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विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस – जानें अपने अधिकारों को 

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हर तरफ बात कोरोनावायरस की हो रही है, तो एक ग्राहक होने के नाते पहले बात पते की करते है, कोरोनावायरस की वजह से पूरी दुनिया में ख़ौफ़ है, अपना भारत देश भी अछूता नहीं है। ऐसे में कोरोनावायरस से बचने के लिए सावधानियां ही सबसे बड़ा उपाय है। कोरोनावायरस से लड़ने के लिए मास्क की जरूरत है, हैंड सैनिटाइजर की जरूरत है और जब हम इन दोनों चीजों को बतौर ग्राहक खरीदने जा रहे है तो केमिस्ट की दुकानों से यह तो ज्यादातर नदारद ही है या फिर मिल भी जाता है तो केमिस्ट वाले इन दोनों आवश्यक चीजों को मनमाने तरीके से बेच रहे है। मनमाने तरीके से ग्राहकों से पैसे वसूल रहे है। हम और आप ठगे जा रहे हैं। 15 मार्च यानी विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के इस ख़ास अवसर पर आज The CSR Journal आपको बताने जा रहा है कि एक उपभोक्ता अगर अपने अधिकारों को जान ले तो वो कभी भी नहीं ठगा जायेगा।

क्यों मनाया जाता है विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस

आज के इस दौर में हर एक शख्स उपभोक्ता है, ग्राहक है ऐसे में उसे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहना चाहिए। World Consumer Right Day इसी के लिए मनाया जाता है ताकि वैश्विक स्तर पर ग्राहकों की अधिकारों को संरक्षण मिले। हर साल 15 मार्च को विश्व उपभोक्ता दिवस मनाया जाता है। इस दिन उपभोक्ताओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक किया जाता है साथ ही उपभोक्ताओं को जालसाजी या धोखाधड़ी से बचाना भी इसका मकसद है। हर साल इस दिन को मनाने के लिए एक थीम की घोषणा होती है, साल 2019 के लिए थीम थी ‘विश्वसनीय स्मार्ट उत्पाद’ यानि Trusted Smart Products, और इस बार का थीम है The Sustainable Consumer. विश्व में पहली बार 15 मार्च, 1962 को पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने 13 मार्च, 1983 को विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया था। कैनेडी ने अपने भाषण में पहली बार उपभोक्ता अधिकारों की परिभाषा को रेखांकित किया।  वे विश्व के पहले माने जाते हैं जिन्होंने औपचारिक रूप से ‘उपभोक्ता अधिकारों’ को परिभाषित किया था। इसके बाद से ही हर साल 15 मार्च से विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाया जाने लगा।

बाजार का बादशाह होता है उपभोक्ता है

हम में से हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में उपभोक्ता है। उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 के अनुसार कोई व्यक्ति जो अपने उपयोग के लिये सामान खरीदता है वह उपभोक्ता है। आज उपभोक्ता जमाखोरी, कालाबाजारी, मिलावट, अधिक दाम, कम नाप-तौल जैसी समस्यायों से घिरा है। उपभोक्ता क्योंकि संगठित नहीं हैं इसलिए हर जगह ठगा जाता है। इसलिए उपभोक्ता को जगना होगा और खुद को इन संकटों से बचाना हो%A