भारत में 35–50 वर्ष के युवाओं में अचानक कार्डियक अरेस्ट के मामलों में तेज़ उछाल! फिट और सक्रिय दिखने वाले लोग भी बन रहे हैं दिल की बीमारी के शिकार। तनाव, छिपी बीमारियां और गलत जीवनशैली सबसे बड़े कारण! विशेषज्ञों ने समय पर जांच और कार्डियो फिटनेस पर दिया ज़ोर। हृदय रोग अब बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं, युवाओं के लिए भी बड़ा खतरा!
युवाओं में बढ़ता अचानक कार्डियक अरेस्ट
देश में अचानक हृदयाघात (Sudden Cardiac Arrest- SCA) के मामलों में तेज़ी से हो रही बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति-निर्माताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है। हाल के वर्षों में 35 से 50 वर्ष की आयु के पढ़े-लिखे, संपन्न और फिट दिखने वाले लोग, जिनमें उद्योग जगत के उत्तराधिकारी, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स और नियमित जिम जाने वाले युवा शामिल हैं, अचानक दिल का दौरा पड़ने से जान गंवा रहे हैं। यह स्थिति इस धारणा को पूरी तरह तोड़ती है कि हृदय रोग केवल बुज़ुर्गों की बीमारी है।
क्या कहते हैं प्रमाणित आंकड़े
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत में कुल मौतों का लगभग 28–30 प्रतिशत हिस्सा हृदय रोगों से जुड़ा है। चिंताजनक तथ्य यह है कि भारत में हृदय रोग की शुरुआत पश्चिमी देशों की तुलना में 10–15 वर्ष पहले हो जाती है। ICMR के अध्ययनों से संकेत मिलता है कि 40 वर्ष से कम आयु के लोगों में हार्ट अटैक के मामलों में पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कुछ अस्पताल-आधारित अध्ययनों के अनुसार, आज भारत में हार्ट अटैक के लगभग 25–30 प्रतिशत मरीज 50 वर्ष से कम उम्र के हैं।
Sudden Cardiac Arrest क्या है ?
अचानक कार्डियक अरेस्ट तब होता है जब दिल की इलेक्ट्रिकल प्रणाली अचानक काम करना बंद कर देती है, जिससे दिल धड़कना रोक देता है। यह हार्ट अटैक से अलग है, लेकिन हार्ट अटैक के बाद SCA का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कई मामलों में कोई स्पष्ट चेतावनी लक्षण भी नहीं दिखते।
युवा और संपन्न वर्ग क्यों ज्यादा प्रभावित
हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि शहरी और संपन्न जीवनशैली इस संकट की बड़ी वजह बन रही है।
• अत्यधिक तनाव और लंबे कार्य घंटे: कॉर्पोरेट दबाव, अनियमित नींद और लगातार मानसिक तनाव दिल पर सीधा असर डालते हैं।
• गलत खान-पान: बाहर का तला-भुना भोजन, अधिक नमक, शुगर और ट्रांस फैट।
• शारीरिक गतिविधि का भ्रम: सप्ताह में कुछ दिन जिम जाना, लेकिन दिनभर बैठे रहना, इसे “सेडेंटरी लाइफस्टाइल” कहा जाता है।
• धूम्रपान और अल्कोहल: सोशल ड्रिंकिंग भी हृदय के लिए गंभीर जोखिम बन रही है।
अचानक कार्डियक अरेस्ट के कारण
भारत में युवाओं और मध्यम आयु वर्ग में अचानक कार्डियक अरेस्ट (Sudden Cardiac Arrest) के बढ़ते मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हृदय रोग अब केवल उम्र से जुड़ी समस्या नहीं रहा। इसके पीछे कई वैज्ञानिक, जीवनशैली और सामाजिक कारण हैं, जिनके व्यावहारिक समाधान भी संभव हैं।
1. अनियमित और तनावपूर्ण जीवनशैली
लंबे वर्किंग ऑवर्स, लगातार स्क्रीन टाइम, नींद की कमी और मानसिक दबाव से शरीर में कॉर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाता है। लगातार तनाव दिल की धड़कन में गड़बड़ी (Arrhythmia) का खतरा बढ़ाता है, जो अचानक कार्डियक अरेस्ट का बड़ा कारण बन सकता है।
