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सीएसआर फंड सिर्फ केंद्र को क्यों – कांग्रेस

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सीएसआर यानि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी, वो रकम जो समाज की भलाई के लिए कॉर्पोरेट कंपनियां दान देती है। ये रकम लाखों करोड़ों में होता है। इस कोरोना के संकट काल में हम सबने देखा सुना कि टाटा ने 1500 करोड़ दान दिया, अंबानी ने 500 करोड़ दान दिया। ये रकम पीएम केयर्स फंड में दान दिया गया। नियमों के अनुसार जितने भी कॉर्पोरेट्स है, वो अपने सीएसआर फंड का इस्तेमाल सरकार की मदद के लिए कर सकते है। अब यही बात राज्य सरकारों को अखरने लगी और इसको लेकर रस्साकशी भी होने लगी। सीएसआर फंड के तहत केंद्र सरकार के खाते में तो करोडो रुपये आ गए लेकिन इस बीच गरीब रह गयी राज्य सरकारें।

सीएसआर फंड पर महाराष्ट्र की कांग्रेस सरकार, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु सरकार उठा चूका है सवाल

कोरोना काल के संकट में केंद्र सरकार के सामने राज्य सरकारों ने फंड का रोना शुरू कर दिया, कोरोना काल में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर जनता बचाने के बजाय राज्य सरकारें पैसों की कमी का रोना शुरू कर दिया, हो भी क्यों न, इस महामारी से लड़ने के लिए आर्थिक रूप से सक्षम होना जरुरी है। वेस्ट बंगाल, तमिलनाडु, केरला के बाद अब महाराष्ट्र में भी ये आरोप लगने लगा है कि सीएसआर फंड को लेकर केंद्र सरकार राज्य सरकारों के साथ भेदभाव कर रही है। ममता बनर्जी ने तो कहा है कि केंद्र सरकार का फंड को लेकर रवैया भेदभाव है वही महाराष्ट्र सरकार के राजस्व मंत्री बालासाहेब थोराट ने तो महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को खत लिखकर ये भी मांग की है कि महाराष्ट्र सरकार केंद्र सरकार से इस बाबत बात करें।

पीएम केयर फंड में निधि जमा करने दबाव डाल रहे केंद्रीय मंत्री – कांग्रेस

बहरहाल इस बीच महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता सचिन सावंत ने बीजेपी पर बड़ा आरोप लगाया है कि महाराष्ट्र सहित देशभर के उद्योगपति राज्य की आर्थिक मदद करना चाहते हैं लेकिन मुख्यमंत्री सहायता निधि में दिया गया दान सीएसआर निधि के तहत नहीं आएगा, इस लिए उद्योगपति पीछे हो रहे हैं। जबकि केंद्र सरकार के कई मंत्री उद्योगपतियों पर पीएम केयर फंड में निधि देने के लिए दबाव डाल रहे हैं। सांवंत ने कहा कि केंद्र सरकार के आपदा व्यवस्थापन कानून में राज्य आपदा निवारण निधि तो लेकर स्पष्टता नहीं है। राज्य आपदा निवारण निधि में सीएसआर के तहत केवल वस्तु स्वीकार करने की अनुमति है। लेकिन लॉकडाउन के चलते फिलहाल इस प्रावधान का कोई लाभ नहीं है।

सीएसआर विवाद पर देवेंद्र फडणवीस का जवाब

कांग्रेस के इन आरोपों का जवाब देते हुए महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि कॉरपोरेट सोशल रेस्पांसिब्लिटी फंड केवल प्रधानमंत्री राहत कोष में ही जमा किया जा सकता है। ऐसा नियम केंद्र सरकार ने 2013 में तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार ने ही बनाया था। इसके बाद भी राज्य सरकार एसडीआरएफ खाते में सीएसआर फंड स्वीकार कर सकती है। ऐसा नहीं है कि राज्य सरकार को सीएसआर फंड नहीं मिल सकता। सीएसआर फंड राज्य सरकार ले सकती है। केंद्र सरकार मदद दे भी रही है। खुद यह बात मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे भी कह चुके हैं, लेकिन कुछ नेता केंद्र की मदद को लेकर विवाद पैदा करना चाहते हैं।

क्या है पूरा विवाद

महाराष्ट्र कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार ने जानबूझकर सीएसआर की राशि मुख्यमंत्री सहायता निधि में नहीं देने का नियम बनाया है। यह राज्य सरकारों के साथ अन्याय है। सचिन सावंत ने The CSR Journal से ख़ास बातचीत करते हुए बताया कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के अनुच्छेद 46 के अनुसार केंद्र सरकार राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष का निर्माण करती है। उक्त अधिनियम के 46 (1 बी) द्वारा किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा आपदा प्रबंधन के उद्देश्य से दिए जाने वाले अनुदान को इस कोष में स्वीकार किया जा सकता है। । इसी प्रकार इसी अधिनियम के अनुच्छेद 48 के द्वारा राज्य सरकार ने राज्य आपदा और प्रतिक्रिया शमन निधि बनाई। लेकिन उक्त अधिनियम में व्यक्तिगत या किसी संस्थान से अनुदान स्वीकार करने का कोई प्रावधान नहीं है। इस अस्पष्टता के कारण आज तक राज्य सरकार ने उक्त निधि में किसी व्यक्ति या संस्थान से कोई अनुदान स्वीकार नहीं किया है।
10 अप्रैल, 2020 के सामान्य परिपत्र संख्या 15/2020 द्वारा केंद्र सरकार ने अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर दिया है। तीसरे और चौथे प्रश्न के उत्तर में, केंद्र सरकार का कहना है कि कोविद -19 से लड़ने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को कॉर्पोरेटों द्वारा दिए गए योगदान को सीएसआर के तहत माना जाएगा। लेकिन केंद्र सरकार यह अच्छी तरह से जानती है कि आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 में इसका उल्लेख नहीं है। केंद्र सरकार के सामान्य परिपत्र संख्या 10/2020 दिनांक 23 मार्च 2020 के अनुसार, कंपनियां कंपनी अधिनियम 2013 के प्रावधानों के अनुसार कोविद -19 के लिए व्यक्तिगत रूप से खर्च करने और सीएसआर का लाभ लेने में सक्षम होंगी, लेकिन राज्य सरकार का कोई नियंत्रण नहीं होगा।