रांची अर्बन कॉरिडोर: 10 महीने में पूरी बदल जाएगी रांची! 36.6 करोड़ की लागत से बनेगा स्पेशल साइकिल ट्रैक और वॉक-वे
झारखंड की राजधानी रांची में पिछले कुछ दिनों से विकास की रफ्तार में अभूतपूर्व तेजी देखी जा रही है। शहर के मुख्य प्रशासनिक और व्यस्ततम रास्तों को जाम से मुक्ति दिलाने और इन्हें एक वैश्विक शहर की तर्ज पर विकसित करने के लिए राज्य सरकार ने कमर कस ली है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हाल ही में राजधानी को एक बड़ी सौगात देते हुए ‘रांची अर्बन कॉरिडोर’ परियोजना के तहत ₹36.6 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इस बड़ी धनराशि से शहर के सबसे महत्वपूर्ण और VIP मार्ग बिरसा चौक से प्रोजेक्ट भवन होते हुए चांदनी चौक, तक के पूरे 2.6 किलोमीटर लंबे मार्ग का कायाकल्प किया जाएगा।
पथ निर्माण विभाग की संयुक्त सचिव प्रिसिला मुर्मू के कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस महात्वाकांक्षी परियोजना को पूरा करने के लिए 10 महीने का कड़ा समय निर्धारित किया गया है। विभागीय अधिकारियों का दावा है कि आने वाले 10 महीनों में जब यह निर्माण कार्य धरातल पर उतरेगा, तो रांची की सूरत पूरी तरह से बदली हुई और आधुनिक नजर आएगी। वर्तमान में इस कॉरिडोर के एक हिस्से, हरमू चौक के कायाकल्प का काम भी धरातल पर तेजी से दिखने लगा है।
क्यों खास है यह अर्बन कॉरिडोर?
यह परियोजना केवल पारंपरिक रूप से सड़क चौड़ीकरण (Road Widening) तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे एक सस्टेनेबल और ग्रीन अर्बन स्पेस के रूप में डिजाइन किया गया है। इस 2.6 किलोमीटर के मुख्य प्रशासनिक खंड पर प्रतिदिन हजारों की संख्या में सरकारी कर्मचारी, अधिकारी, छात्र और आम नागरिक गुजरते हैं। यहाँ प्रोजेक्ट भवन (राज्य सचिवालय), पुलिस मुख्यालय, कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान और घनी आबादी वाले आवासीय क्षेत्र स्थित हैं, जिसके कारण इस पूरे रूट पर दिनभर भारी ट्रैफिक का दबाव रहता है। इस नए कॉरिडोर के बनने से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि पैदल चलने वालों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए भी यह मार्ग एक बेहतरीन अनुभव साबित होगा। विभाग के प्रधान सचिव सुनील कुमार के अनुसार, परियोजना का मूल उद्देश्य वाहन चालकों की सुरक्षा बढ़ाने के साथ-साथ गैर-मोटर चालित परिवहन (Non-Motorised Transport) को बढ़ावा देना और शहर की सुंदरता को बढ़ाना है।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं और बुनियादी ढांचा
1. विशेष साइकिल ट्रैक (Dedicated Cycle Track): प्रदूषण मुक्त आवागमन को बढ़ावा देने के लिए पूरी सड़क के किनारे एक सुरक्षित और समर्पित साइकिल ट्रैक का निर्माण किया जाएगा। यह ट्रैक मुख्य सड़क से पूरी तरह से अलग और सुरक्षित होगा ताकि साइकिल चालकों को किसी तेज रफ्तार वाहन से खतरा न हो।
2. ग्रीन वॉक-वे और फुटपाथ: पैदल यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आधुनिक और सुरक्षित फुटपाथ बनाए जा रहे हैं। इस वॉक-वे के किनारे सुंदर पेड़-पौधे और आकर्षक बागवानी (Horticulture) की जाएगी, जिससे राहगीरों को चलते समय एक सुखद वातावरण मिल सके।
3. ज्यामितीय सुधार (Geometric Improvements): अक्सर सड़कों के खराब डिजाइन या खतरनाक मोड़ों के कारण दुर्घटनाएं होती हैं। इस परियोजना के तहत पूरी सड़क की ज्योमेट्री में सुधार किया जाएगा, जिससे अंधाधुंध मोड़ों को ठीक किया जा सके और यातायात का प्रवाह बिना किसी बाधा के निरंतर बना रहे।
