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सीएसआर से सुधरेगी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं

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सीएसआर से सुधरेगी उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं, बेहतर इलाज पर सरकार का फोकस
 
कोरोना काल में उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh News) में मेडिकल सुविधाओं का क्या हाल रहा ये किसी से छुपा नहीं है। पुरानी गलतियों से सबक लेते हुए अब योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath News) सरकार उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर फोकस कर रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुधारने के लिए योगी सरकार सीएसआर फंड की मदद लेगी। कॉरपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी की मदद से सरकार अस्‍पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने का काम करेगी।

सीएसआर की मदद से उत्तर प्रदेश में बेहतर इलाज पर सरकार का फोकस

सूबे के उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) ने स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए कंपनियों के Corporate Social Responsibility Funds इस्तेमाल के संबंध में सभी जिलों के सीएमओ को निर्देश दिए हैं ताकि सरकारी अस्पतालों में कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) की मदद से मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ जरूरी मेडिकल उपकरण जुटाए जा सके। गौरतलब है कि यूपी सरकार टीबी मरीजों को गोद लेने की अपील का व्यापक असर देख उत्साहित है। करीब 2.40 लाख टीबी रोगियों को विभिन्न संस्थाओं, अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों द्वारा गोद लिया गया है।

Medical Infrastructure को बढ़ाने में सीएसआर की लें मदद – ब्रजेश पाठक, उपमुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश

ऐसे में अब स्वास्थ्य विभाग CSR की मदद से एक और कदम बढ़ाकर स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटा है। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक की ओर से सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (UP CMO) को निर्देश दिए गए हैं कि विभिन्न कंपनियों से CSR Funds लेने की कोशिश की जाए। अस्पतालों में जो जरूरी उपकरण नहीं है तो उनकी सूची तैयार की जाए। कंपनियां अपने सामाजिक दायित्व के तहत कई वेलफेयर के कार्य करती हैं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी कई कंपनियां काम कर रही हैं। ऐसे में अधिक से अधिक मदद लेने के प्रयास किए जाएं।

पीपीपी मॉडल पर चलेंगे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (Uttar Pradesh Health News)

अभी हाल ही में 15 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर चलाने का निर्णय लिया गया है। पीपीपी मॉडल पर चलाने के लिए और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिह्नित किए जा रहे हैं। भारत को वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त बनाने के लिए टीबी मरीजों को गोद लेने के लिए जिस तरह यूपी ने बेहतर प्रयास किए हैं, उसी तर्ज पर अब सीएसआर से मदद लेकर अस्पतालों में उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हो।