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कितना सफल रहा COP-27? भारत को क्या हासिल हुआ?

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21वीं सदी में जलवायु परिवर्तन पूरी दुनिया के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। ऐसे में सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व का उद्देश्य वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करना है। कार्बन उत्सर्जन को रोकने के लिए हमारा देश अग्रसर तो है ही और अन्य देशों को भी भारत प्रोत्साहित कर रहा है। दुनिया में जलवायु परिवर्तन की समस्या जितनी गंभीर होती जा रही है, इससे निपटने के गंभीर प्रयासों का उतना ही अभाव महसूस हो रहा है। यही कारण है कि जलवायु परिवर्तन या क्लाइमेट चेंज (Climate Change) को लेकर COP-27 की बैठक की जाती है।

भारत की ओर से COP-27 का प्रतिनिधित्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया

इस बार  COP-27 की बैठक मिस्त्र में 6 से 18 नवंबर तक आयोजित किया गया। इस सम्मेलन में 120 से अधिक विश्व नेताओं ने भाग लिया। भारत की ओर से इसका प्रतिनिधित्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने किया। अगर बात करें COP की तो इसका का पूरा नाम ‘कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज’ है। भारत के लिए क्लाइमेट फाइनेंस अहम मुद्दा रहा है। भारत भी इसका सदस्य है। COP का पहला सम्मेलन मार्च, 1995 को बर्लिन में आयोजित किया गया था, इसके बाद से यह लगातार जारी है। इस बार 27वां COP हुआ। संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन में जलवायु परिवर्तन से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा होती है। इसका उद्देश्य जलवायु आपदा की ओर ध्यान दिलाना और जलवायु परिवर्तन को रोकने की दिशा में प्रयासों को बढ़ावा देना है।

शिखर सम्मेलन में लॉस एंड डैमेज फंड पर बनी बात

मिस्र में संयुक्त राष्ट्र जलवायु शिखर सम्मेलन (COP) रविवार को नुकसान और क्षति को संबोधित करने के लिए ‘नुकसान और क्षति’ कोष (Loss and Damage Fund) स्थापित करने के एक ऐतिहासिक निर्णय के साथ संपन्न हुआ। हालांकि, अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे कि सभी Fossil Fuels को चरणबद्ध तरीके से कम करने के भारत के आह्वान में बहुत कम प्रगति दिखाई दी। कोष स्थापित करना उन अल्प विकसित देशों के लिए एक बड़ी जीत है, जो जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए लंबे समय से नकदी की मांग कर रहे हैं। गौरतलब है कि जलवायु परिवर्तन से संबंधित आपदाओं का सामना कर रहे गरीब देश अमीर देशों से जलवायु अनुकूलन के लिए धन देने की मांग कर रहे हैं। गरीब देशों का मानना है कि अमीर देश जो कार्बन उत्सर्जन कर रहे हैं, उसके चलते मौसम संबंधी हालात बदतर हुए हैं, इसलिए उन्हें मुआवजा दिया जाना चाहिए।
शिखर सम्मेलन शुक्रवार को खत्म होने वाला था, लेकिन वार्ताकारों ने शमन, हानि और क्षति निधि और अनुकूलन जैसे मुद्दों पर एक समझौते पर जोर दिया। एक समय में, वार्ता टूटने के करीब पहुंच गई थी, लेकिन नुकसान और क्षति को दूर करने के लिए एक नई वित्त सुविधा पर प्रगति के बाद अंतिम घंटों में गति पकड़ी जिसकी भारत सहित गरीब और विकासशील देशों की लंबे समय से मांग कर रहे थे और जो इस साल के जलवायु शिखर सम्मेलन में एक महत्वपूर्ण मुद्दा था।

COP जैसे वैश्विक महाअभियान इस समय की सबसे बड़ी जरूरत

भारत ने जलवायु परिवर्तन के कारण प्रतिकूल प्रभावों से निपटने के लिए कोष स्थापित करने संबंधी समझौता करने के लिए रविवार को मिस्र में संपन्न हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन को ऐतिहासिक बताया और कहा कि दुनिया ने इसके लिए लंबे समय तक इंतजार किया है। सीओपी27 के समापन सत्र में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने यह भी कहा कि दुनिया को किसानों पर न्यूनीकरण (ग्रीनहाउस गैस के उत्सर्जन में कमी) की जिम्मेदारियों का बोझ नहीं डालना चाहिए। बहरहाल सभी देश कार्बन उत्सर्जन की रोकथाम के साथ-साथ ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन घटाने और जैव विविधता के नुकसान को खत्म करने के प्रयासों को जितना तेज करेंगे, उसी में सबकी भलाई है। इसके लिए COP जैसे वैश्विक महाअभियान इस समय की सबसे बड़ी जरूरत है।