आज की तेज़ रफ्तार ज़िंदगी में शारीरिक निष्क्रियता एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है। ऑफिस में लंबे समय तक बैठकर काम करना, घर लौटकर मोबाइल या टीवी के सामने समय बिताना और नियमित व्यायाम के लिए समय न निकाल पाना, ये सब मिलकर शरीर को धीरे-धीरे बीमार बना रहे हैं। इसी बीच एक नई अंतरराष्ट्रीय रिसर्च उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है। इस अध्ययन के अनुसार, रोज़मर्रा की हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधि भी डायबिटीज़, दिल और किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारियों में मृत्यु के जोखिम को कम कर सकती है।
मूवमेंट करते रहें, सेहतमंद रहने के लिए!
इस शोध का मेडिकल आधार मानव शरीर की उस मूल जैविक प्रक्रिया पर टिका है, जिसमें नियमित शारीरिक मूवमेंट शरीर के कई अंगों और प्रणालियों को एक साथ सक्रिय और संतुलित रखती है। जब व्यक्ति हल्की-फुल्की गतिविधि भी करता है, तो मांसपेशियां काम करने लगती हैं, जिससे ग्लूकोज़ (शुगर) का उपयोग बेहतर ढंग से होता है और इंसुलिन की प्रभावशीलता बढ़ती है। यही कारण है कि डायबिटीज़ के मरीजों में ब्लड शुगर नियंत्रण में रहने लगता है और जटिलताओं का खतरा घटता है।
क्या कहती है नई स्टडी
शोध में पाया गया कि जिन वयस्कों ने अपने दिनचर्या में सामान्य गतिविधियों, जैसे चलना, खड़े होकर काम करना, घर के कामकाज या थोड़ी दूरी पैदल तय करना, को शामिल किया, उनमें मौत का खतरा कम देखा गया। खास बात यह रही कि यह लाभ उन लोगों में भी दिखा जो भारी व्यायाम या जिम नहीं जाते थे। यानी, थोड़ी-थोड़ी हरकत भी शरीर के लिए फायदेमंद साबित हुई।
कार्डियोवैस्कुलर- किडनी- मेटाबॉ लिक (CKM) सिंड्रोम क्या है
CKM सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें हृदय रोग, किडनी की बीमारी और मेटाबॉलिक समस्याएं, जैसे डायबिटीज़, मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर एक साथ मौजूद होती हैं। यह संयोजन शरीर के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि इससे दिल का दौरा, स्ट्रोक, किडनी फेल्योर और समय से पहले मृत्यु का खतरा बढ़ जाता है। भारत जैसे देशों में इस तरह की बीमारियां तेज़ी से बढ़ रही हैं।
हल्की गतिविधि क्यों है इतनी असरदार
डॉक्टरों के अनुसार, हल्की शारीरिक गतिविधि शरीर के कई सिस्टम को एक साथ बेहतर बनाती है। इससे ब्लड शुगर नियंत्रण में रहता है, ब्लड प्रेशर संतुलित होता है और खून में खराब कोलेस्ट्रॉल घटता है। साथ ही, शरीर में सूजन कम होती है, जो दिल और किडनी को नुकसान पहुंचाने का एक बड़ा कारण है। लगातार हल्की मूवमेंट से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है और अंग बेहतर तरीके से काम करते हैं।
बैठे रहने की आदत बन रही है सबसे बड़ा खतरा
स्टडी में यह भी साफ हुआ कि लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहना स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है। चाहे कोई व्यक्ति रोज़ थोड़ी देर व्यायाम कर भी ले, लेकिन अगर वह पूरे दिन बैठे रहता है, तो उसका फायदा कम हो सकता है। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि हर 30 से 60 मिनट में थोड़ा उठकर चलना या स्ट्रेच करना ज़रूरी है।
रोज़मर्रा की कौन-सी गतिविधियां हैं फायदेमंद !
इस रिसर्च का सबसे बड़ा संदेश यही है कि स्वस्थ रहने के लिए अलग से समय निकालकर भारी कसरत करना ही ज़रूरी नहीं। घर की सफाई, बाज़ार तक पैदल जाना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना, फोन पर बात करते समय टहलना, पौधों को पानी देना, ये सभी छोटी गतिविधियां मिलकर शरीर को सक्रिय रखती हैं और धीरे-धीरे बड़े फायदे देती हैं।
बुज़ुर्गों और गंभीर रोगियों के लिए राहत की खबर
दिल, किडनी या डायबिटीज़ के मरीज अक्सर सोचते हैं कि वे ज्यादा शारीरिक मेहनत नहीं कर सकते। ऐसे लोगों के लिए यह अध्ययन बेहद महत्वपूर्ण है। डॉक्टरों का कहना है कि मरीज अपनी क्षमता के अनुसार हल्की गतिविधि करें तो भी उन्हें लाभ मिलेगा। इससे न सिर्फ शारीरिक सेहत, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है।
भारतीय संदर्भ में क्यों अहम है यह अध्ययन
भारत में डायबिटीज़ और हृदय रोग “साइलेंट महामारी” की तरह फैल रहे हैं। शहरीकरण, तनाव और शारीरिक निष्क्रियता इसकी बड़ी वजह हैं। ऐसे में यह रिसर्च बताती है कि आम लोग भी अपनी दिनचर्या में छोटे बदलाव कर के बड़ी बीमारियों के खतरे को कम कर सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि अब समय आ गया है जब “व्यायाम” को डर की तरह नहीं, बल्कि आसान आदत की तरह अपनाया जाए। उनका कहना है- “अगर आप चल सकते हैं, तो चलिए। अगर तेज़ नहीं चल सकते, तो धीरे चलिए। लेकिन पूरी तरह रुके मत रहिए।”
मूवमेंट है गतिशील जीवन का राज़
यह अध्ययन साफ संदेश देता है कि मूवमेंट ही जीवन है। हल्की शारीरिक गतिविधि भी दिल, किडनी और डायबिटीज़ जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती है। स्वस्थ रहने के लिए बड़े कदम नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे-छोटे कदम ही सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं। यह अध्ययन एक अहम सच की ओर ध्यान दिलाता है कि स्वास्थ्य के लिए हमेशा भारी व्यायाम या जिम जाना ज़रूरी नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की हल्की गतिविधि भी जीवन बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है।
डायबिटीज़, हृदय और किडनी रोग में अचूक
डायबिटीज़, हृदय और किडनी रोगों से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए यह निष्कर्ष उम्मीद का संदेश है कि लगातार बैठे रहने की आदत छोड़कर यदि वे अपने दैनिक जीवन में थोड़ा चलना, खड़े रहना और सक्रिय रहना शुरू करें, तो मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सकता है। भारतीय संदर्भ में, जहां जीवनशैली से जुड़ी बीमारियां तेज़ी से बढ़ रही हैं, यह सोच स्वास्थ्य नीतियों और व्यक्तिगत आदतों, दोनों में बदलाव की मांग करती है। असल ज़रूरत इस बात की है कि समाज यह समझे कि स्वास्थ्य की कुंजी बड़े संकल्पों में नहीं, बल्कि रोज़ के छोटे-छोटे कदमों में छिपी है क्योंकि सचमुच, मूवमेंट मायने रखती है।
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