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February 21, 2026

महाराष्ट्र बजट सत्र में पहली बार बिना नेता प्रतिपक्ष के चलेंगी दोनों सदन, इतिहास में अनोखी स्थिति

The CSR Journal Magazine

23 फरवरी से शुरू हो रहे Budget Session पर खास नजर

Maharashtra Budget Session to function without Opposition Leader: महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व स्थिति बन गई है। 23 फरवरी से शुरू हो रहे Maharashtra Budget Session 2026 में पहली बार ऐसा होगा जब राज्य की विधानसभा और विधान परिषद – दोनों सदन बिना Leader of Opposition (LoP) के काम करेंगे। यह महाराष्ट्र के विधायी इतिहास में पहली बार है जब दोनों सदनों में एक साथ नेता प्रतिपक्ष का पद खाली रहेगा। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक यह स्थिति सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक परंपराओं के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है। आम तौर पर बजट सत्र में सरकार की आर्थिक नीतियों, योजनाओं और खर्चों पर सबसे तीखी बहस होती है। ऐसे में Leader of Opposition की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

Maharashtra Budget Session to function without Opposition Leader: विधानसभा में क्यों खाली है पद?

2024 के विधानसभा चुनाव के बाद गठित 15वीं विधानसभा में अभी तक नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति नहीं हो सकी है। नियम के अनुसार, किसी भी विपक्षी दल को इस पद के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का कम से कम 10% समर्थन होना जरूरी है। मौजूदा स्थिति में कोई भी दल इस मानक को पूरा नहीं कर पा रहा। सबसे बड़े विपक्षी दल Shiv Sena (UBT) ने मार्च 2025 में अपने वरिष्ठ विधायक भास्कर जाधव के नाम की सिफारिश की थी, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष की ओर से अब तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। इस कारण पद लंबित है।

विधान परिषद में भी वही तस्वीर

विधान परिषद में भी नेता प्रतिपक्ष का पद खाली है। ठाकरे गुट के नेता अंबादास दानवे का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से यह स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस ने परिषद के सभापति Ram Shinde को सतेज पाटिल के नाम की सिफारिश भेजी थी, लेकिन उस पर भी अब तक निर्णय नहीं हुआ। इस तरह 23 फरवरी से शुरू हो रहा Budget Session बिना किसी आधिकारिक LoP के आगे बढ़ेगा।

सरकार का रुख

मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने कहा है कि नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति संबंधित सदन के अध्यक्ष के अधिकार क्षेत्र में आती है और सरकार को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो भी निर्णय लिया जाएगा, उसे सरकार स्वीकार करेगी। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चर्चा यही है कि बिना Leader of Opposition के सदन की कार्यवाही किस तरह चलेगी और सरकार की जवाबदेही किस अंदाज में तय होगी। महाराष्ट्र की राजनीति में यह Budget Session सिर्फ वित्तीय घोषणाओं के लिए नहीं, बल्कि एक नई संवैधानिक स्थिति के लिए भी याद किया जा सकता है।

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