अब घर-घर पहुंचेगा सस्ता सामान: असम सरकार की ‘आमार दुकान ऑन व्हील्स’ योजना शुरू करने की तैयारी! ई-रिक्शा से होगी जरूरी वस्तुओं की डिलीवरी, युवाओं को मिलेगा रोजगार, सरकार का उद्देश्य- महंगाई पर नियंत्रण और बिचौलियों की छुट्टी!
असम गुवाहाटी राज्य सरकार आम जनता को आवश्यक वस्तुएं सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने और शिक्षित बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से ‘आमार दुकान’ योजना के एक नए मॉड्यूल ‘आमार दुकान ऑन व्हील्स’ को शुरू करने जा रही है। यह योजना मौजूदा ‘आमार दुकान’ की तर्ज पर होगी, लेकिन इसके तहत उपभोक्ताओं को उनके घर तक जरूरी सामान पहुंचाया जाएगा।सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, इस नई योजना में शुरुआत में 22 नॉन-पीडीएस (गैर-जन वितरण प्रणाली) वस्तुओं को शामिल किया जाएगा, जिनकी संख्या आगे चलकर 36 तक बढ़ाई जा सकती है। ये सभी वस्तुएं एमआरपी से कम कीमत पर उपभोक्ताओं तक पहुंचेंगी, जिसमें लाभार्थियों को न्यूनतम मुनाफा दिया जाएगा।
ई-रिक्शा से होगी डिलीवरी, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा
‘आमार दुकान ऑन व्हील्स’ योजना के तहत पर्यावरण के अनुकूल ई-रिक्शा का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रत्येक ई-रिक्शा में-
• जीपीएस युक्त स्मार्टफोन,
• ब्लूटूथ बिलिंग प्रिंटर,
• और कैशलेस भुगतान प्रणाली उपलब्ध होगी।
इस व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि डिजिटल इंडिया को भी बढ़ावा मिलेगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर नियंत्रण करना और बिचौलियों की भूमिका को खत्म करना है। सरकार का मानना है कि सीधे उपभोक्ता तक सामान पहुंचने से महंगाई पर अंकुश लगेगा। साथ ही, यह योजना बेरोजगारी की समस्या को कम करने में भी सहायक होगी, क्योंकि इससे बड़ी संख्या में युवाओं को रोजगार मिलेगा।
लाभार्थियों को मिलने वाले प्रमुख लाभ
1. ‘आमार दुकान ऑन व्हील्स’ के लाभार्थी विभाग द्वारा निर्धारित वस्तुओं के साथ अन्य सामान भी बेच सकेंगे।
2. लाभार्थियों को प्रति किलो या प्रति लीटर ₹2 से ₹3 तक का मुनाफा लेने की अनुमति होगी।
3. सभी लाभार्थियों को खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग (FCS&CA) और संबंधित जिला व उप-मंडलीय अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य होगा।
4. किसी भी प्रकार की लापरवाही पर लाइसेंस रद्द, कानूनी कार्रवाई और दी गई वित्तीय सहायता ब्याज सहित वापस ली जा सकती है।
5. दुकान संचालन का समय और क्षेत्र स्थानीय प्रशासन द्वारा तय किया जाएगा।
6. ई-रिक्शा पर मूल्य सूची (प्राइस बोर्ड) प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
7. वस्तुएं केवल अधिकृत थोक विक्रेताओं/स्टॉकिस्ट से ही ली जाएंगी।
• न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता एचएसएलसी (HSLC) या समकक्ष निर्धारित की गई है।
18 वर्ष से कम आयु के उम्मीदवार पात्र नहीं होंगे। जिनका नाम रोजगार कार्यालय में पंजीकृत नहीं है, वे आवेदन नहीं कर सकेंगे। HSLC से कम योग्यता वाले उम्मीदवार अपात्र माने जाएंगे।
परमिशन के लिए आवेदन प्रक्रिया
उपायुक्त (Deputy Commissioner), उप-मंडलीय अधिकारी (SDO) एवं स्वायत्त परिषदों के प्रधान सचिव द्वारा आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। चयन मेरिट के आधार पर किया जाएगा, जिसमें शामिल होंगे-
1. शैक्षणिक योग्यता,
2. पूर्व अनुभव (यदि कोई हो),
3. आर्थिक स्थिति!
