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आरईसी के सीएसआर से आदिवासी बच्चों की बदल रही है जिंदगी

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आरईसी के सीएसआर पहल से जनजातीय व आदिवासी बच्चों की बदल रही है जिंदगी
 
मध्य प्रदेश में जनजातीय एवं आदिवासी बच्चों की जिंदगी बदल रही है। ये सकारात्मक बदलाव आरईसी (REC Limited) के सीएसआर (Corporate Social Responsibility) से पहल से हो रहा है। REC Limited ने  अपने CSR पहल से आर्थिक रूप से कमजोर जनजातीय बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए सुविधा उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही, सीहोर जिले में 150 आदिवासी छात्राओं के लिए आवासीय भवन का निर्माण भी किया है, जिसमें आवासीय शिक्षा दी जाती है। REC Limited ने ये कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी पहल आरईसी फाउंडेशन (REC Foundation) की मदद से करवाया है।

मध्य प्रदेश के सीहोर और खंडवा में आरईसी की सीएसआर पहल से शिक्षा और पोषण का कार्यक्रम

आरईसी (REC Limited CSR Initiatives) की इस पहल का उद्देश्य आदिवासी (Adivasi Children) बच्चों को सुरक्षित और शिक्षित बनाना और कुपोषण को कम करना है। मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh News) के पूरे खंडवा जिले के गांवों में 11 सेवा कोठियों में 1541 बच्चों को शिक्षा, भोजन और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। सेवा कुटीर दूरदराज के गरीब आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों जिनमें 3 साल से लेकर 14 साल के बच्चे शामिल हैं उनके लिए भोजन के साथ-साथ शिक्षा प्राप्ति का भी केंद्र है।

आरईसी के सीएसआर से जनजातीय व आदिवासी बच्चों जिंदगी में हो रहा है सकारात्मक बदलाव

इस पहल के अंतर्गत बच्चों को प्रतिदिन दो बार भोजन और स्तरीय शिक्षा प्रदान की जाती है। बच्चों के लिए खेलकूद के साथ अन्य प्रकार की गतिविधियां भी आयोजित की जाती है। REC Limited के इस सीएसआर पहल से मध्य प्रदेश के सीहोर में 150 आदिवासी छात्राओं के लिए आवासीय भवन का निर्माण भी शामिल है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि वाले बच्चों को सुरक्षित आवासीय शिक्षा की सुविधा प्रदान की जाती है।

आदिवासी बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर क्या कहते हैं आंकड़े

आदिवासी (Tribal News) बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर आकड़ों की मानें तो भारत में 5 साल से कम उम्र के आदिवासी बच्चों में से लगभग 40 फ़ीसदी बच्चे अल्पविकसित है और इनमें से 16 फ़ीसदी गंभीर रूप से अल्पविकसित है। 2011 की जनगणना के अनुसार आदिवासी लोगों में साक्षरता दर 59 तीसरी है, जबकि अखिल भारतीय साक्षरता दर 73 फीसदी है।