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February 26, 2026

Alcoholic Husband: पत्नी की अनुमति बिना शराब पीना पड़ेगा भारी? नए कानून के तहत 3 साल तक की जेल का प्रावधान

The CSR Journal Magazine
देश में लागू हुई नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) के बाद अब घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों में सख्ती और बढ़ गई है। खासतौर पर शराब के नशे में पत्नी को प्रताड़ित करने वाले पतियों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी है। नए कानून के तहत अगर पति शराब पीकर पत्नी को शारीरिक या मानसिक रूप से परेशान करता है तो उसके खिलाफ सीधे कार्रवाई हो सकती है। ब्रिटिशकालीन आईपीसी की जगह अब Bharatiya Nyaya Sanhita लागू हो चुकी है। पुराने आईपीसी 498A की जगह अब BNS की धारा 85 और 85(B) के तहत पति द्वारा पत्नी पर क्रूरता के मामलों में केस दर्ज होगा।

BNS की धारा 85 और 85(B) में सख्त प्रावधान, 3 साल तक की सजा संभव

नए प्रावधानों के अनुसार केवल मारपीट ही नहीं, बल्कि शराब के नशे में मानसिक उत्पीड़न, अपमान, धमकी देना या पत्नी की मूलभूत जरूरतों की अनदेखी करना भी अपराध की श्रेणी में आएगा। यदि पत्नी ने शराब पीने का विरोध किया हो और इसके बावजूद पति घर में हंगामा करता है, तो वह पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकती है। कानून के तहत दोषी पाए जाने पर 3 वर्ष तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

40% घरेलू हिंसा के मामलों में ‘शराब’ वजह

सरकारी आंकड़ों के अनुसार घरेलू हिंसा के लगभग 40% मामलों में शराब प्रमुख कारण रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए कानून को और स्पष्ट व सख्त बनाया गया है। Domestic Violence Law India, BNS Section 85, और Alcohol and Domestic Violence जैसे मुद्दे अब कानूनी कार्रवाई के दायरे में और मजबूती से शामिल किए गए हैं।

पत्नी को मिले अतिरिक्त अधिकार

अगर पति शराब के कारण परिवार की जिम्मेदारियां पूरी नहीं करता, तो पत्नी उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकती है। पीड़िता को संरक्षण, अलग रहने का अधिकार और पोटगी (Maintenance) पाने का रास्ता भी खुला है। पत्नी की शिकायत मिलने पर पुलिस को तत्काल संज्ञान लेने का अधिकार दिया गया है। इससे घरेलू शांति बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि कानून का उद्देश्य पति-पत्नी के बीच टकराव बढ़ाना नहीं, बल्कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अगर शराब के कारण परिवार में हिंसा या उत्पीड़न हो रहा है, तो यह कानून पीड़िता को मजबूत कानूनी सहारा देता है।
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