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विश्व एड्स दिवस 2020 – सीएसआर रोकता एड्स का प्रसार

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भारत में एचआईवी और एड्स के मामले लगातार कम हो रहें हैं, आकड़ों में गिरावट दर्ज की जा रही है, एचआईवी के नए मामले भी आने बहुत कम हो गए हैं। एचआईवी/एड्स के मामलों में कमी की वजह इस बीमारी के प्रति जागरूकता और सीएसआर है। सीएसआर फंड की मदद से भारत सरकार और देश की कॉर्पोरेट्स बड़े पैमानें पर जागरूकता अभियान चला रहीं हैं नतीजन एड्स का प्रसार कम होता जा रहा है। एड्स के खिलाफ शुरू की गई योजनाबद्ध जंग से अब इसकी पकड़ लगातार ढीली पड़ रही है।
सरकार 2024 तक देश से एड्स का पूरी तरह खत्म करने का इरादा रखती है। सरकार ने एचआईवी-एड्स के खिलाफ अपनी जंग को धार देने के लिए नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको NACO) तो बनाया ही है। इसके साथ ही इस काम में देश के कॉर्पोरेट्स, जानी-मानी हस्तियों, हेल्थ वर्कर्स और आम जनता का भी सहयोग लिया जा रहा है। एचआईवी-एड्स रोगियों को जरूरी मेडिकल हेल्प देने के साथ ही स्वस्थ जीवनशैली जीने का तरीका भी सिखाया जा रहा है।

एचआईवी-एड्स के नए मामलों में आयी 90 फीसदी तक की कमी

देश में 1986 में पहला मामला सामने आने के बाद एचआईवी-एड्स कई दशकों एक बड़े खौफ का सबब रहा। लेकिन देश में एचआईवी-एड्स के नए मामलों में अब करीब 90 प्रतिशत तक की कमी आई है। नाको की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2017 में देश में 21.40 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित थे। इस दौरान करीब 69 हजार लोगों की मौत इसके कारण हुई और 22675 प्रेग्नेंट महिलाओं को एंटीरोट्रोवायरल थेरेपी की जरूरत पड़ी।

एचआईवी-एड्स से मौतें भी हुई कम, 71 फीसदी की कमी

नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन की माने तो साल 2017 तक एड्स के नए मामलों में तो भारी कमी आई ही, इसके कारण होने वाली मौतें भी 2005 के मुकाबले करीब 71 फीसदी प्रतिशत कम हुईं। आंकड़े बताते हैं कि देश में 2.2 प्रतिशत सेक्स वर्कर, 4.3 फीसदी समलैंगिक, इंजेक्शन के जरिए ड्रग्स लेने वाले 9.9 और 7.2 प्रतिशत ट्रांसजेंडर एचआईवी-एड्स से प्रभावित हैं। देश के उत्तर पूर्वी राज्यों, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में अभी इसका ज्यादा असर है।

आज है विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day)

आज विश्व एड्स दिवस है, 1988 के बाद से 1 दिसंबर को हर साल मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य एचआईवी संक्रमण के प्रसार की वजह से एड्स महामारी के प्रति जागरूकता बढाना, और इस बीमारी से जिसकी मौत हो गई है उनका शोक मनना है। सरकार और स्वास्थ्य अधिकारी, ग़ैर सरकारी संगठन और दुनिया भर में लोग अक्सर एड्स की रोकथाम और नियंत्रण पर शिक्षा के साथ, इस दिन का निरीक्षण करते हैं। साल 1996 में HIV/AIDS पर संयुक्त राष्ट्र (United Nations) ने वैश्विक स्तर पर इसके प्रचार और प्रसार का काम संभालते हुए साल 1997 में विश्व एड्स अभियान के तहत संचार, रोकथाम और शिक्षा पर कार्य करना शुरू किया।

