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इसलिए जरूरी है ऊर्जा संरक्षण, सीएसआर निभाता है अहम रोल

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कुछ ही मिनटों के लिए अगर हमारा फ़ोन डिस्चार्ज हो जाए तो ऐसा लगता है कि हम दुनिया के संपर्क में नहीं है। घर की बिजली चली जाए तो सिर्फ हमारे घर में ही रौशनी नहीं बल्कि जिंदगी से रौशनी चली जाती है। ऊर्जा यानी बिजली आज पूरी दुनिया की सबसे अहम जरूरत बन गई है। बिजली के बिना कोई भी देश मौजूदा समय में किसी भी तरह से तरक्की नहीं कर सकता। बिजली हमारे जीवन की एक प्रमुख हिस्सा बन चुकी है। थोड़े से समय के लिए बिजली चली जाने पर हमारे जिंदगी का हर जरूरी काम रुक जाते हैं। आज हमारा पूरा जनजीवन बिजली से जुड़ा हुआ है, ऊर्जा से जुड़ा हुआ है। ऐसे में हमें हर हाल में बिजली का बिल्कुल दुरुपयोग नहीं करना चाहिए।

14 दिसंबर को है राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस

भारत में हर साल 14 दिसंबर को राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस (National Energy Conservation Day) मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा के महत्व को समझना है और कुशलता से ऊर्जा का उपयोग करना है। जनसंख्या में बढ़ोतरी के साथ, ऊर्जा की जरूरतें भी लगातार बढ़ रही है। इसलिए ऊर्जा संरक्षण और ऊर्जा दक्षता के महत्व के बारे में आम जनता में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल ‘ऊर्जा संरक्षण दिवस’ मनाया जाता है। हम सबको समझना होगा कि ऊर्जा का इस्तेमाल सोच समझ कर करें और जहां तक संभव हो प्राकृतिक ऊर्जा से ही काम चलायें।
ऊर्जा संरक्षण, ऊर्जा का कम उपयोग करके हासिल किया जा सकता है। आज हमारे जीवन में उपयोग किये जाने वाले अधिकांश ऊर्जा स्रोत ऐसे हैं जो दोबारा इस्तेमाल में नहीं लाये जा सकते। जैसे कि कोयला, लकड़ी, पेट्रोल, डीज़ल। इन साधनों के बारे में कहा जाता है कि ये सिर्फ 40 – 50 साल तक ही रह सकते हैं। इसलिए हम सभी को अपनी लाइफ स्टाइल में ऊर्जा संरक्षण या ऊर्जा बचाव को शामिल करना चाहिए।

देश में बिजली की कितनी है डिमांड और कितनी है सप्लाई ? (Electricity demand and Supply)

फिलहाल हमारे देश में 3.48 लाख मेगावॉट बिजली उत्पादन करने की क्षमता है। जिसमें 2.22 लाख मेगावॉट थर्मल पावर से, 45 हजार मेगावॉट जल विद्युत से, 70 हजार मेगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी से, 7 हजार मेगावॉट परमाणु ऊर्जा से मिलती है। देश के सभी घरों तक 24 घंटे बिजली पहुंचाने के लिए मौजूदा क्षमता कम पड़ेगी। इसके लिए वर्तमान क्षमता से कम से कम 30 फीसदी अधिक 4.53 लाख मेगावॉट बिजली की जरूरत होगी। इसके लिए देश में पावर प्लांटों में 100 फीसदी बिजली उत्पादन करना होगा। अभी देश के 60 से अधिक पॉवर प्लांट अपनी कुल क्षमता का 50 से 55 फीसदी ही बिजली का उत्पादन कर रहे हैं। पिछले दो दशकों में बिजली की खपत में बहुत अधिक वृद्धि हुई है। हम 2000 में जितनी ऊर्जा का इस्तेमाल करते थे वर्तमान में उससे दुगुना उपयोग करते हैं। भारत में बिजली उत्पादन का आधे से अधिक भाग कोयले और प्राकृतिक गैस को जलाकर हासिल किया जाता है।

कैसे है ऊर्जा संरक्षण में सीएसआर (CSR – Corporate Social Responsibility) का अहम रोल ?

भारत में बीते एक दशक के दौरान बढ़ती आबादी, आधुनिक सेवाओं, विद्युतीकरण की दर तेज होने और शहरीकरण से ऊर्जा की मांग काफी बढ़ी है। लेकिन बिजली के उत्पादन में डिमांड और सप्लाई में ज्यादा गैप हो रहा है। जिसके लिए भारत सरकार वैकल्पिक ऊर्जा सोत्रों को बढ़ावा दे रहा है। सीएसआर के जरिये भी कॉर्पोरेट कंपनियां सामने आकर वैकल्पिक ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर योगदान दे रही है, सीएसआर फंड के जरिये लोगों में ऊर्जा संरक्षण पर ना सिर्फ जोर दिया जा रहा है बल्कि सीएसआर के जरिये कई ऐसे गावों में सौर ऊर्जा पहुंची है और गांव रौशन हुआ है जहां अब तक अंधेरा था।
जानकारों का मानना है कि इस मांग को सोलर एनर्जी के जरिए आसानी से पूरा किया जा सकता है। सौर ऊर्जा (Solar Energy) के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को देखते हुए अब विदेशी कंपनियों की निगाहें भी भारत पर हैं। वर्ष 2035 तक देश में सौर ऊर्जा की मांग सात गुनी बढ़ने की संभावना है। भारत एक ऐसा देश है जहां पूरे साल सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा सकता है। भारत में साल भर में लगभग 310 दिनों तक तेज धूप खिली रहती है। भारत के पास पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा के लिए संसाधन है बस कमी है सरकारों में जो इन नैसर्गिक संसाधनों का इस्तेमाल में विल पावर की कमी दिखा रहे है।

