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February 23, 2026

गुजरात विधानसभा में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल का ऐलान: वंदे मातरम, आजादी के महायज्ञ की आहुति !

The CSR Journal Magazine
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सोमवार को विधानसभा में वंदे मातरम गीत के150 वर्ष पूर्ण होने के गौरवशाली अवसर पर जश्न का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि यह गीत सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि यह हमारी संस्कारों और पहचान का प्रतीक है। सीएम पटेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक रचना को भी गर्व से उद्धृत किया। उन्हें यकीन है कि वंदे मातरम आजादी के महायज्ञ का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और यह विकास की पहचान बना रहेगा।

आजादी के आंदोलन का प्रेरक स्रोत

मुख्यमंत्री ने बताया कि वंदे मातरम गीत की रचना 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। इस गीत ने गुलामी के काल में भी देशवासियों में साहस और आत्मविश्वास जगाया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम अब भी उतना ही प्रासंगिक है, जितना पहले था। इसके शब्दों में आजादी का नारा और समर्पण की भावना साफ झलकती है। भले ही वंदे मातरम की रचना गुलामी के कालखंड में हुई, लेकिन इसके अर्थ और शब्द गुलामी की छाया तक सीमित न होकर आज भी उतने ही प्रासंगिक है।

राष्ट्रभक्ति की मशाल

भूपेंद्र पटेल ने बताया कि वंदे मातरम के गीत ने न केवल आजादी के आंदोलन को गति दी, बल्कि इसे फिर से आज के युग में एक नई ऊर्जा प्रदान करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी देश की सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना को जगाने में लगे हैं, और इसे वंदे मातरम से भी जोड़ा जा सकता है।

वंदे मातरम का ऐतिहासिक महत्व

सीएम पटेल ने वंदे मातरम की शक्ति का जिक्र करते हुए बताया कि इस गीत ने ब्रिटिश काल के दौरान भी लोगों को एकजुट किया। उन्हें याद है कि वंदे मातरम गाने पर लोगों को सजा भी दी गई। मगर इसके बावजूद यह गीत कभी भी कमजोर नहीं पड़ा। इसने स्वतंत्रता के संघर्ष में लाखों लोगों के सपनों को आगे बढ़ाने का काम किया।

हमारी सांस्कृतिक पहचान

मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम में मां लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा की भक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह गीत भारत माता की शक्ति को प्रदर्शित करता है। उन्होंने बताया कि 1950 में संविधान सभा द्वारा इस गीत को राष्ट्रगान जन गण मन के सामान दर्जा दिया गया।

राष्ट्र गान जन गण मन के बराबर दर्जा देने तक के रोमांचक इतिहास का जिक्र

मुख्यमंत्री ने वंदे मातरम् गीत में भारत माता की जल, फल और धन-धान्य से भरपूर, विद्यादायिनी सरस्वती, समृद्धि दायिनी मां लक्ष्मी और अस्त्र-शस्त्र धारण करने वाली मां दुर्गा के रूप में की गई भक्ति-वंदना का उल्लेख करते हुए वंदे मातरम गीत की रचना से लेकर 1950 में संविधान सभा द्वारा इस गीत को राष्ट्र गान जन गण मन के बराबर दर्जा देने तक के रोमांचक इतिहास का विस्तार से जिक्र किया।

शहीदों के बलिदान को किया याद

भूपेंद्र पटेल ने कहा कि देश की आजादी के लिए अनेक प्रसिद्ध और गुमनाम सपूत वंदे मातरम् का नारा लगाते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए थे और सर्वोच्च बलिदान दिया था। इस गीत की प्रेरणा से देशवासियों में भारत माता के लिए कुर्बान होने की भावना और भारत भक्ति उजागर हुई थी। ऐसे त्याग, तपस्या और बलिदान से भारत को गुलामी से स्वतंत्रता तो मिली, लेकिन दशकों तक मां भारती का उचित सम्मान और गौरव उपेक्षित ही रहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने जगाई देशप्रेम की अलख

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश का सेवा दायित्व संभालते ही देशवासियों में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और राष्ट्र प्रथम के भाव की चेतना जगी है. उन्होंने विरासत का विशिष्ट सम्मान किया है और मेरी मिट्टी-मेरा देश, हर घर स्वदेशी-घर घर स्वदेशी, हर घर तिरंगा-घर घर तिरंगा जैसे अभियानों के साथ ही हजारों वर्षों की अटल आस्था और श्रद्धा के पुनर्जागरण के प्रतीक सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के माध्मय से जन-जन में सांस्कृतिक चेतना भी सुदृढ़ की है।

आधुनिक भारत का निर्माण

सीएम ने प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्होंने देश के लिए सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की छवि को एक नया रूप दिया है। “मेरी मिट्टी-मेरा देश” जैसे अभियानों के जरिए उन्होंने लोगों में स्वदेशी भावना जागृत की है। भूपेंद्र पटेल ने भारत माता के पराक्रम का उदाहरण देते हुए बताया कि जब दुश्मनों ने चुनौती दी, तो भारत माता ने ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से उन्हें जवाब दिया। ऐसा करके उन्होंने हमारी महानता का प्रदर्शन किया।

राष्ट्र की एकता का नया संकल्प

मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर देशभर में समारोह आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर देशव्यापी समारोहों के माध्यम से हमे देश के महान नायकों की वंदना का अवसर मिल रहा है।

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