4. यूटिलिटी शिफ्टिंग और ड्रेनेज सिस्टम: सड़क निर्माण के रास्ते में आने वाले बिजली के खंभे, ट्रांसफार्मर और पानी की पाइपलाइनों को व्यवस्थित तरीके से स्थानांतरित (Utility Shifting) किया जाएगा। इसके साथ ही एक अत्याधुनिक जल निकासी प्रणाली (Modern Drainage System) विकसित की जाएगी, ताकि मानसून के दिनों में सड़क पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो।
5. पर्यावरण प्रबंधन और वृक्षारोपण: ग्रीन कॉरिडोर की अवधारणा को पूरी तरह साकार करने के लिए व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया जाएगा। परियोजना में ही पर्यावरण प्रबंधन योजना (Environmental Management Plan) को शामिल किया गया है, जिसके तहत लगाए गए पौधों की एक वर्ष तक देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी निर्माण एजेंसी की होगी।
6. स्मार्ट सार्वजनिक सुविधाएं: सड़क के किनारे नागरिकों के बैठने के लिए बेंच, आधुनिक स्ट्रीट लाइटिंग, कूड़ेदान और सार्वजनिक शौचालय जैसी आधुनिक नागरिक सुविधाएं भी प्रदान की जाएंगी।
रांची के व्यापक मास्टर प्लान का हिस्सा
यह ₹36.6 करोड़ की परियोजना रांची को एक अत्याधुनिक स्मार्ट सिटी बनाने के व्यापक मास्टर प्लान का केवल एक हिस्सा है। इस कॉरिडोर के समानांतर ही रांची में इंफ्रास्ट्रक्चर के कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। उदाहरण के लिए, विवेकानंद स्कूल (धुर्वा) से रिंग रोड वाया नयासराय तक झारखंड की पहली 10-लेन स्मार्ट रोड का निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है, जिस पर लगभग ₹177 करोड़ की लागत आ रही है। इसके अतिरिक्त, रांची की लाइफलाइन माने जाने वाले रिंग रोड को भी ‘ग्रीन मोबिलिटी कॉरिडोर’ के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहाँ 40 किलोमीटर लंबा साइकिल ट्रैक और सोलर रूफ पैनल लगाने की तैयारी है। सरकार का लक्ष्य इन सभी छोटी-बड़ी परियोजनाओं को आपस में जोड़कर रांची को ट्रैफिक-जाम से पूरी तरह मुक्त करना है।
चुनौतियां और रखरखाव पर ध्यान
जहां एक ओर इस परियोजना को लेकर शहरवासियों में भारी उत्साह है, वहीं दूसरी ओर बुनियादी ढांचे के दीर्घकालिक रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय विशेषज्ञों और नागरिकों का कहना है कि पूर्व में बनाए गए कुछ साइकिल ट्रैक और फुटपाथ देखरेख की कमी और अवैध अतिक्रमण का शिकार हो गए हैं। यही कारण है कि इस बार पथ निर्माण विभाग ने निविदा (Tender) शर्तों में ही एक वर्ष के अनिवार्य रखरखाव और सौंदर्यीकरण प्रबंधन को जोड़ दिया है। सरकार पुनर्वास और पुनर्स्थापन (Rehabilitation and Resettlement) नीतियों पर भी काम कर रही है ताकि सड़क चौड़ीकरण के कारण प्रभावित होने वाले छोटे दुकानदारों या निवासियों को सही तरीके से व्यवस्थित किया जा सके।
नए रांची का उदय
10 महीने की इस समय सीमा के भीतर यदि रांची अर्बन कॉरिडोर का यह कार्य पूरी गुणवत्ता के साथ पूरा होता है, तो यह झारखंड के शहरी विकास के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह कॉरिडोर न केवल अधिकारियों और वीआईपी के लिए बल्कि आम जनता, साइकिल चालकों और सुबह की सैर करने वाले लोगों के लिए एक आदर्श मार्ग बनेगा। पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के इस बेजोड़ मेल से रांची जल्द ही देश के सबसे खूबसूरत और व्यवस्थित राजधानियों की सूची में शुमार होने के लिए तैयार है।
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