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सरकार के इस फैसले से उत्तराखंड में होगा ज्यादा सीएसआर खर्च

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उत्तराखंड में सीएसआर के लिए कंपनियों की होगी पहचान
 

उत्तराखंड में सीएसआर के लिए कंपनियों की होगी पहचान

कोरोना महामारी में सरकारों के साथ खड़ी देश की कॉर्पोरेट कंपनीज ने यूं तो कोरोना से निपटने के लिए कई उपाय और राज्य और केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है। महामारी के दौरान कॉर्पोरेट्स आर्थिक मदद के साथ साथ ऑक्सीजन, दवाईयों, अस्पताल बनाने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। हर राज्य कॉर्पोरेट्स से सीएसआर फंड पाने के लिए अपील कर रहा है ताकि राज्यों की फाइनेंसियल हेल्प हो सके। लोगों को अस्पताल, दवाइयां और ऑक्सीजन मिल सके। उत्तराखंड सरकार ने भी अब सीएसआर के लिए कंपनियों की पहचान करनी शुरू कर दी है।

उत्तराखंड सरकार को राज्य में कार्यरत कंपनियों से CSR मदद की है दरकार

दरअसल इस महामारी के दौरान उत्तराखंड सरकार को राज्य में कार्यरत कंपनियों से CSR मदद की दरकार है। ऐसा नहीं है कि इन कंपनीज से राज्य को सीएसआर (कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी) मदद नहीं मिल पा रही है। लेकिन जो भी मदद मिल रही है वो ऊंट के मुंह में जीरा साबित हो रहा है। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए बड़े पैमाने पर राज्य सरकार को मदद चाहिए जो कि सीएसआर से ये मदद संभव हो पायेगा। सरकार के प्रयासों के बाद भी उत्तराखंड में कार्यरत तमाम कंपनियों से अभी तक अपेक्षित मदद नहीं मिला है। लिहाजा, सीएसआर के दायरे में आने वाली कंपनियों की पहचान शुरू कर दी गई है।

स्टेट जीएसटी डिपार्टमेंट को सीएसआर के लिए सौंपी गई जिम्मेदारी

उत्तराखंड सरकार के सूत्रों की मानें तो सीएसआर से मदद पाने और इन कंपनियों की लिस्ट बनाने का काम राज्य माल एवं सेवा कर यानी स्टेट जीएसटी डिपार्टमेंट को सौंपा गया है। चूंकि स्टेट जीएसटी के पास इन कंपनीज का डेटा होता है इसलिए इस डिपार्टमेंट को ये जिम्मा दिया गया है। स्टेट जीएसटी डिपार्टमेंट ने राज्य में करीब 52 ऐसी कंपनियां को चिंहित किया हैं, जिनका लाभ पांच करोड़ रुपये या नेटवर्थ 500 करोड़ रुपये या न्यूनतम टर्नओवर 1000 करोड़ रुपये है। कॉरपोरेट मंत्रालय के नियमों के मुताबिक ऐसी कंपनियों को सीएसआर फंड में दो फीसदी राशि खर्च करनी होती है।

स्टेट जीएसटी डिपार्टमेंट ने राज्य में करीब 52 ऐसी कंपनियां को किया है चिन्हित

कुछ कंपनियां सीएसआर कानून का पालन करते हुए इस दिशा में आगे बढ़ी हैं। मगर अभी भी तमाम कंपनियों का रुख स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए कंपनियों का डेटा तैयार किया जा रहा है। ताकि कंपनी प्रतिनिधियों से बात कर उन्हें राज्य के प्रति उनकी जिम्मेदारी का एहसास कराया जा सके। हालांकि सीएसआर के दायरे वाली तमाम कंपनियों का मुख्यालय राज्य से बाहर है। लेकिन इनके यूनिट उत्तराखंड में मौजूद होने के बावजूद राज्य सरकार की ये मदद नहीं कर रहें है। ऐसे में इन कंपनीज को राज्य सरकार सीएसआर के लिए अपील कर रही है।

कोरोना से लड़ने के लिए उत्तराखंड को सीएसआर मदद की ज्यादा जरूरत

कोरोना संक्रमण के दौर में जब उत्तराखंड को सीएसआर मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है, और तब कॉरपोरेट्स से अपेक्षित सहयोग न मिल पाने के चलते राज्य सरकार को इस दिशा में रणनीति तैयार करने को मजबूर कर दिया है। भौगोलिक व जनसंख्या के लिहाज से उत्तराखंड छोटा प्रदेश है। इसके बाद भी सरकार यहां कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कंपनियों को भूमि उपलब्ध कराने से लेकर तमाम टैक्सेस में रियायत दे रही है। शायद इस उम्मीद में कि राज्य के पास पर्याप्त सीएसआर आये और प्रदेश का विकास हो सके।