इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी पुलिस पर लगाया 26 लाख का जुर्माना, जानिए मुख्य मामले

The CSR Journal Magazine

अवैध हिरासत के मामलों में जुर्माना

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पिछले 9 महीनों में उत्तर प्रदेश पुलिस पर करीब 26 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना जनवरी से सितंबर 2026 के बीच विभिन्न मामलों में अवैध गिरफ्तारी और हिरासत से जुड़े मामलों में लगाया गया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस की खराब प्रक्रिया और अवैध हिरासत के चलते यह जुर्माना अज्ञात है।

कमलेश कुमार का मामला

हाल ही में कमलेश कुमार के मामले में हाईकोर्ट ने 50 हजार रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। कमलेश को 15 अगस्त से 19 अगस्त 2026 तक बिना किसी वैध कारण के पुलिस हिरासत में रखा गया। उनकी गिरफ्तारी 19 अगस्त को दिखाई गई, जबकि वे पहले से ही हिरासत में थे। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की बेंच ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की।

अन्य महत्वपूर्ण मामले

कमलेश के मामले के अलावा कई अन्य मामलों में भी न्यायालय ने पुलिस की कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। मनोज कुमार के मामले में, पुलिस ने 10 लाख रुपये का जुर्माना भुगतने का आदेश दिया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगा दी। इसी तरह, अनिल सोनी के मामले में कोर्ट ने 5 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

पुलिस की प्रक्रियाओं पर सख्त टिप्पणी

इसी दौरान, सचिन आर्य के मामले में कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के आदेश के बाद रिहाई में 20 घंटे की देरी हुई, जो पुलिस के काम करने के तरीके पर सवाल उठाती है। पूरी प्रक्रिया में कई बार पुलिस की गलतियों और उसके खिलाफ न्यायपालिका की सख्ती का सामना करने के संकेत मिले हैं।

दूसरे मामलों की सूची

जनवरी से सितंबर 2026 तक, हाईकोर्ट ने कई मामलों में मुआवजे की राशि निर्धारित की। सुनील कांडू के मामले में 1 लाख रुपये, मंसूर अहमद के मामले में 2 लाख रुपये, और चंदर पाल सिंह के मामले में 75 हजार रुपये का मुआवजा दिया गया। ऐसा प्रतीत होता है कि यूपी पुलिस को नियमित रूप से कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने में बहुत कमिया आ रही हैं।

वीडियो और CCTV की कमी

कई मामलों में सुनवाई के दौरान वीडियो और CCTV फुटेज की अनुपलब्धता के कारण पुलिस से स्पष्टीकरण मांगा गया। इसने पुलिस की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा किया है। अदालत ने यह भी कहा कि मामलों की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए।

अभिषेक त्यागी का मामला

अभिषेक त्यागी के खिलाफ गुंडा नियंत्रण एक्ट के तहत की गई कार्रवाई पर भी कोर्ट ने नकारात्मक टिप्पणी की और 50 हजार रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया। कोर्ट ने इसे निष्कर्ष पर पहुँचाया कि किसी एक या दो मामलों की आधार पर किसी को गुंडा नहीं माना जा सकता।

कमलेश कुमार की कानूनी प्रक्रिया

यूपी पुलिस की गलती को स्वीकार करने की सराहना करते हुए न्यायालय ने कहा कि यह बेहद आवश्यक है कि किसी को कानून के बिना हिरासत में नहीं रखा जा सकता। यह आदेश अलग-अलग मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं में कमी को उजागर करते हैं और सरकार के औपचारिक कदमों को महत्वपूर्ण बनाते हैं।

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