2. छिपी हुई बीमारियां (Silent Conditions)
कई युवाओं को हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और प्री-डायबिटीज होने की जानकारी ही नहीं होती। ये बीमारियां बिना लक्षण के धीरे-धीरे धमनियों को संकरा कर देती हैं और अचानक दिल का दौरा पड़ सकता है।
3. जेनेटिक और पारिवारिक इतिहास
भारतीयों में आनुवंशिक रूप से कम उम्र में कोरोनरी आर्टरी डिज़ीज़ का खतरा अधिक पाया गया है। यदि परिवार में 55 वर्ष से पहले दिल की बीमारी का इतिहास है, तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
4. फिटनेस का भ्रम
जिम जाना या मसल्स बनाना दिल की सुरक्षा की गारंटी नहीं है। अत्यधिक भारी वेट ट्रेनिंग, स्टेरॉयड का दुरुपयोग और बिना मेडिकल जांच के हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट दिल पर अचानक दबाव डालते हैं।
5. गलत खान-पान
अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, अधिक नमक, चीनी, ट्रांस फैट और रेड मीट से धमनियों में फैट जमता है, जिससे ब्लॉकेज और कार्डियक अरेस्ट का खतरा बढ़ता है।
6. धूम्रपान और अल्कोहल
हल्का या “सोशल” स्मोकिंग और ड्रिंकिंग भी दिल की धमनियों को नुकसान पहुंचाती है। निकोटीन और अल्कोहल दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि को प्रभावित करते हैं।
7. कोविड के बाद की जटिलताएं
कुछ मामलों में कोविड संक्रमण के बाद हार्ट मसल्स में सूजन (Myocarditis) और ब्लड क्लॉटिंग का खतरा बढ़ा पाया गया है, जो कार्डियक अरेस्ट का कारण बन सकता है। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि दिल की हर बीमारी और मौत को कोविड से जोड़ना सही नहीं है, लेकिन पोस्ट-कोविड हार्ट-हेल्थ पर निगरानी जरूरी है।
Sudden Cardiac Arrest से कैसे बचें!
1. समय पर जांच अनिवार्य– 30 वर्ष की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार ECG, Lipid Profile, Blood Pressure, Blood Sugar जांच अवश्य कराएं। यदि जोखिम अधिक हो तो TMT या Echo टेस्ट भी कराएं।
2. दिल-केंद्रित फिटनेस अपनाएं– सिर्फ बॉडी शेप नहीं, बल्कि कार्डियो फिटनेस पर ध्यान दें। रोज़ 30–40 मिनट वॉक, साइक्लिंग या स्विमिंग, हफ्ते में 150 मिनट मॉडरेट एरोबिक एक्सरसाइज़ (WHO गाइडलाइन)!
3. संतुलित और भारतीय आहार– नमक और चीनी कम करें, देसी घी सीमित मात्रा में लें, हरी सब्जियां, फल, दालें, ओमेगा-3 युक्त आहार लें, जंक और प्रोसेस्ड फूड से दूरी बनाएं।
4. तनाव प्रबंधन– 7–8 घंटे की नींद, योग, प्राणायाम और ध्यान, काम और निजी जीवन में संतुलन बनाएं।
5. नशे से दूरी– धूम्रपान पूरी तरह बंद करें, अल्कोहल को न्यूनतम स्तर तक सीमित रखें।
6. चेतावनी संकेतों को नज़रअंदाज़ न करें– सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, अचानक चक्कर या पसीना और दिल की तेज़ या अनियमित धड़कन- ऐसे लक्षणों पर तुरंत मेडिकल सहायता लें।
अचानक कार्डियक अरेस्ट एक चेतावनी है कि आधुनिक जीवनशैली हमारी सेहत से आगे निकल चुकी है। यह अब किसी जेंडर या अति वर्ग तक सीमित नहीं रही। सही समय पर जांच, जागरूकता और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इस साइलेंट किलर को काफी हद तक रोका जा सकता है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

