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शिक्षा पर इतना होता है सीएसआर खर्च!

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आज राष्ट्रीय शिक्षा दिवस है, हर जगह शिक्षा पर बात होगी, सोशल मीडिया पर आज शिक्षा पर खूब बहस होगी, शिक्षा के स्तर, पढ़ाई, लिखाई, वगैरह वगैरह, ट्विटर पर भी खूब ट्रेंड होगा। शिक्षा को लेकर रोचक कहानियां सामने आएंगी। लेकिन ये कहानी जो हम आपको बताने जा रहे है वो अनसुनी है। ये कहानी तथ्य है, सच्चाई है। बल्कि यूं कहें कि ये कहानी शिक्षा के स्तर को बढ़ाने वालों की है। शिक्षा में अगर कोई सबसे ज्यादा योगदान दे रहा है तो वो है देश के Corporates और आज राष्ट्रीय शिक्षा दिवस है ऐसे में बात कॉरपोरेट्स और सीएसआर के इर्द-गिर्द ही है।

सीएसआर की पहल से बढ़ रहा है शिक्षा का स्तर

सबसे पहले आपको बता दें कि भारत में विश्व के सर्वाधिक युवा बसते हैं। यहां लगभग एक तिहाई व्यक्तियों की उम्र 15 से 29 वर्ष के बीच है। विश्व में सर्वाधिक युवा देश के रूप में भारत ने रिकॉर्ड कायम किया है। भारत ने सर्व शिक्षा अभियान कार्यक्रम और राइट टू एजुकेशन जैसे कानून को लागू करके शिक्षा तक सबकी पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों के लगभग सभी बच्चों की पहुंच प्राथमिक स्कूलों तक हो चुकी है जो कि उनके घरों के एक किलोमीटर के दायरे में हैं। 2009 में जहां स्कूली सुविधा से वंचित बच्चों की संख्या आठ मिलियन थी, वहीं 2014 में उसकी संख्या गिरकर छह मिलियन हो गई है।

शिक्षा की चुनौतियों से लड़ता कॉरपोरेट्स और सीएसआर

इन उपलब्धियों के बावजूद अनेक चुनौतियां कायम हैं। और इन्हीं चुनौतियों से हर दिन दो चार होता है देश का कॉरपोरेट्स और सीएसआर। शिक्षा की उपलब्धता की चुनौती के बाद अब उत्तम शिक्षण और समानता को सुनिश्चित करने की जरूरत है। भारत में लगभग एक तिहाई बच्चे प्राथमिक शिक्षा पूरी होने से पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं। जो बच्चे स्कूल नहीं जाते, उनमें से अधिकतर पिछड़े लोग, गरीब, कमजोर और सीमांत तबकों के बच्चे होते हैं। इस बात के प्रमाण भी मिले हैं कि बच्चे अपेक्षित स्तर तक नहीं सीख पाते। ऐसे में देश के कॉरपोरेट्स अपने कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड के माध्यम से शिक्षा के स्तर और शिक्षा के बढ़ावे के लिए बीड़ा उठाया है। देश भर में कॉरपोरेट्स अपने CSR की मदद से ऐसे जगहों पर शिक्षा पहुंचा रहें है जहां शिक्षा की पहुंच से अबतक बच्चे दूर थी। शिक्षा पर बनी पॉलिसी और कानून तो अपना-अपना काम कर ही रही है लेकिन मॉडल और तकनीकी शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर में सरकार कमजोर नजर आती है और कॉरपोरेट्स ताकतवर।

सीएसआर की मदद से शिक्षा पर इतना हो रहा है खर्च (CSR in Education)

यहां ये बताना बहुत महत्वपूर्ण है कि देश भर में अगर Corporate Social Responsibility के तहत विकास कार्य हो रहे है तो CSR फण्ड का सबसे ज्यादा इस्तेमाल शिक्षा यानी Education पर हो रहा है। मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉरपोरेट अफेयर्स के आकड़ों की माने तो एजुकेशन पर साल 2019-20 में 7,030 करोड़ रुपये खर्च किये गए है। वहीं साल 2018-19 की बात करें तो 6,071 करोड़ खर्च किया गया है। साल 2017-18 में ये आकड़ा 5,756 करोड़ का रहा। साल 2016-17 में 4,504 करोड़ था और साल 2015-16 में 4,057 करोड़ था। इन आकड़ों से आप अंदाजा लगा सकतें है कि कॉरपोरेट्स द्वारा शिक्षा को कितनी तरजीह दी जा रही है।

ये है कुछ कॉरपोरेट्स जो शिक्षा के क्षेत्र में कर रहे है काम

शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए ऑनलाइन लर्निंग, कंप्यूटर, इ क्लासेस, अच्छा इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए ये कॉरपोरेट्स निरंतर काम कर रहे है। बात करें इन कंपनियों की तो सबसे ऊपर है रिलायंस इंडस्ट्रीज। रिलायंस फाउंडेशन एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स फॉर ऑल 14 गैर सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी करके और जमीनी स्तर पर काम करके वंचित बच्चों की शिक्षा का समर्थन करता है। ये एनजीओ बच्चों के बीच खेल, साक्षरता और जीवन कौशल को प्रोत्साहित करने का काम करते हैं। इस पहल के तहत, प्रौद्योगिकी से जुड़ी एक डिजिटल लर्निंग वैन, मुंबई और ठाणे जिलों के 10 सरकारी स्कूलों के 4,000 से अधिक बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रही है। इन पहलों का कुल मिलाकर 0.2 मिलियन बच्चों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
एनटीपीसी भी शिक्षा पर बहुत खर्च करता है। कल के उज्ज्वल युवाओं को शिक्षित करना एक कर्तव्य है जिसका एनटीपीसी बहुत ध्यान रखताहै। एनटीपीसी उत्कर्ष छात्रवृत्ति माध्यमिक विद्यालय से इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज स्तर तक हर साल 7,300 छात्रों को दी जाती है। विप्रो अपने वार्षिक सीएसआर बजट का एक बड़ा हिस्सा शिक्षा और कौशल पहल के साथ-साथ छात्रवृत्ति और अनुदान के लिए खर्च करता है। इंफोसिस देश में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने में अग्रणी रही है। प्राथमिक विद्यालयों में स्कूल छोड़ने की दर बहुत अधिक है क्योंकि निम्न आय वाले परिवारों के बच्चों को अपना पेट भरने के लिए कमाने की आवश्यकता होती है। ऐसे में इंफोसिस उनके लिए भी काम करती है। महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड ये एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है जो सीएसआर के जरिये शिक्षा के लिए काम करती है। यह विभिन्न पिछड़े जिलों में गर्ल चाइल्ड का समर्थन करके सरकार के बेटी बचाओ बेटी पढाओ के प्रोजेक्ट को समर्थन करता है।