World Governments Summit 2026 में मुंबई की रहने वाली शिक्षिका Rouble Nagi का दुबई के क्राउन प्रिंस के हाथों सम्मान ! 1 मिलियन डॉलर की इनामी राशि की बनी हकदार! ‘Walls of Learning’ से लाखों बच्चों की ज़िंदगी बदली !
झुग्गियों की दीवारों से ग्लोबल मंच तक: Rouble Nagi ने Global Teacher Prize 2026 जीतकर रचा इतिहास
दुबई में आयोजित World Governments Summit 2026 के मंच से भारत के लिए एक गर्व का क्षण सामने आया, जब मुंबई की रहने वाली शिक्षिका Rouble Nagi को प्रतिष्ठित Global Teacher Prize 2026 से सम्मानित किया गया। यह पुरस्कार उन्हें दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम के हाथों प्रदान किया गया। इस सम्मान के साथ उन्हें 1 मिलियन डॉलर (करीब 8 करोड़ रुपये से अधिक) की पुरस्कार राशि भी मिली है। यह अवॉर्ड हर साल Varkey Foundation द्वारा दुनिया के किसी एक असाधारण शिक्षक को दिया जाता है, जिसने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय और परिवर्तनकारी कार्य किया हो। इस उपलब्धि के साथ Rouble Nagi न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। खास बात यह है कि उनका काम बड़े-बड़े संस्थानों या सुविधाजनक कक्षाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने समाज के सबसे हाशिये पर खड़े लोगों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाई।
झुग्गियों की दीवारें बनीं ‘क्लासरूम’
Rouble Nagi की शिक्षा की सोच पारंपरिक ढांचे से अलग है। उन्होंने माना कि जब बच्चों के पास स्कूल की इमारत, किताबें या संसाधन नहीं हों, तब भी सीखने की प्रक्रिया रोकी नहीं जानी चाहिए। इसी सोच से जन्म हुआ उनका अनोखा विचार- ‘Living Walls of Learning’। मुंबई की झुग्गी-बस्तियों में उन्होंने गंदी, उपेक्षित और बेरंग दीवारों को रंगों और चित्रों से सजा दिया। इन दीवारों पर अक्षर, शब्द, गणित के सूत्र, स्वच्छता संदेश और जीवन कौशल से जुड़े चित्र बनाए गए। नतीजा यह हुआ कि बच्चे खेल-खेल में सीखने लगे और पूरा मोहल्ला ही एक खुला स्कूल बन गया।
जम्मू-कश्मीर से मुंबई तक का सफर
जम्मू-कश्मीर मूल की Rouble Nagi पिछले कई वर्षों से शिक्षा और सामाजिक बदलाव के क्षेत्र में सक्रिय हैं। उन्होंने सिर्फ बच्चों की पढ़ाई पर ही नहीं, बल्कि महिलाओं के सशक्तिकरण, स्वच्छता, कला और सामुदायिक विकास पर भी बराबर काम किया। उनका मानना है कि शिक्षा तब तक अधूरी है, जब तक वह इंसान के जीवन की गुणवत्ता न बदले।
आंकड़ों में Rouble Nagi का प्रभाव
Rouble Nagi के काम का दायरा और असर आंकड़ों में साफ दिखाई देता है-
• भारत के 100 से अधिक गांवों और बस्तियों में 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर स्थापित किए गए।
• उनके प्रयासों से अब तक 10 लाख से अधिक बच्चों और महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।
• ‘मिसाल मुंबई’ अभियान के तहत 1 लाख 55 हजार से ज्यादा घरों को रंगा गया, जिससे न सिर्फ सौंदर्य बढ़ा बल्कि स्वच्छता और आत्मसम्मान की भावना भी मजबूत हुई।
• शिक्षा और साफ-सफाई के प्रति जागरूकता से स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर में 50 फीसदी से अधिक की कमी दर्ज की गई।
पुरस्कार राशि का समाज के लिए उपयोग
Global Teacher Prize जीतने के बाद Rouble Nagi ने साफ कहा कि यह राशि उनके लिए निजी उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। उन्होंने घोषणा की है कि वह इस पैसे से एक ऐसा संस्थान स्थापित करेंगी, जहां जरूरतमंद बच्चों और युवाओं को मुफ्त वोकेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी।उनकी योजना है कि आने वाले समय में बच्चे और युवा डिजिटल साक्षरता, स्किल डेवलपमेंट और रोजगारोन्मुख शिक्षा हासिल कर सकें, ताकि वे आत्मनिर्भर बनें और समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
कड़ी प्रतिस्पर्धा में भारत की जीत
इस साल Global Teacher Prize के लिए दुनिया के 139 देशों से 5,000 से अधिक नामांकन आए थे। ऐसे में Rouble Nagi का चुना जाना न सिर्फ उनकी व्यक्तिगत मेहनत का प्रमाण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारत में जमीनी स्तर पर हो रहा काम अब वैश्विक मंच पर पहचान बना रहा है।
शिक्षा से बदलाव की मिसाल
Rouble Nagi की कहानी इस बात का उदाहरण है कि शिक्षा अगर संवेदनशीलता, रचनात्मकता और समाज के प्रति जिम्मेदारी के साथ दी जाए, तो वह सिर्फ डिग्री नहीं बल्कि पूरी पीढ़ियों का भविष्य बदल सकती है। झुग्गियों की दीवारों से शुरू हुआ उनका सफर आज दुनिया के सबसे बड़े मंच पर भारत का नाम रोशन कर रहा है।
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