नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स में लापरवाही पर एक्शन, 2 कंपनियों पर विनाशकारी विफलता का नियम लागू; नए टेंडर से बैन

The CSR Journal Magazine
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने हाल ही में राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में गंभीर ढांचागत विफलता और हादसों के चलते दो प्रमुख निर्माण कंपनियों पर कड़ा एक्शन लिया है। मंत्रालय ने ‘विनाशकारी विफलता’ से जुड़ा नया नियम लागू किया है, जिसके तहत संबंधित कंपनियों को दो वर्षों तक नई परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया में भाग लेने से प्रतिबंधित किया जा सकता है।

नकारात्मक रेटिंग का सामना

इस नए नियम के अंतर्गत, कंपनियों को नकारात्मक रेटिंग का भी सामना करना पड़ेगा, जिससे उनकी भविष्य की सरकारी परियोजनाओं में भागीदारी पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। मंत्रालय के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, यह कदम उन कंपनियों के लिए है जो अपने कार्य में लापरवाही बरतती हैं और इससे सड़क सुरक्षा को खतरा होता है।

तमिलनाडु की परियोजना में चूक

मंत्रालय ने तमिलनाडु में हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (एचएएम) के तहत बन रहे राष्ट्रीय राजमार्ग-45 (नया एनएच-32) के पूंडियनकुप्पम-सत्तनाथपुरम खंड में गंभीर चूक पाई है। इस परियोजना की बोली लागत 2,120 करोड़ रुपये थी और इसे मैसर्स पूंडियनकुप्पम सत्तनाथपुरम सेक्शन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था। परियोजना को पूरा करने की निर्धारित समयसीमा 19 जनवरी, 2024 थी।

निर्माण में धांधली के संकेत

मंत्रालय के आदेश में कहा गया है कि इस परियोजना के लिए स्वतंत्र इंजीनियर के रूप में मैसर्स थीम इंजीनियरिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को नियुक्त किया गया था। हाल ही में, छह अप्रैल, 2026 को सड़क का एक हिस्सा लगभग दो मीटर धंस गया था। इसके अलावा, कई अन्य खामियां भी सामने आई थीं, जो निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाती हैं।

उत्तर प्रदेश में बड़ा हादसा

दूसरे मामले में उत्तर प्रदेश में इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) मॉडल के तहत नवलपुर के पास एनएच-727बी के लगभग 45 किलोमीटर हिस्से को चौड़ा और सुदृढ़ करने की परियोजना शामिल है। इस कार्य को वीआरसी कंस्ट्रक्शंस (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड और आर एंड सी इंफ्रा इंजीनियर्स प्राइवेट लिमिटेड के संयुक्त उद्यम को 613 करोड़ रुपये के अनुबंध मूल्य पर सौंपा गया था।

निर्माण कार्य में सुरक्षा की कमी

मंत्रालय के आदेश के अनुसार, 25 मार्च, 2026 को घाघरा नदी पर बन रहे बड़े पुल के वायाडक्ट हिस्से के निर्माण कार्य के दौरान एक बड़ा हादसा हुआ। इस हादसे में दो श्रमिकों की मौके पर ही मौत हो गई और एक अन्य गंभीर रूप से घायल हो गया। यह घटना निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों की कमी को दर्शाती है।

कंपनियों पर कार्रवाई का असर

इन घटनाओं के बाद, मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में लापरवाही बरतने वाली कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इससे न केवल सड़क सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि निर्माण कंपनियों को भी अपने कार्य की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

भविष्य की परियोजनाओं पर प्रभाव

यह कदम उन कंपनियों के लिए एक चेतावनी है जो गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करती हैं। मंत्रालय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं सुरक्षित और समय पर पूरी हों, जिससे लोगों की जिंदगी और संपत्ति की सुरक्षा हो सके।

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