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अयोध्या पर ऐतिहासिक फैसला कल, सामाजिक जिम्मेदारी निभाएं, शांति और सौहार्द बनाये रखें।

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देश का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फैसला आने वाला है, शनिवार सुबह साढ़े दस बजे सुप्रीम कोर्ट अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुनाएगा। एक ओर जहां पूरे देश की निगाहें इस फैसले पर टिकी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर अयोध्या समेत पूरे देश भर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम कर दिए गए हैं। दी सीएसआर जर्नल देश के सभी नागरिकों से गुजारिश करता है कि फैसला कुछ भी आये लेकिन देश की एकता और सौहार्द पर आंच बिल्कुल नही आना चाहिए, देश का हर एक नागरिक अपनी जिम्मेदारी को समझे और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करें। शांति और संयम बनाये रखें। कोर्ट सभी पहलुओं को देखने के बाद ये फैसला दे रहा है ऐसे में समाज मे शांति व्यवस्था बनाये रखना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।
पांच जजों की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की, इस पूरे फैसले में जिन पांच जजों की बेंच फैसला सुनानेवाली है, उसमें शामिल हैं- चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, और जस्टिस एसए नज़ीर, इस पूरे मामले में तीन बड़े पक्ष हैं- रामलला विराजमान, सुन्नी सेन्ट्रल वक़्फ़ बोर्ड और निर्मोही अखाड़ा। फैसले को देखते हुए देशभर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में पिछले हफ्ते से ही उत्तर प्रदेश में सुरक्षा के पूरे इंतजाम किये गए है। पूरे उत्तर प्रदेश, जम्मू कश्मीर में धारा 144 लागू कर दिया गया है, महाराष्ट्र में भी पुलिस की व्यापक इंतेज़ाम है। फैसले से पहले और बाद में भी सोशल मीडिया पर पुलिस नज़र बनाये हुए है।
अयोध्या में सुरक्षा चाक-चौबंद कर दी गई है। शहर के हर मुख्य चौराहे पर पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाई है और किसी भी अज्ञात वाहन और संदिग्ध लोगों पर पैनी नजर रखी जा रही है। कोर्ट के फैसले से पहले अयोध्या में प्रशासन ने 500 लोगों को अरेस्ट किया है, जबकि 12000 लोगों पर नजर रखी जा रही है। अयोध्या में स्थितियों को काबू में रखने के लिए रैपिड ऐक्शन फोर्स के 4000 जवानों के साथ पुलिस बल की तैनाती की गई है। इसके साथ ही खुफिया एजेंसियों के अधिकारी भी हर गतिविधि पर नगर रख रहे हैं।
अयोध्या में 2.77 एकड़ ज़मीन को लेकर विवाद है, ये विवाद वैसे पुराना है, लेकिन इसमें कोर्ट का दखल 1885 से शुरू हुआ, इसी विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2010 को फैसला दिया था। कोर्ट ने 2.77 एकड़ ज़मीन को सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान को बराबर-बराबर बांटने का आदेश दिया था। फैसले में कहा गया था कि जिस जगह रामलला की मूर्ति है उसे रामलला विराजमान को दिया जाए। सीता रसोई और राम चबूतरा निर्मोही अखाड़े को दिया जाए, बचे हुए हिस्से को सुन्नी वक्फ बोर्ड को दिया जाए। लेकिन फैसला किसी को मंजूर नहीं हुआ और तीनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट चले गए। सुप्रीम कोर्ट ने 9 मई 2011 को हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। इसके साथ ही यह भी कहा कि मामला लंबित रहने तक संबंधित पक्षकार विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखेंगे। अब सुप्रीम कोर्ट शनिवार सुबह साढ़े दस बजे अपना सुनाएगा।