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सीएसआर पहल से उत्तराखंड के स्कूलों में मिलेंगे सेनेटरी पैड

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हम आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहें हैं। लेकिन आज भी देश के ऐसे इलाके और दुर्गम भाग है जहां महिलाओं और लड़कियों के लिए सेनेटरी पैड की पहुंच आसान नहीं है। स्वास्थ्य के लिए सेनेटरी पैड कितना महत्वपूर्ण है इसकी जागरूकता के लिए और हर जरूरतमंद तक सेनेटरी पैड की पहुंच के लिए अब सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) की मदद भी ली जा रही है। उत्तराखंड में हर स्कूल में सेनेटरी पैड मिल सके इसके लिए यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया ने सीएसआर पहल की है।

यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के सीएसआर (CSR) पहल से मिलेंगे सेनेटरी पैड

उत्तराखंड (Sanitary Pads in Uttarakhand) के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री आवास में यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया व मानव सेवा समाज द्वारा सीएसआर (Corporate Social Responsibility) के अंतर्गत प्रदेश के स्कूलों और अन्य दुर्गम क्षेत्रों में निशुल्क सेनेटरी पैड वितरण के लिए लगाई जाने वाली सेनेटरी पैड वितरण मशीन का शुभारम्भ किया। ये सेनेटरी पैड (Sanitary Pads) “पैड मिशन” के अन्तर्गत लगभग 1000 स्कूली छात्राओं को एक साल के लिए निशुल्क सेनेटरी पैड वितरित किए जाएंगे। ये पहल उत्तराखंड के 20 स्कूलों में शुरू किया जा रहा है। इन स्कूलों में सेनेटरी पैड वितरण मशीन लगाई जाएगी और जरूरतमंद को मुफ़्त में वेंडिंग मशीन से दिया जायेगा।

सीएसआर से उत्तराखंड के 1 हज़ार स्कूली छात्राओं को होगा इसका फायदा

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री धामी ने यूनियन बैंक और संस्था द्वारा चलाए जा रहे इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में अनेकों योजनाएं चला रही है, लेकिन वर्तमान में सभी को आगे आकर समाज को जागरूक करना होगा तभी हम सफल हो सकेंगे। जाहिर है महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े माहवारी के इस विषय को आज भी सोशल टैबू के तौर पर लिया जाता रहा है। इन कुरीतियों को जागरूकता से ही तोड़ा जा सकता है।

माहवारी को लेकर क्या कहती है हेल्थ रिपोर्ट

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की 2015-16 की रिपोर्ट कहती है कि देश में 62 फीसदी महिलाएं पीरियड्स के दौरान पैड के अभाव में कपड़े का इस्तेमाल करतीं हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश की लगभग 70 फीसदी महिलाओं की सेनेटरी उत्पादों तक पहुंच ही नहीं है। जिससे वे गंभीर बीमारियों का शिकार होती हैं।