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January 9, 2026

2026 की नई वायरल ‘मिरूमी’: टोक्यो से निकला नन्हा रोबोट, ‘लाबूबू’ के बाद नई क्यूट क्रांति !

The CSR Journal Magazine
2026 की नई वायरल सनक ‘मिरूमी’! टोक्यो में बना छोटा सा रोबोटिक प्लश मिरूमी, जो बच्चों जैसी मासूम हरकतों से लोगों के दिल जीत रहा है! लाबूबू जहां फैशन और कलेक्टिबल का प्रतीक था, वहीं मिरूमी भावनाओं, तकनीक और ‘बेबी-जैसी खुशी’ को जोड़ता है

2025 की लाबूबू क्रेज के बाद 2026 में मिरूमी का जादू

साल 2025 का ज़िक्र आते ही पॉप-कल्चर और सोशल मीडिया की दुनिया में एक नाम अपने आप उभर कर आता है- लाबूबू। साल 2025 में अगर किसी खिलौने ने फैशन, सोशल मीडिया और पॉप-कल्चर पर राज किया, तो वह था लाबूबू (Labubu)। यह एक आर्ट टॉय था, जिसे लोग सिर्फ खिलौने की तरह नहीं, बल्कि स्टेटस सिंबल और कलेक्टिबल के रूप में देखते थे। बैग से लेकर शोकेस तक, लाबूबू हर जगह दिखाई देता था। यह एक ऐसा आर्ट टॉय था, जिसने खिलौनों की पारंपरिक परिभाषा को बदल दिया। लाबूबू बच्चों के खेलने की चीज़ नहीं, बल्कि युवाओं और वयस्कों के लिए फैशन, कलेक्शन और पहचान का प्रतीक बन गया था। बड़े-बड़े ब्रांड्स, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज़ के बैग पर लटकता लाबूबू उस दौर की सबसे बड़ी वायरल सनक था।

एक नई वायरल कहानी की शुरुआत- मिरुमी!

लेकिन ट्रेंड की दुनिया कभी स्थिर नहीं रहती। जैसे ही 2026 की शुरुआत हुई, इंटरनेट पर एक नया नाम तेज़ी से फैलने लगा- मिरूमी। पहली नज़र में यह भी एक प्यारा सा खिलौना लगता है, लेकिन जैसे-जैसे लोग इसके बारे में जानने लगे, साफ हो गया कि मिरूमी सिर्फ ट्रेंड नहीं, बल्कि खिलौनों और भावनाओं के रिश्ते में एक नया अध्याय है। मिरूमी को जापान के टोक्यो में डिजाइन किया गया है। यह एक छोटा, मुलायम और फ्लफी प्लश टॉय है, जिसे बैग चार्म की तरह इस्तेमाल किया जाता है। बाहर से यह जितना साधारण और क्यूट दिखता है, अंदर से उतना ही खास है। इसके भीतर माइक्रो सेंसर और छोटी तकनीक लगी हुई है, जो इसे इंसानी स्पर्श और हलचल पर प्रतिक्रिया देने लायक बनाती है।

क्यूट टॉय नहीं, भावनात्मक सुकून देने वाला साथी

मिरूमी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे इस तरह तैयार किया गया है कि यह किसी नन्हे बच्चे की तरह व्यवहार करे। जब कोई इसे हल्के से छूता है, सहलाता है या बैग हिलाता है, तो मिरूमी हल्की-सी आवाज निकालता है या थोड़ा हिलता है। यह छोटी-छोटी प्रतिक्रियाएं इंसान के मन में अपनापन और सुकून पैदा करती हैं। डिजाइनर्स के अनुसार, मिरूमी को बनाते समय उनका उद्देश्य सिर्फ एक खिलौना तैयार करना नहीं था। वे ऐसा अनुभव देना चाहते थे, जो किसी बच्चे के साथ समय बिताने जैसा लगे। बच्चे की मुस्कान, उसकी हलचल और उसकी मासूम प्रतिक्रिया जिस तरह मन को सुकून देती है, उसी भावना को मिरूमी के डिजाइन में उतारा गया है।

तनाव भरी दुनिया में छोटी खुशी

2026 के शुरुआती दिनों में ही मिरूमी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। TikTok पर इसके अनबॉक्सिंग वीडियो, Instagram पर रील्स और फैशन इन्फ्लुएंसर्स के बैग में लटकता मिरूमी लोगों की नज़र में आने लगा। देखते ही देखते यह जापान से बाहर कोरिया, यूरोप और अमेरिका तक चर्चा का विषय बन गया। मिरूमी की लोकप्रियता के पीछे एक बड़ा कारण आज की तनाव भरी जीवनशैली भी है। काम का दबाव, लगातार मोबाइल और स्क्रीन से जुड़ा रहना और अकेलापन लोगों को मानसिक रूप से थका रहा है। ऐसे में मिरूमी जैसे छोटे, मासूम और प्रतिक्रिया देने वाले खिलौने लोगों को पल भर की खुशी और सुकून देते हैं।

लाबूबू से तुलना: क्या बदला है?