आवश्यक दस्तावेज-
1. आयु प्रमाण पत्र,
2. पता प्रमाण पत्र,
3. पहचान पत्र – आधार कार्ड / वोटर आईडी / ड्राइविंग लाइसेंस,
4. शैक्षणिक प्रमाण पत्र,
5. अनुभव प्रमाण पत्र (यदि उपलब्ध हो),
6. पासपोर्ट साइज फोटो!
‘आमार दुकान ऑन व्हील्स’ योजना न केवल आम लोगों को सस्ती दरों पर आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध कराएगी, बल्कि राज्य के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक अहम कदम साबित होगी। सरकार को उम्मीद है कि यह योजना महंगाई नियंत्रण, पारदर्शिता और रोजगार सृजन- तीनों लक्ष्यों को एक साथ पूरा करेगी।
प्रस्ताव तैयार- तारीख अघोषित
राज्य सरकार ने ‘आमार दुकान ऑन व्हील्स’ योजना को शुरू करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है। हालांकि, योजना के औपचारिक शुभारंभ की तिथि अभी घोषित नहीं की गई है। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित विभागों द्वारा दिशा-निर्देश और अधिसूचना जारी होते ही इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि पहले पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चयनित जिलों में इसकी शुरुआत होगी, जिसके बाद पूरे राज्य में विस्तार किया जाएगा।
समय की मांग है ‘आमार दुकान ऑन व्हील्स’
आज जब महंगाई आम आदमी की रसोई पर सीधा असर डाल रही है, ऐसे समय में ‘आमार दुकान ऑन व्हील्स’ जैसी योजना निस्संदेह स्वागत योग्य है। यह योजना केवल सस्ती दरों पर जरूरी सामान उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बिचौलियों की भूमिका समाप्त करने, डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और शिक्षित बेरोजगार युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की स्पष्ट सोच दिखाई देती है। घर-घर आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति से बुजुर्गों, महिलाओं और दूरदराज़ इलाकों में रहने वाले लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। वहीं, ई-रिक्शा जैसे पर्यावरण-अनुकूल साधनों का उपयोग सरकार की हरित सोच को भी दर्शाता है। कैशलेस लेन-देन और GPS आधारित निगरानी व्यवस्था पारदर्शिता बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
महंगाई घटाने, रोज़गार बढ़ाने का लक्ष्य
हालांकि, किसी भी योजना की सफलता उसके सख्त क्रियान्वयन, समयबद्ध निगरानी और ईमानदार चयन प्रक्रिया पर निर्भर करती है। यदि लाभार्थियों का चयन निष्पक्ष रहा और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत बनाई गई, तो यह योजना बाजार में कीमतों को नियंत्रित करने में कारगर साबित हो सकती है। अब जरूरत है कि सरकार योजना की शुरुआत की स्पष्ट तिथि घोषित करे, ताकि युवाओं और आम जनता में भरोसा बने और तैयारी समय पर हो सके। सही क्रियान्वयन के साथ ‘आमार दुकान ऑन व्हील्स’ न केवल एक सरकारी योजना, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने वाला मॉडल बन सकता है।
Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!
D Gukesh Holds Aravindh Chithambaram to a Draw, Misses Title Contention
Stalemate Ends Gukesh's Campaign at Candidates Tournament
Indian Grandmaster D Gukesh's bid for a top...
Devika Sihag Reaches First Super 300 Final at Thailand Masters
Indian Shuttler Secures Straight-Game Semifinal Victory
Indian badminton player Devika Sihag progressed to her maiden BWF...