भारत में एड्स-एचआईवी (AIDS-HIV) से लड़ने के लिए सीएसआर (CSR) पहल

सीएसआर की मदद से बड़े पैमाने पर एड्स-एचआईवी की रोकथाम के लिए काम किया जा रहा है। एड्स मरीजों की जिंदगी में सीएसआर बड़ा मददगार साबित हो रहा है। झारसुगुड़ा में वेदांत ने अपनी परियोजना ‘जागृति’ के तहत ग्रामीणों में एचआईवी / एड्स जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। कंपनी की मोबाइल हेल्थ यूनिट (MHU) एचआईवी-एड्स के विभिन्न पहलुओं पर लोगों को जागरूक किया जा रहा है। जिसमें बीमारियों की रोकथाम और प्रभावितों के संबंधित कलंक और भेदभाव को दूर करने की कोशिश की जा रही है।

अंबुजा सीमेंट और अपोलो टायर्स सीएसआर एचआईवी / एड्स से निपटने की पहल सराहनीय

एचआईवी/एड्स बीमारी से सबसे ज्यादा ग्रसित ट्रक ड्राइवर होते है। ट्रक ड्राइवर की वजह से एचआईवी/एड्स का प्रसार भी होता है ऐसे कई केसेस सामने आये हैं। ऐसे में कई कंपनीज अपना कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (Corporate Social Responsibility) फंड ट्रक ड्राइवर्स में जागरूकता फ़ैलाने के लिए करती हैं। ट्रक चालक असामान्य रूप से लंबे समय तक काम करने के साथ कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं और महीनों तक अपने परिवार से दूर भी रहते हैं। इसलिए सुरक्षित यौन संबंध के लिए कॉर्पोरेट्स ट्रक ड्राइवर्स को प्रोत्साहित करते हैं।
अपोलो टायर्स फाउंडेशन और अमुबुजा सीमेंट फाउंडेशन ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत एक हेल्थ केयर सेंटर की स्थापना की है। अपने सीएसआर पहल से यह हेल्थ केयर सेंटर 2009 में धूलगढ़ ट्रक टर्मिनल में स्थापित किया गया था और यह अन्य यौन संक्रमणों के साथ-साथ एचआईवी / एड्स की रोकथाम, पहचान और उपचार जैसी स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की एक श्रृंखला प्रदान करता है।

एड्स की रोकथाम के लिए जॉनसन एंड जॉनसन इंडिया द्वारा सीएसआर के तहत किया जा रहा है “प्रेरणा” कार्यक्रम

प्रेरणा जॉनसन और जॉनसन इंडिया की एक सीएसआर पहल है जिसका उद्देश्य मुंबई, भारत में सबसे कमजोर युथ जनरेशन यानी युवा आबादी में एचआईवी / एड्स को रोकने और कम करना है। यौन उत्पीड़न के खिलाफ किसी भी बुनियादी सुरक्षा के बिना रेड लाइट एरिया में पैदा हुए बच्चे शोषण के शिकार हो सकते हैं – खासकर जब वे अपनी माताओं को एचआईवी / एड्स से खो चुके हों। जॉनसन एंड जॉनसन के समर्थन से, प्रेरणा के तहत जागरूकता लाना है। आंतरिक कलंक को कम करना है और प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत वृद्धि और विकास प्रक्रिया को आकार देने के लिए आत्मविश्वास बढ़ाना है।

सीएसआर के जरिये टाटा हॉस्पिटल द्वारा एचआईवी / एड्स की पहल

स्नेह केंद्र, टाटा हॉस्पिटल (TMH) द्वारा HIV / AIDS के खिलाफ CSR पहल है। टाटा अस्पताल ने अपने कार्यस्थल और समुदाय दोनों में 1990 के दशक की स्नेहा केंद्र की शुरुआत की। एड्स जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के अलावा, TMH ने एचआईवी परामर्श और परीक्षण सुविधा शुरू की।

L&T ने भी शुरू की है ART सेंटर

एड्स  रोकथाम के लिए L&T भी आगे आया है, L&T ने मुंबई के आलावा अन्य जगहों पर ART सेंटर की स्थापना की है जहां एड्स मरीजों का इलाज किया जाता है वो भी बिलकुल मुफ्त।यहां डॉक्टर की टीम मरीजों के स्वास्थय की परिक्षण करती है और जरूरत के मुताबिक ART दिया जाता है। यहां HIV जाँच भी फ्री किया जाता है।