सीएसआर के जरिये कॉर्पोरेट्स कर रहीं हैं एनर्जी की बचत

देश की तमाम कॉर्पोरेट्स ऊर्जा संरक्षण में महत्त्वपूर्ण योगदान दे रहीं हैं। कई सोलर एनर्जी को बढ़ावा दे रही हैं तो कई कॉर्पोरेट्स अपना संचालन रिन्यूएबल एनर्जी पर कर रही हैं। आईटीसी ने भारत में बड़े पैमाने पर अपनी इमारतों को ग्रीन बिल्डिंग बनाया है। 2019-20 में, ITC इकाइयों ने 23,853 टेरा जूल (TJ) ऊर्जा की खपत की। इस वर्ष के दौरान, कारोबार में उत्पादन के विस्तार के साथ-साथ उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि के बावजूद, कुल ऊर्जा खपत में केवल 2.3% की वृद्धि हुई। इसके अलावा, कुल ऊर्जा जरूरतों का 41.2% रिन्यूएबल एनर्जी स्रोतों – बायोमास, पवन और सौर से पूरा किया गया।
2020 में, वेदांता ग्रुप ऑफ कंपनीज ने 70 से अधिक ऊर्जा संरक्षण परियोजनाएं शुरू कीं। कमर्शियल रिन्यूएबल एनर्जी प्रतिष्ठानों के हिस्से के रूप में, वेदांता लिमिटेड ने भारत भर के पांच राज्यों में 274 मेगावाट विंड एनर्जी फार्म स्थापित किए हैं। HDFC बैंक परिचालन के दौरान ऊर्जा की खपत का अनुकूल करने के लिए एनर्जी एफिशंट सिस्टम और लीवरेजिंग तकनीक स्थापित कर रहा है। बैंक में एलईडी लाइट को पारंपरिक फ्लोरोसेंट लाइट्स से रिप्लेस किया जा रहा है। एचवीएसी, लाइट्स और साइनेज की निगरानी के लिए लगभग 600 शाखाओं में सेंसर लगाए हैं, जिसके परिणामस्वरूप औसत ऊर्जा खपत का 12% की बचत होती है। इस वर्ष, TCS पुणे, सह्याद्री पार्क में अपने परिसर के लिए ISO 50001: 2011 ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली प्रमाणन प्राप्त करने वाली भारत की पहली आईटी सेवा कंपनी बन गई।

ऊर्जा संरक्षण है राष्ट्र की जरुरत, हर नागरिक करें योगदान

हमारी सरकार को अब वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर गंभीरता से विचार करते हुए ऊर्जा बचत के लिए जरूरी उपाय अपनाने पड़ेंगे। ऊर्जा की बचत किए बिना हम विकसित राष्ट्र का सपना नहीं देख सकते।  हमारे देश में आज ऊर्जा बचत के उपायों को जल्द और सख्ती से अमल में लाए जाने की जरूरत है। इसमें देश के हर नागरिक की भागीदारी होनी चाहिए। देश का प्रत्येक नागरिक इस दिशा में जागरूक हो, हर संभव ऊर्जा बचत करे व औरों को भी इसका महत्व बताए। देश में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। अगर इस समय बिजली संकट को गंभीरता से नहीं लिया गया तो यह भारत के विकास के लिए सबसे बड़ा अभिशाप सिद्ध हो सकता है, क्योंकि किसी भी देश की तरक्की का रास्ता ऊर्जा से ही होकर जाता है।
छोटे छोटे उपायों से हम सब ऊर्जा संरक्षण कर सकतें हैं, बस जरुरत है पहल करने की, तो आईये जानतें हैं ऊर्जा संरक्षण के उपाय –

ऊर्जा संरक्षण के उपाय

– जब उपयोग में न हो तब बल्ब या लाइट, एसी और पंखों को बंद कर दें।
– ट्यूब लाइट, बल्बों और अन्य उपकरणों पर जमी धूल को नियमित रूप से साफ करें।
– अपनी ट्यूब लाइट और बल्बों को ऐसी जगह लगाएं जहां लाइट आने में दिक्कत न हो।
– ऊर्जा बचाने के लिए सीएफएल बल्ब का प्रयोग करें।
– एसी, फ्रिज, ब्लब ब्यूरो ऑफ़ एनर्जी इफिशियंसी की 5 स्टार रेटिंग वाले ही लें।
– फ्रिज का दरवाजा बार-बार खोलने बंद करने से बिजली की खपत बढ़ती है।
– गीजर में अधिकतम बिजली खर्च होती है अतः उतना पानी गरम करें जितनी जरूरत है।
– दिन में प्राकृतिक रोशनी का अधिकतम उपयोग करें।
– हीटर, ब्लोअर का कम से कम इस्तेमाल करें।

रसोई गैस बचाने के टिप्स

– खाना पकाते समय बर्तन ढक कर रखें।
– गैस को हल्का जलाएं। गैस स्टोव के बर्नर समय समय पर साफ़ करते रहें।
– पकाने से पहले फ्रिज में रखा सामान निकालकर उसे सामान्य तापमान पर लाएं।
– प्रेशर कुकर का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करें।

पेट्रोल-डीजल बचाने के उपाय

– निजी वाहनों से ज्यादा पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें।
– सप्ताह में कम से कम एक दिन साइकिल चलाएं।
– ऑफिस या किसी समारोह में जाते समय कार की शेयरिंग करें।
– जाम या सिग्नल पर गाड़ी बंद कर दें।
– बैटरी से चलने वाले वाहनों का इस्तेमाल करें।
– टायर प्रेशर समय समय पर चेक करते रहें।