिया जाता है और एक छोटा खाने का पैकेट वो भी एक कंडीशन के साथ, कंडीशन ये कि ये सब आपको तभी दिया जायेगा जबतक प्रशासन के पास स्टॉक हो। पानी का तो नामोनिशान नहीं रहता। अब आप कहेंगे कि कोरोना काल में अत्याधुनिक सुविधाओं की डिमांड करना बेमानी है लेकिन ज़नाब मजदूर भले मजबूर है लेकिन ये भी इंसान है।

श्रमिक एक्सप्रेस में ना खाने की व्यवस्था ना पानी की

मुंबई से गोरखपुर का सफर 36 घंटों का है, ट्रेन लगातार चलती है, बीच बीच में टेक्नीकल हॉल्ट होता है, मजदूर मुंबई से एक बार चढ़ा तो फिर गोरखपुर ही उतर सकता है, बीच में कहीं नहीं उतर सकता, एक बार अगर मुंबई में खाना मिला तो ठीक नहीं तो आपको सीधे जबलपुर में खाना और पानी मिलेगा, लेकिन इसकी भी कोई गारंटी नही है, और इसे पाने जो मारामारी होती है कि एक समय के लिए सब सोशल डिस्टेंसिंग भूल जाते है।भूक प्यास मजदूरों की ऐसी कि कोरोना का ख़ौफ़ भारी पड़ता है। जबलपुर दूसरे दिन पड़ता है, दोपहर में खाना पानी जबलपुर में मिल गया लेकिन रात में कुछ नहीं मिल, ना पानी और ना खाना। बस आप भूख से तड़पते रहिये।

पूरे यूपी में जाने के लिए रोडवेज की फ्री सेवाएं

36 घंटों बाद आप जिंदगी की जद्दोजहद करने के उपरांत जैसे तैसे गोरखपुर पहुंच गए, फिर आप की जान में जान आएगी, ट्रेन जैसे ही गोरखपुर पहुंचेगी आपको ट्रेन से उतरने नहीं दिया जायेगा, एक एक बोगी से यात्रियों को उतारा जायेगा, फिर स्क्रीनिंग की जाएगी, बगल में खाना, पानी और फल मिलेगा उसे आपको दिया जायेगा। फिर आपको आपके गृह जिले में जाने के लिए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बस में बिठाया जाएगा। भले हो आप उत्तर प्रदेश के किसी भी जिले में जाना चाहते है, रोडवेज की बसें आपके लिए मुफ्त में मौजूद रहती है। बसों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखा जा रहा है। मजदूरों के लिए जिस स्टेशन पर ट्रेन से उतर रहें है उसके बाद जहाँ भी जाना चाह रहें है वो यूपी सरकार उन्हें अपने गांव भेज रही है।

गांव पहुंचने पर घरों में रहें होम क़्वारन्टाइन

अपने वतन वापसी पर जाहिर है आप खुश होंगे लेकिन आप को 14 दिनों के लिए होम क़्वारन्टाइन रहना होगा, इस बीच आप अपने ग्राम प्रधान को भी इसकी सूचना दे दें। अगर आपको होम क़्वारन्टाइन है और सेहत में कोई भी दिक्क्त हो तो आप जिला प्रशासन को जरूर सुचना दें। ये बात जरूर याद रखें कि भले आप अपने घर, अपने वतन, अपने गांव में आ गए है लेकिन कोरोना को हराने के लिए मूल मंत्र ना भूलें – दो गज की दूरी है जरुरी, घरों में रहें, सुरक्षित रहें, लॉक डाउन का पालन करें।