यह पहली बार नहीं है जब वयस्कों के बीच कोई खिलौना इतना लोकप्रिय हुआ हो। लाबूबू भी इसका उदाहरण था। लेकिन लाबूबू और मिरूमी के बीच फर्क बहुत गहरा है। लाबूबू को लोग इसलिए चाहते थे क्योंकि वह ट्रेंड में था, स्टाइलिश था और कलेक्ट करने लायक था। उसमें भावनात्मक जुड़ाव कम और ‘कूल फैक्टर’ ज़्यादा था। इसके उलट मिरूमी का आकर्षण उसकी भावना में है। यह देखने से ज़्यादा महसूस करने का अनुभव देता है। मिरूमी किसी शोकेस में रखी चीज़ नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के जीवन का हिस्सा बनता है। लोग इसे अपने बैग के साथ रखते हैं, सफर में, ऑफिस में या भीड़ के बीच।

Mental Health, Emotionally Need- मिरुमी

लाबूबू एक तरह से स्टेटस सिंबल था, जबकि मिरूमी एक भावनात्मक साथी की तरह देखा जा रहा है। यही कारण है कि लोग इसे सिर्फ खरीद नहीं रहे, बल्कि उससे जुड़ भी रहे हैं। कई यूजर्स सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि मिरूमी उन्हें तनाव के समय शांत महसूस कराता है। खिलौनों का यह बदलता रूप समाज में एक बड़े बदलाव की ओर इशारा करता है। पहले खिलौनों को सिर्फ बच्चों से जोड़ा जाता था। अब खिलौने वयस्कों के मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक जरूरत और जीवनशैली का हिस्सा बनते जा रहे हैं। मिरूमी इस बदलाव का सबसे नया और साफ उदाहरण है।

जापान की कवाई संस्कृति 

जापान की भूमिका इस ट्रेंड में खास मानी जा रही है। जापान लंबे समय से ‘कवाई’ यानी क्यूट संस्कृति और भावनात्मक तकनीक में आगे रहा है। Hello Kitty, Tamagotchi और Sony Aibo जैसे उदाहरण बताते हैं कि जापान कैसे तकनीक को मानवीय भावनाओं से जोड़ता है। मिरूमी इसी परंपरा का आधुनिक रूप है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इंसान को स्पर्श और प्रतिक्रिया से जुड़ा अनुभव मानसिक रूप से सुकून देता है। जब कोई वस्तु हमारे स्पर्श पर प्रतिक्रिया देती है, तो दिमाग में सकारात्मक हार्मोन सक्रिय होते हैं। मिरूमी इसी सिद्धांत पर काम करता है, लेकिन बहुत सरल और मासूम तरीके से।

हर उम्र का पॉकेट कम्पैनियन

मिरूमी को कई लोग ‘पॉकेट कम्पैनियन’ कह रहे हैं। यह न तो इंसान की जगह लेता है और न ही रिश्तों का विकल्प बनता है, लेकिन अकेलेपन के क्षणों में हल्का सहारा ज़रूर देता है। दिलचस्प बात यह है कि मिरूमी को हर उम्र के लोग पसंद कर रहे हैं। बच्चे इसे खिलौने की तरह देखते हैं, युवा इसे फैशन एक्सेसरी मानते हैं और वयस्क इसे तनाव कम करने वाले साथी की तरह अपनाते हैं। यह दुर्लभ है कि कोई एक प्रोडक्ट इतनी अलग-अलग भावनात्मक जरूरतों को पूरा करे।

इमोशनल टॉयज का नया सेगमेंट

बाज़ार की नज़र से देखें तो मिरूमी एक नए सेगमेंट की शुरुआत करता दिख रहा है। 2026 की शुरुआत में ही इसकी मांग तेज़ी से बढ़ी है। सीमित स्टॉक और बढ़ती लोकप्रियता के कारण इसके दाम भी चर्चा में हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में ‘इमोशनल टॉय’ एक बड़ा बाज़ार बन सकता है।हालांकि, मिरूमी को लेकर कुछ सवाल और आलोचनाएं भी सामने आई हैं। कुछ लोग मानते हैं कि क्या इंसान अब भावनात्मक जरूरतों के लिए मशीनों पर निर्भर होता जा रहा है। क्या यह रिश्तों की जगह ले सकता है ? लेकिन समर्थकों का कहना है कि मिरूमी किसी रिश्ते का विकल्प नहीं, बल्कि एक छोटा सा सहारा है।

2026 में तकनीक और भावना का मेल

भविष्य को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि मिरूमी जैसे खिलौने आने वाले समय में और विकसित होंगे। तकनीक और भावना का यह मेल और गहरा होगा। खिलौने सिर्फ देखने या खेलने की चीज़ नहीं रहेंगे, बल्कि अनुभव देने वाले साथी बनेंगे। अंत में अगर लाबूबू और मिरूमी के सफर को देखा जाए, तो साफ दिखता है कि ट्रेंड किस दिशा में बढ़ रहा है। लाबूबू ने 2025 में दिखाया कि खिलौने स्टाइल और पहचान बन सकते हैं। मिरूमी 2026 में यह साबित कर रहा है कि खिलौने दिल से भी जुड़ सकते हैं। अगर लाबूबू आंखों को  आकर्षित करता था, तो मिरूमी मन को छूता है। और शायद यही वजह है कि 2026 की शुरुआत में मिरूमी सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बन चुका है।
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