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सीएसआर व सरकार की ये योजनाएं कर रही है एड्स का ख़ात्मा

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सीएसआर और सरकार की ये योजनाएं कर रही है एड्स का ख़ात्मा
 
एड्स को गंभीर बीमारी माना जाता है। एक समय था जब एड्स के नाम से ही लोग घबराते थे और सरकारी अस्पतालों में टेस्ट की सुविधा व इलाज का अभाव था। और निजी अस्पतालों में आम लोगों की पहुंच ही नहीं थी। इस कारण यह बीमारी फैलने के साथ लोगों की मौत भी हो रही थी। लेकिन समय बदलने के साथ एड्स बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक और इसके इलाज का तरीका भी बदला है। एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनोडिफिशिएंसी वायरस को लेकर जागरूकता और मरीजों की झिझक टूटने से इस लाइलाज बीमारी को नियंत्रित किया जा सका है।
एचआईवी संक्रमित मरीज पहले इलाज के अभाव में समय से पहले दम तोड़ देते थे। लेकिन अब ऐसे मरीजों की जिंदगी ना सिर्फ बढ़ी है, बल्कि बेहतर ढंग से जीवन यापन भी करना शुरू कर दिया है। एड्स मरीजों के लिए सरकार द्वारा प्रोत्साहन में लागू की गई नीतियां भी कारगर साबित हो रही। यहीं कारण है कि पूरे देश में एचआईवी मरीजों के आकड़ों में तेजी से कमी आ रही है। सिर्फ इतना ही नहीं सरकार के साथ साथ सीएसआर भी बढ़चढ़ कर सरकार के साथ कई HIV के ख़ात्मे के लिए कार्यक्रम कर रहा है।

भारत का एचआईवी बोझ

दुनियाभर में जिन बीमारियों के कारण मृत्यु दर सबसे अधिक माना जाता है, एड्स उन्हीं में से एक है। एचआईवी नामक वायरस के कारण होने वाले इस रोग को वैसे तो इलाज नहीं है लेकिन एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) से मरीज की आयु को बहुत हद तक बढ़ाया जा सकता है। एड्स के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 1 दिसंबर को विश्व एड्स दिवस (World AIDS Day) मनाया जाता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो दुनियाभर में करीब 3.79 करोड़ से अधिक लोग एचआईवी या एड्स से संक्रमित हैं। भारत में दुनिया में एचआईवी पॉजिटिव मामलों की तीसरी सबसे बड़ी संख्या है। 2015 में एचआईवी के साथ देश में लगभग 2.1 मिलियन लोग रह रहे थे। यह देश की वयस्क आबादी का 0.26 प्रतिशत है।
स्वास्थ्य संगठन (WHO) साल 2030 तक एड्स को खत्म करने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। ऐसे में आईये जानते है कि वो कौन से सरकारी और सीएसआर (Corporate Social Responsibility) कार्यक्रम है जिससे एड्स और एचआईवी को ख़त्म करने के लिए कार्यरत है।

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम

लाइलाज बीमारी एड्स को नियंत्रित करने के लिए देश में पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर एड्स राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (National AIDS Control Program) चलाया गया।  कार्यक्रम का पहला चरण 1992 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) द्वारा शुरू किया गया था। इसके बाद, दूसरा, तीसरा और चौथा चरण 2014 में शुरू किया गया है। कार्यक्रम एड्स और एड्स रोगियों के प्रति व्यवहार परिवर्तन लाने, बीमारी से निपटने के लिए विकेंद्रीकृत दृष्टिकोण, और गैर सरकारी संगठनों और व्यक्तियों के नेटवर्क की बढ़ती भागीदारी पर केंद्रित है। कार्यक्रम का उद्देश्य आउटरीच, सेवा वितरण, परामर्श और परीक्षण प्रदान करने के साथ-साथ एचआईवी देखभाल से जुड़ाव सुनिश्चित करना भी है।
इसके अलावा, भारत सरकार ने द ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस और एक्वायर्ड इम्यून डेफिसिएंसी सिंड्रोम (रोकथाम और नियंत्रण) अधिनियम, 2017 को अधिनियमित किया है, जिसने संक्रमित और प्रभावित आबादी के मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए एक कानूनी और सक्षम ढांचा प्रदान किया है। 2016 में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा ‘प्रोजेक्ट सनराइज’ नामक एक नई पहल शुरू की गई थी, ताकि भारत में उत्तर-पूर्वी राज्यों में बढ़ते एचआईवी प्रसार को रोका जा सके।

सीएसआर से एड्स के खिलाफ जन-संपर्क अभियान

राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन द्वारा टेलीविज़न एवं रेडियो पर नियमित रूप से इस विषय से संबंधित प्रसारण आयोजित किये जाते हैं जिसमें कंडोम के उपयोग, एड्स प्रभावित लोगों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार, समेकित परामर्श एवं परीक्षण केंद्र, एचआईवी/एड्स के प्रति भ्रांतियां, यौन संक्रमित रोगों के उपचार, युवाओं के एचआईवी संक्रमित होने की ज्यादा आशंका, एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी एवं रक्त आदान-प्रदान संबंधी सुरक्षा इत्यादि पर विस्तार से चर्चा की जाती है।

देश के एड्स विरोधी अभियान में सीएसआर से मिल रहा है कॉर्पोरेट्स का साथ

एचआईवी/एड्स (HIV/AIDS) के रोकथाम के लिए वैश्विक और स्थानीय दोनों ही स्तरों पर संसाधनों, तकनीकों के प्रबंधन व सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। इसके रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए अत्यधिक राशि की आवश्यकता होती है। देश के तमाम Corporates अपने सीएसआर फंड्स से एचआईवी/एड्स उन्मूलन के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन के साथ मिलकर काम कर रही है जहां वे अपने तकनीकी विशेषज्ञ एवं वित्तीय सुविधाएं संगठन को उपलब्ध करवाते हैं।

