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सीएसआर से बनेगा कचरे से कोयला, पीएम रखेंगे आधारशिला

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी यूं तो धर्म और संस्कृति के लिए विख्यात है। पुरातन काया के साथ आधुनिक विकास में मॉडल बन रही काशी के लिए खुशखबरी है। बनारस शहर अब देश को कूड़े-कचरे से कोयला बनाना भी सिखाएगा। एनटीपीसी के सहयोग से नगर निगम रमना में हर दिन 200 टन से ज्यादा कोयला उत्पादन करने वाला प्लांट लगाने की तैयारी में है और यही उम्मीद है कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी के प्रस्तावित काशी दौरे में 180 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस प्लांट की आधारशिला रखेंगे। रमना में प्रस्तावित कचरे से कोयला बनाने का प्लांट सीएसआर फंड (CSR Fund) से बनेगा।

देश का पहला ऐसा प्लांट है जो पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र में लग रहा है

कचरे से कोयला बनाने का देश का यह पहला प्लांट होगा। करीब 25 एकड़ में बनने वाले इस प्लांट में निकलने वाले अवशेष को भी निस्तारित करने की वैज्ञानिक व्यवस्था होगी। बिजली उत्पादन इकाइयों में कोयला संकट से निजात के लिए वाराणसी में होने वाला यह प्रयोग देश को नई दिशा भी दिखाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इस प्लांट निर्माण की आधारशिला रखी जाएगी। हालांकि अभी तक कोई तारीख निर्धारित नहीं है। कूड़े से कोयला बनाने का करार नगर निगम और एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम लिमिटेड बीच हुआ है।

कचरे से कोयला बनाने का प्लांट सीएसआर फंड (CSR Fund) से बनेगा

एनटीपीसी इस प्लांट के निर्माण व संचालन पर आने वाले सभी तरह के खर्च का वहन सीएसआर फंड (Corporate Social Responsibility Funds) से करेगा। एनटीपीसी ने इस प्लांट के निर्माण के लिए मेकावबर बीके प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी है। वाराणसी नगर निगम के कमिश्नर प्रणय सिंह बताते हैं कि कचरे से कोयला बनाने का कार्य विश्व में अब तक कहीं नहीं हुआ है। यह पहली बार होगा जब कचरे से बिजली बनाने का कार्य होगा। इसके लिए दादरी में एनटीपीसी ने प्रयोग कर लिया है जिसे अब धरातल पर उतारने की तैयारी हो रही है।

600 टन कचरे से बनेगा 200 टन कोयला

दादरी में हुए अध्ययन के अनुसार 600 टन कचरे से 200 टन कोयला बनेगा। प्लांट निर्माण कार्य आगामी 25 साल को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। वाराणसी नगर निगम के आंकड़ों की माने तो हर दिन बनारस शहर से 600 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। शहर विस्तार के बाद करीब आठ सौ मीट्रिक टन कचरा निकासी का अनुमान लगाया जा रहा है। इसलिए प्लांट की क्षमता आठ सौ मीट्रिक टन से अधिक कचरा प्रसंस्करण करने की क्षमता होगी। विकास का यह नया माडल पूरे देश के लिए नजीर है। कूड़ा को संसाधन के रूप में परिवर्तित करने वाला यह प्लांट बनारस के लिए मील का पत्थर साबित होगा।