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‘पैडमैन’ बने आईपीएस राजेश पांडे, CSR से बनाया सेनेटरी पैड

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आईपीएस राजेश पांडे 'पैडमैन' के अवतार में।
 

रियल लाइफ के पैडमैन (Padman) है आईपीएस राजेश पांडे

अक्षय कुमार की फिल्म “पैडमैन” आपने तो जरूर देखी होगी। फिल्म में अक्षय कुमार ने महिलाओं के लिए सुरक्षित सैनिटरी पैड मुहैया कराने के लिए कितनी जद्दोजहद की थी, अभिनेता अक्षय कुमार ने तो फिल्म में रील की भूमिका निभाई थी। लेकिन आज हम आपको रियल भूमिका निभाने वाले शख़्स से मिलाने जा रहें हैं। उत्तर प्रदेश में अपराधियों के छक्के छुड़ा देने वाले मशहूर एनकाउंटर स्पेशलिस्ट आईपीएस राजेश पांडे वो शख़्सियत है जो उत्तर प्रदेश पुलिस के तेज़तर्रार अधिकारियों में शुमार है। ये एनकाउंटर स्पेशलिस्ट है, अपने बंदूक के दम पर खूंखार अपराधियों को धूल चटा देतें हैं। लेकिन अब ये ‘पैडमैन’ के अवतार में हैं।

माहवारी (Menstruation) समस्याओं को समझते हुए राजेश पांडे ने सेनेटरी पैड मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना कराई

आईपीएस राजेश पांडे ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है जिससे महिलाओं की तकलीफें दूर हुईं हैं। राजेश पांडे की पहल से यूपी के चार जिलों की ना सिर्फ आम महिलाओं को सस्ते दर पर सैनेटरी पैड (Sanitary Pad) मिलने लगा है। बल्कि पुलिस में कार्यरत महिलाएं भी बड़े पैमाने पर लाभांवित हो रहीं हैं। महिलाओं की माहवारी समस्याओं को समझते हुए आईपीएस राजेश पांडे ने उत्तर प्रदेश के बरेली पुलिस लाइन में ही सेनेटरी पैड मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट की स्थापना कराई है। उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से पैड बनाने की यह पहली मैन्युफैक्चरिंग यूनिट है। पुलिस विभाग में कार्यरत महिलाओं से लेकर आम महिलाओं को भी ये पैड मिल रहे हैं।  पैड बनाने से लेकर पैकेटिंग का सारा काम महिला पुलिसकर्मी संभाल रहीं हैं।

इंडियन ऑयल सीएसआर (CSR) की मदद से राजेश पांडे बने पैडमैन

सैनेटरी पैड बनानेवाली इस मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से बरेली मंडल के शाहजहांपुर, बदायूं, पीलीभीत सहित चारों जिलों में छह हजार से अधिक महिला पुलिस कर्मियों, परिवार की महिलाओं और बेटियों को गुणवत्तायुक्त सैनेटिरी नैपिकन मिल रहे हैं, वो भी बेहद सस्ते दामों पर। पुलिस लाइन में लगी मशीन की कीमत करीब चार लाख रुपये है। एक पैड की लागत एक से सवा रुपये के करीब आ रही है। मशीन संचालित करने के लिए पुरुष के अलावा महिला पुलिस कर्मियों को भी प्रशिक्षित किया गया है। हम आपको बता दें कि सैनेटिरी नैपिकन (Sanitary Napkins) बनानेवाली इस मशीन को सीएसआर (CSR – Corporate Social Responsibility) फंड की मदद से लगाया गया है। इंडियन ऑयल ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी के तहत ये मशीन दी है।

सोशल टैबू माना जाता है महिलाओं की माहवारी समस्या

महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े माहवारी के इस विषय को सोशल टैबू के तौर पर लिया जाता रहा है। इसी कुरीतियों को तोड़ने का बीड़ा उठाया है राजेश पांडे ने। और शायद यही कारण है कि राजेश पांडे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन से प्रेरित है। 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए जरूरी सैनिटरी नैपकिन के महत्व पर चर्चा की थी। यह पहला मौका था, जब किसी प्रधानमंत्री ने लाल किले से उस विषय पर चर्चा की। जिस पर इस जमाने में भी लोग बात करने से कतराते रहे हैं। और लॉक डाउन की समस्या और पीएम के संबोधन से प्रेरित होकर राजेश पांडे अब पैडमैन बन गए हैं।

माहवारी को लेकर क्या कहती है हेल्थ रिपोर्ट

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की 2015-16 की रिपोर्ट कहती है कि देश में 62 फीसदी महिलाएं पीरियड्स के दौरान पैड के अभाव में कपड़े का इस्तेमाल करतीं हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक देश की लगभग 70 फीसदी महिलाओं की सेनेटरी उत्पादों तक पहुंच ही नहीं है। जिससे वे गंभीर बीमारियों का शिकार होतीं हैं। ऐसे में बरेली के डीआईजी राजेश पांडे ने अपनी उस मुहिम को तेज गति देनी शुरू की है। सैनेटरी पैड बनाना इतना आसान नहीं था, इसके लिए पहले तो रिसर्च किया गया।दिल्ली, नोएडा और गुजरात में पैड बनाने वाली मशीनों की कीमत और पैड कैसे बनाया जाता है इसका सर्वे किया गया। रिसर्च और फिर सुधार करने के बाद सफलता मिली। पैकेटिंग के लिए किसी भी प्रकार की प्लास्टिक प्रयोग नही किया जाता है।
डीआईजी राजेश पांडे ने The CSR Journal से ख़ास बातचीत की। इस दौरान उन्होंने बताया कि “पुलिस लाइन में स्थापित यूनिट से एक घंटे में दो सौ पैड बन रहे हैं। एक पैड बनाने में 2.15 रुपये में खर्च आता है। ऐसे में सात पैड का एक पैकेट 15 रुपये में महिलाओं को मिल रहा है। आम जन भी परिवार की महिलाओं के लिए पुलिस कैंटीन से गुणवत्तायुक्त पैड खरीद सकते हैं।

एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और एसटीएफ के संस्थापक हैं राजेश पांडे

राजेश पांडे ऐसे पुलिस अफसर हैं, जिन्हें बहादुरी के लिए 4 बार गेलेंट्री अवार्ड मिल चुका है। यूपी में कभी आतंक का पर्याय बन  चुका माफिया श्रीप्रकाश शुक्ला सहित कई कुख्यात अपराधियों और वाराणसी बम ब्लास्ट में शामिल लश्कर-ए-तैय्यबा के मुख्य आतंकी सलार जंग सहित दर्जनों एनकाउंटर करने के लिए राजेश पांडेय जाने जाते हैं।  भारत सरकार की ओर से संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन में एक साल के लिए कोसोवो में भी तैनात रहे। यूपी एसटीएफ और एटीएस के संस्थापक सदस्य भी रहे। तकनीक के जरिए अपराधियों के गिरेबान तक पहुंचकर उन्हें ढेर करने में उन्हें महारथ हासिल है। राजेश पांडेय को सिर्फ अपनी धाकड़ छवि ही नहीं बल्कि सामाजिक कार्यो से भी बहुत पहचान मिली हैं। फिर वो गरीब को घर दिलाना हो, एक मनोरोगी मां को उसके बच्चे से मिलाना हो या सैकड़ों बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना हो।  लेकिन इस बार फिर राजेश पांडे ने अपने कार्यों से एक अलग ही नजीर पेश की है।