CAPF Bill in Rajya Sabha: विरोध के कारण पेश नहीं हुआ, जानें क्या है मामला

The CSR Journal Magazine

विपक्षी दलों का विरोध जारी

राज्यसभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) विधेयक को विपक्ष के विरोध के चलते पेश नहीं किया जा सका। विपक्षी दलों ने इस विधेयक की कॉपी समय पर न मिलने और IPS अधिकारियों की तैनाती के प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई। सर्वदलीय सदन में चर्चा के लिए यह बिल सोमवार को लाया जाना था, लेकिन विपक्ष ने तीव्र विरोध प्रदर्शन किया, जिससे बिल पेश नहीं हो पाया। तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओब्रायन ने इस मुद्दे को उठाया और संसद के नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया। इसके बाद कई विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया।

CAPF Bill in Rajya Sabha: विपक्ष की चिंताएँ

व्यवस्था के संदर्भ में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP), और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) जैसी विपक्षी पार्टियों ने कहा कि सरकार को जल्दबाजी में कानून नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि विधेयक पर गंभीर विचार करने से ही सही निर्णय लिया जा सकता है। ये दल इस बात पर जोर देते हैं कि यह मुद्दा केवल तात्कालिक नहीं, बल्कि दीर्घकालिक प्रभाव का हो सकता है।

सरकार की मीटिंग का असर

सरकार ने विपक्षी दलों के साथ वार्ता के बाद बिल को पेश करने का निर्णय टाल दिया। गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी नेताओं के साथ एक बैठक कर मामले को सुलझाने की कोशिश की। इसके फलस्वरूप तय किया गया कि बिल को उस समय तक पेश नहीं किया जाएगा जब तक सभी चिंताएँ दूर न हो जाएँ। यह राजनीतिक प्रक्रिया अब सरकार के लिए चुनौती बन गई है।

बिल क्या है? जानें इसके उद्देश्य

CAPF विधेयक का उद्देश्य पांच केंद्रीय सुरक्षा बलों को एक सामान्य ढांचे में लाना है। इन बलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, सीमा सुरक्षा बल, इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस, सशस्त्र सीमा बल, और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल शामिल हैं। ये सब बल समान भर्ती, प्रमोशन और पोस्टिंग में समरूपता लाने का प्रयास करते हैं। यह विधेयक पिछले साल एक सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लाया गया था, जिसमें IPS अधिकारियों की नियुक्ति पर नए नियम लागू करने के निर्देश दिए गए थे।

CAPF Bill in Rajya Sabha: विपक्षी नेताओं की मुलाकात

गृह मंत्री अमित शाह ने विभिन्न विपक्षी नेताओं के साथ बैठक की, जिसमें संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू भी मौजूद थे। इस बैठक में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी अन्य नेताओं से चर्चा की ताकि एक संयुक्त रुख तैयार किया जा सके। सरकार इस विवाद को सुलझाने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है, लेकिन फिलहाल बिल के भविष्य पर असमंजस बना हुआ है।

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