भारत में एचआईवी/एड्स के खिलाफ लड़ने के लिए सीएसआर पहल

ट्रक ड्राइवरों के बीच एचआईवी/एड्स से निपटने के लिए अंबुजा सीमेंट और अपोलो टायर्स की सीएसआर पहल

ट्रकिंग समुदाय एचआईवी/एड्स के वाहक होने के लिए कुख्यात है। कोलकाता के बाहरी इलाके सांकराइल में धूलागढ़ ट्रक टर्मिनल, एक प्रमुख परिवहन केंद्र है, जहां हर दिन लगभग 6000 ट्रक रुकते हैं ताकि ट्रक वाले अपनी लॉरी पार्क कर सकें, रात में शहर में प्रवेश कर सकें, ड्रॉप कर सकें और एक नया लोड उठा सकें और दिनचर्या जारी रखें। ट्रक ड्राइवर्स कठिन परिस्थितियों में असामान्य रूप से लंबे समय तक काम करते हैं और महीनों तक अपने परिवार से दूर रहते हैं। कठिन सड़क और ड्राइविंग की स्थिति और लंबे काम के घंटे ट्रक ड्राइवरों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर डालती है। ये ट्रक ड्राइवर अपनी शारीरिक और मानसिक जरूरतों को पूरा करने के लिए कमर्शियल यौनकर्मियों तक पहुंचते हैं। इससे ट्रकिंग समुदाय में एचआईवी/एड्स का उच्च प्रसार हुआ है।

झारसुगुडा में वेदांत का एचआईवी/एड्स जागरूकता अभियान

अपोलो टायर्स फाउंडेशन के साथ साझेदारी में अम्बुजा सीमेंट फाउंडेशन ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत एक हेल्थ केयर सेंटर की स्थापना की। यह 2009 में धूलागढ़ ट्रक टर्मिनल में स्थापित किया गया था और अन्य Sexually Transmitted Diseases के साथ-साथ एचआईवी / एड्स की रोकथाम, पहचान और उपचार जैसी कई स्वास्थ्य देखभाल सेवाएं प्रदान करता है। वहीं वेदांता ने अपनी सीएसआर परियोजना ‘जागृति’ के तहत झारसुगुड़ा के हाशिये पर रहे ग्रामीणों में एचआईवी/एड्स जागरूकता अभियान का आयोजन किया। वेदांता की इस पहल से 2000 से अधिक लोगों तक पहुंच बनाई गई। कंपनी की मोबाइल हेल्थ यूनिट (एमएचयू) टीम के सदस्यों ने लोगों को एचआईवी/एड्स के विभिन्न पहलुओं के बारे में जागरूक किया, जिसमें बीमारियों की रोकथाम और प्रभावितों के संबंधित भेदभाव को दूर करने का भी काम किया गया।

सीएसआर के तहत जॉनसन एंड जॉनसन इंडिया द्वारा प्रेरणा अभियान

प्रेरणा जॉनसन एंड जॉनसन इंडिया की एक सीएसआर पहल है, जिसका उद्देश्य मुंबई, भारत में सबसे कमजोर युवा आबादी में एचआईवी/एड्स को रोकना और कम करना है। रेड लाइट इलाकों में पैदा हुए बच्चे शोषण के सबसे बुरे शिकार हो सकते हैं – खासकर तब जब उन्होंने अपनी मां को एचआईवी/एड्स से खो दिया हो। जॉनसन एंड जॉनसन के समर्थन से, प्रेरणा अभियान ने इन मुद्दों को हल करने के लिए मुंबई के रेड-लाइट क्षेत्रों में एक एचआईवी/एड्स परियोजना बनाई है। प्रेरणा जागरूकता और ज्ञान लाने, आंतरिक कलंक को कम करने, और प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत वृद्धि और विकास प्रक्रिया को आकार देने के लिए आत्मविश्वास और आत्म-मूल्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से समय पर और अच्छी तरह से नियोजित गतिविधियों में हस्तक्षेप करती है।
यह कार्यक्रम किशोरों, युवाओं और बच्चों विशेष रूप से लड़कियों के बीच एचआईवी/एड्स की उच्च संवेदनशीलता को रोकने और कम करने के लिए भी काम करता है, जो व्यावसायिक यौन शोषण और तस्करी के लिए अतिसंवेदनशील हैं, और भेदभाव के खिलाफ लड़ने के लिए भी काम करते हैं। जॉनसन एंड जॉनसन द हेल्दी फ्यूचर्स प्रोजेक्ट का भी समर्थन करता है, जिसका उद्देश्य निगरानी और मूल्यांकन प्रक्रिया में प्रेरणा व स्टाफ सदस्यों की क्षमता का निर्माण करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना है।

टाटा अस्पताल द्वारा एचआईवी/एड्स पहल

स्नेह केंद्र टाटा मेन हॉस्पिटल (टीएमएच) द्वारा एक एचआईवी/एड्स सीएसआर पहल है। अस्पताल ने वर्क प्लेस और कम्युनिटी दोनों में, 1990 के दशक की शुरुआत में अपनी एचआईवी/एड्स पहल शुरू की। वरिष्ठ प्रबंधन ने टाटा स्टील में केंद्रित प्रयासों के साथ-साथ अन्य संस्थानों, सरकारी और औद्योगिक एजेंसियों के साथ काम करने के कार्य के साथ एड्स के लिए नोडल केंद्र की स्थापना की। एड्स जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के अलावा, टीएमएच ने एचआईवी परामर्श और परीक्षण सुविधा शुरू की।