इंदौर अग्निकांड: डिजिटल लॉक ने ली 8 लोगों की जान, हर स्मार्ट लॉक खतरनाक नहीं लेकिन सही चुनाव जरूरी

The CSR Journal Magazine
इंदौर में एक दुखद आगजनी ने 8 लोगों की जान ले ली। इस घटना ने डिजिटल और स्मार्ट डोर लॉक की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं। क्या ये तकनीकी उपकरण इमरजेंसी में लोगों को बचाने की बजाय फंसा रहे हैं? इस पर चर्चा करने के लिए भास्कर ने श्री गोविन्दराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों से बातचीत की। इस बातचीत में यह जानने की कोशिश की गई कि अग्निकांड में डिजिटल लॉक ने कैसे काम किया और क्या सभी स्मार्ट लॉक असुरक्षित हैं।

आपातकाल में खतरे का कारण

विशेषज्ञों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक लॉक सामान्य स्थितियों में ठीक काम करते हैं, लेकिन अचानक आग, ओवरहीटिंग या शॉर्ट सर्किट जैसी कठिनाइयों में ये पहले फेल हो सकते हैं। डॉ. प्रशांत बनसोड़ ने बताया, “लॉक के अंदर की चिप्स और सर्किट 60-70°C से ज्यादा तापमान पर काम करना बंद कर देते हैं, जिससे यह जाम हो सकता है।”

पुराने घरों की सरलता

प्रो. सतीश कुमार जैन के अनुसार, पहले घरों में दो एग्जिट होते थे, लेकिन अब कई फ्लैट्स में केवल एक ही मुख्य दरवाजा होता है। जब यह इलेक्ट्रॉनिक लॉक से नियंत्रित हो, तो इमरजेंसी के समय बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा, “अगर मोबाइल पर निर्भर लॉक है और नेटवर्क फेल हो जाए, तो दरवाजा खोलना संभव नहीं रह जाता।”

बैटरी का खतरा

डॉक्टर बनाड़े का कहना है कि 9V/12V बैटरी या इन्वर्टर से चलने वाले लॉक में बैटरी खत्म होना या ओवरहीटिंग आम समस्या है। इस प्रकार की खराबी का यूजर को पता नहीं चलता, जिससे तबाही का खतरा बढ़ जाता है।

सुरक्षित उपाय

विशेषज्ञों का सुझाव है कि डिजिटल लॉक में मैन्युअल चाबी या लीवर लगाना अनिवार्य है। इसके अलावा, नियमित सर्विसिंग और बैटरी की स्थिति की जांच भी आवश्यक होती है। उन्होंने इमरजेंसी ऑपरेशंस के बारे में जानकारी रखने और स्मोक सेंसर लगाने पर भी जोर दिया।

पिछले हादसे की यादें

इंदौर में लगभग 5 महीने पहले हुए एक हादसे ने फिर से लोगों को सतर्क किया। एक पेंटहाउस में आग लगने से एक कांग्रेस नेता की दम घुटने से मौत हो गई थी। उस समय भी उनकी ग्लास डोर और एयर कंडीशनिंग सिस्टम काम नहीं कर पाए थे, जिससे बाहर निकलना बेहद मुश्किल हो गया था।

उद्योग का नजरिया

हाई सिक्योरिटी लॉक के निर्माता जितेंद्र खत्री का कहना है कि डिजिटल लॉक पूरी तरह सुरक्षित होते हैं। उनका कहना है कि आग लगने के दौरान तापमान 55 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर ऑटोमेटिक लॉक खुल जाता है। लेकिन कुछ भी हो, उपयोगकर्ता को उचित लॉक का चुनाव करना चाहिए।

स्मार्ट लॉक का बाजार

भारत में लगभग 10 फीसदी लोगों के घरों में ही स्मार्ट लॉक हैं। ये लॉक 6,000 से लेकर 90,000 रुपये तक के रेंज में उपलब्ध हैं, जिसमें प्रमुख कंपनियों में गोदरेज, डोरसेट, और ओजोन शामिल हैं। इन्हें फेस डिटेक्शन, मोबाइल ऑपरेशन, और अलार्मिंग कॉल जैसी सुविधाओं के
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