चुनाव आयोग की सख्ती, 5 राज्यों में अधिकारियों के तबादले का आदेश, 30 नवंबर तक मांगी रिपोर्ट

The CSR Journal Magazine

निष्पक्ष चुनाव की दिशा में कदम

नई दिल्ली: आगामी विधानसभा चुनावों को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने कमर कस ली है। आयोग ने 5 राज्यों में अफसरों के तबादले के निर्देश दिए हैं। ये निर्देश 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर जारी किए गए हैं। इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर शामिल हैं। आयोग ने सभी राज्यों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखा है और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भी निर्देश भेजे गए हैं। आयोग का मकसद पूरी तरह निष्पक्ष चुनाव कराना है।

अफसरों के लिए नए नियम

पांचों राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 2027 में खत्म हो रहा है। गोवा विधानसभा का कार्यकाल 14 मार्च 2027 को समाप्त होगा, जबकि मणिपुर का कार्यकाल 13 मार्च 2027 तक है। पंजाब का कार्यकाल 16 मार्च 2027 को खत्म हो रहा है। उत्तराखंड विधानसभा का कार्यकाल 28 मार्च 2027 तक है। उत्तर प्रदेश का कार्यकाल 22 मई 2027 को पूरा होगा। चुनाव से जुड़े अफसरों के लिए दो मुख्य नियम तय किए गए हैं। पहला नियम गृह जिले से जुड़ा है, जिसमें कोई भी अफसर अपने गृह जिले में तैनात नहीं रह सकता। दूसरा नियम कार्यकाल से जुड़ा है, जिसमें यदि किसी अफसर ने पिछले 4 साल में 3 साल पूरे किए हैं, तो उसका तबादला होगा।

कौन-कौन से अफसर होंगे प्रभावित?

गोवा, पंजाब, मणिपुर और उत्तराखंड के लिए कट-ऑफ तारीख 31 मार्च 2027 है, जबकि उत्तर प्रदेश के लिए यह तारीख 31 मई 2027 तय की गई है। यह आदेश जिला प्रशासन के बड़े अफसरों पर लागू होगा, जिसमें डीएम, एडीएम और एसडीएम शामिल हैं। इसके अलावा डिप्टी कलेक्टर, तहसीलदार और बीडीओ भी इसके दायरे में आएंगे। चुनाव से जुड़े सभी नोडल अफसरों पर भी यह नियम लागू रहेगा। संभागीय आयुक्त और नगर निगम आयुक्त भी इसमें शामिल हैं।

पुलिस विभाग पर भी सख्ती

पुलिस विभाग के लिए भी कड़े नियम बनाए गए हैं। रेंज एडीजी, आईजी, डीआईजी और एसएसपी का ट्रांसफर होगा। एसपी, एडिशनल एसपी और डीएसपी भी हटाए जाएंगे। इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टर को भी अपने गृह जिले में नहीं रहना होगा। सब-इंस्पेक्टर को उसी विधानसभा क्षेत्र में तैनात नहीं किया जाएगा। आबकारी और परिवहन विभाग के अफसरों पर भी यह आदेश लागू होगा।

किसे मिलेगी राहत?

आयोग ने कुछ अफसरों को इस दायरे से बाहर रखा है। राज्य मुख्यालय में तैनात अफसरों पर यह नियम लागू नहीं होगा। डॉक्टर, इंजीनियर और शिक्षक इस दायरे में नहीं आएंगे। जो अफसर 31 मार्च 2027 तक रिटायर हो रहे हैं, उन्हें जिले से बाहर नहीं भेजा जाएगा। उत्तर प्रदेश में यह छूट 31 मई 2027 तक रिटायर होने वालों को मिलेगी। हालांकि, ऐसे अफसरों को चुनाव ड्यूटी से अलग रखा जाएगा।

दागी अफसरों पर सख्त पाबंदी

चुनाव आयोग ने दागी अफसरों पर कड़ा रुख अपनाया है। जिन अफसरों पर पहले अनुशासनात्मक कार्रवाई हुई है, उन्हें चुनाव ड्यूटी नहीं मिलेगी। जिन पर अदालत में आपराधिक केस चल रहे हैं, वे भी बाहर रहेंगे। तबादला होने वाले अफसरों को तुरंत चार्ज छोड़ना होगा। उन्हें नए अफसर के आने का इंतजार नहीं करना है। मुख्य सचिव और डीजीपी को पूरी रिपोर्ट तैयार करनी होगी। दोनों को 30 नवंबर 2026 तक आयोग को रिपोर्ट भेजनी होगी। सभी अफसरों को एक घोषणा पत्र भी देना होगा, जिसमें बताना होगा कि उनका कोई करीबी रिश्तेदार चुनाव नहीं लड़ रहा है।

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