Varanasi पहुंचा 308 पहियों वाला बाहुबली ट्रेलर, देखने उमड़ी भीड़

The CSR Journal Magazine
वाराणसी में एक अनोखा दृश्य देखने को मिला है, जब 308 पहियों वाला एक विशाल ट्रक लोगों के आकर्षण का केंद्र बन गया। इस महाकाय ट्रेलर ने वाराणसी में सबका ध्यान खींचा है, जिसे देखन के लिए लोग दूर-दूर से आ रहे हैं। यह ट्रक बेल्जियम से आया है और इसका उद्देश्य लखीमपुर खीरी में एक विशाल रिएक्टर को लेकर जाना है। पांच महीने की यात्रा के बाद यह ट्रक झारखंड, बिहार होते हुए वाराणसी पहुंचा। यहां पहुंचने के बाद इसकी रफ्तार थम गई है।

बाधाएँ: रास्ते में कई चुनौतियाँ

वाराणसी में ट्रेलर के आने के साथ ही लॉजिस्टिक टीम को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ट्रेलर को सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कई प्रकार की समस्याएँ सामने आईं हैं, जैसे भारी वाहनों के लिए जगह बनाना और ऊंचाई की बाधाओं को पर करना। 308 पहियों वाला यह ट्रक मंगलवार शाम लंका टोल प्लाजा के पास पहुंचा था, लेकिन कच्ची सड़क में इसका पहिया धंस गया। इसके लिए टीम ने भारी मशीनों का सहारा लिया।
इसके चलते आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंच रहे हैं। कई लोग ट्रेलर के पास जाकर सेल्फी ले रहे हैं और इसे सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। एक महिला ने बताया कि उन्होंने टोटो से 5 रुपये भाड़ा देकर महाबली ट्रक देखने आई हैं। चंदौली में भी इसी तरह का माहौल था जब ट्रेलर वहाँ रुका।

जटिल लॉजिस्टिक ऑपरेशन

रिएक्टर बेल्जियम से समुद्री मार्ग के जरिए ओडिशा के पारादीप पोर्ट तक पहुंचा था। इसके बाद इसे सड़क मार्ग से लखीमपुर खीरी तक ले जाया जा रहा है। लॉजिस्टिक कंपनी के प्रबंधक ने बताया कि पूरे सफर में ऊंचाई और चौड़ाई से जुड़ी कई तरह की चुनौतियाँ सामने आ रही हैं। इस ट्रेलर का रास्ता तैयार करने में कई विभागों के साथ समन्वय करना भी एक मुश्किल काम है।

विस्फोटक प्लान: PLA प्लांट का निर्माण

इस यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि ट्रेलर में मौजूद रिएक्टर लखीमपुर खीरी में प्लास्टिक के विकल्प के लिए पॉलीलैक्टिक एसिड यानी PLA का निर्माण करने हेतु है। इस परियोजना के लिए 3000 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। यह नया प्लांट बायोडिग्रेडेबल सामग्री तैयार करेगा, जो प्लास्टिक के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा।

स्थापना का इंतजार: रिएक्टर की इंस्टॉलेशन

रिएक्टर के लखीमपुर खीरी पहुंचने के बाद अगली मुख्य प्रक्रिया इसकी स्थापना होगी। अधिकारियों का मानना है कि इस इंस्टॉलेशन में करीब एक महीने का समय लगेगा। इस परियोजना के तहत विदेशी तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है और इसके तकनीकी सेटअप में विदेशी विशेषज्ञों की भूमिका भी है।

महाबली ट्रक की चर्चा: लोगों का उत्साह

308 पहियों वाला यह ट्रक सिर्फ एक ट्रक नहीं, बल्कि अब एक लोकल आकर्षण बन गया है। इसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग आ रहे हैं। इस ट्रक के साथ जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। जैसे-जैसे ट्रक अपने गंतव्य की ओर बढ़ता है, यह वाराणसी के लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना रहेगा।

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