New Delhi: रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 86 के निम्नतम स्तर तक गिर चुका है। American Economy के उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन ने डॉलर को और कीमती बना दिया है। इसके अलावा China की मुद्रा नीति की Flexibility Dollar को और मजबूती दे रही है। अगर Reserve Bank Of India ने अपनी मुद्रा नीति को और Flexible नहीं बनाया तो रुपए में गिरावट जारी रहेगी।
कमज़ोर रुपए ने बढ़ाई स्टूडेंट्स की मुसीबत
कमजोर रुपया NRI के लिए फायदेमंद हो सकता है, लेकिन विदेशों में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों के लिए मुसीबत बन गया है। पढ़ाई के बाद के Work Visa के सख्त नियम उनकी परेशानी को और बढ़ा रहे हैं। इससे विदेश में अच्छी नौकरी और जल्दी लोन चुकाने की उम्मीदें कम हो गई हैं। छह महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपया लगभग 5% कमजोर होकर अगस्त के 83.5 से गिरकर 87.2 पर आ गया है। मतलब, अगर विदेश में किसी की पढ़ाई और रहने-खाने का खर्चा एक करोड़ रुपये है, तो उसमें 5 लाख रुपये का इजाफा हो गया है। ऐसे में ब्रिटेन ने प्रस्ताव रखा है कि अंतरराष्ट्रीय ग्रेजुएट्स को दो साल से ज्यादा रहने के लिए 36,000 से 40,000 पाउंड सालाना वेतन वाली ग्रेजुएट लेवल की नौकरी करनी होगी। कनाडा भी भारतीय छात्रों के लिए Immigration के नियम सख्त कर रहा है। सरकार ने वहां के अधिकारियों को परमिट रद्द करने और ‘Student Direct Stream Visa Programme’ कैन्सल करने का अधिकार दिया है।
क्या है मुश्किल?
एजुकेशन लोन कंपनी HDFC Credila के को-फाउंडर Ajay Bohra बताते हैं कि पहले छात्र पढ़ाई के बाद Work Visa का इस्तेमाल डॉलर में कमाई और अपने लोन का बड़ा हिस्सा चुकाने के लिए करते थे। अमेरिका में Under Graduate Programmes में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों पर इसका बहुत बुरा असर पड़ सकता है। क्योंकि उनकी पढ़ाई का कुल खर्चा 1.5 करोड़ रुपये से भी अधिक होता है। Ajay Bohra के मुताबिक इसका मतलब है, कि या तो लोन चुकाने की अवधि लंबी होगी या फिर EMI ज्यादा। रुपये के कमजोर होने की वजह से वापस आने वाले छात्रों का हवाई किराया भी बढ़ गया है।
देश
स्टूडेंट संख्या
खर्च (रुपये में)
अमेरिका
2.7 लाख
59 लाख
कनाडा
2.4 लाख
32 लाख
ब्रिटेन
1.6 लाख
38 लाख
ऑस्ट्रेलिया
1 लाख
29 लाख
जर्मनी
0.2 लाख
17 लाख
हालांकि डॉलर की कीमत में बढ़ोत्तरी बड़ी बात नहीं है लेकिन इसका विदेशी शिक्षा पर बहुत बड़ा असर पड़ा है। करियर काउंसलर करण गुप्ता के अनुसार, छात्रों को विदेशी करंसी में लोन लेने से बचना चाहिए, क्योंकि भारत वापस आने पर उसे चुकाना ज्यादा महंगा होगा।