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ये है देश के टॉप राज्य जहां होता है सबसे ज्यादा सीएसआर खर्च

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ये है देश के टॉप राज्य जहां होता है सबसे ज्यादा सीएसआर खर्च
 

ये है वो राज्य जहां होता है सबसे ज्यादा सीएसआर खर्च (Top States in CSR Expenditure)

देश में बड़े पैमाने पर सीएसआर के तहत विकास के काम हो रहे है। खासकर ऐसे वक़्त में जब देश में महामारी है और इस आपातकाल में हेल्थकेयर और हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर बिलकुल चरमारा सी गयी है लेकिन कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी की पहल से ना सिर्फ हेल्थ केयर पर विशेष बल दिया जा रहा है बल्कि सीएसआर ने ऐसी मिसाल पेश की है कि चौतरफा CSR की वाहवाही हो रही है। नेता हो या अभिनेता, मंत्री हो या संत्री हर कोई कॉर्पोरेट कंपनीज की मदद से सीएसआर ख़र्च कर कोरोना काल में हेल्प के लिए आगे आ रहे है। कोई कॉर्पोरेट्स ऑक्सीजन मुहैया करा रहें है तो कोई कोविड अस्पताल बनवा रहा है।

सीएसआर को अनिवार्य करने वाला भारत दुनिया का पहला देश

सीएसआर को अनिवार्य करने वाला भारत दुनिया का पहला देश है। भारत में सीएसआर कानून के तहत एक कंपनी को जिसका सालाना नेटवर्थ 500 करोड़ों रुपए या उसका सालाना इनकम 1000 करोड़ रुपए या उनका वार्षिक प्रॉफिट 5 करोड़ का हो तो उनको दो फीसदी सीएसआर पर खर्च करना जरूरी होता है। ये खर्च समाज और सामाजिक उत्थान के लिए किया जाता है। कॉर्पोरेट कंपनीज के सीएसआर फंड की मदद से देश में डेवलपमेंट के काम बड़े स्तर पर हो रहे है। सीएसआर की मदद वहां तक पहुंच रही है जहां अब तक सरकारी मदद नहीं पहुंची है। सीएसआर उन पहलुओं को छू रही है जिसे अभी तक नज़रअंदाज़ किया गया है। ऐसे में आईये जानते है कि आखिरकार वो कौन से राज्य है जहां पर बड़े पैमाने पर सीएसआर (CSR – Corporate Social Responsibility) खर्च किया जाता है।

महाराष्ट्र में होता है सबसे ज्यादा सीएसआर खर्च

पूरे देश भर में सबसे ज्यादा अगर किसी राज्य में सीएसआर खर्च होता है तो वो राज्य है महाराष्ट्र, महाराष्ट्र एक मात्र ऐसा राज्य है जहां पर Corporate Social Responsibility का एक्सपेंडिचर सबसे ज्यादा है। ये आकड़ा कोई और नहीं बल्कि मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स ने दिया है। हर फाइनेंसियल ईयर में मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स आकड़े जारी करती है और पिछले 6 सालों से महाराष्ट्र CSR Expenditure में अव्वल है। ये इसलिए भी है क्योंकि ज्यादातर कॉर्पोरेट्स का हब है महाराष्ट्र और मुंबई आर्थिक राजधानी भी है। महाराष्ट्र में इंडस्ट्रीज के मामले में भी अव्वल है और सीएसआर का ये भी नियम है कि जहां कॉर्पोरेट्स का बेस होता है वहां स्थानीय स्तर पर सीएसआर पहल में प्राथमिकता देनी होती है।

हर साल बदलता है सीएसआर खर्च का आकड़ा, लेकिन महाराष्ट्र रहता है अव्वल

हर साल मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स सीएसआर के आकड़ों को जारी करती है। The CSR Journal ने पिछले कुछ सालों के सीएसआर खर्च का आकलन किया। इस आकलन की डिटेल्ड रिपोर्ट कुछ इस तरह से है।

साल 2014-15 के टॉप 5 सीएसआर खर्च करने वाले राज्य

महाराष्ट्र

महाराष्ट्र में 1,445.91 करोड़ रुपये सीएसआर खर्च हुए, ये खर्च महाराष्ट्र के 36 जिलों में से 31 जिलों में खर्च किये गए, और महत्वपूर्ण बात ये कि 1399 कंपनीज ने मिलकर पूरे महाराष्ट्र में ये सीएसआर खर्च किया है। इन कंपनीज में से प्रमुख है रिलायंस इंडस्ट्रीज, श्यामक इन्वेस्टमेंट, Accenture Services है जिन्होंने हेल्थ केयर, एजुकेशन और रूरल डेवलपमेंट पर काम किया है।

तमिलनाडु

तमिलनाडु में 539.63 करोड़ रुपये सीएसआर खर्च हुए है। ये खर्च तमिलनाडु के 32 जिलों में से 30 जिलों पर खर्च किये गए। तमिलनाडु राज्य में 587 कंपनीज ने सीएसआर खर्च किया है, प्रमुख रूप से ये कंपनीज है भारत इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड, इंफोसिस और Coromandel Electric. तमिलनाडु में सबसे ज्यादा शिक्षा पर सीएसआर खर्च किया है, उसके बाद नंबर आता है वोकेशनल ट्रेनिंग का और फिर हेल्थ केयर का।

आंध्र प्रदेश

आंध्र प्रदेश के सभी 13 जिलों में 414.27 करोड़ रुपये सीएसआर खर्च किये गए। ये खर्च 227 कम्पनीज ने किये है, प्रमुख रूप से ये कंपनियां है आईटीसी, HPCL और सुंदरम क्लेटॉन है। इन कंपनीज ने सबसे ज्यादा एजुकेशन पर, उसके बाद हेल्थ केयर और फिर Environmental Sustainability पर खर्च किया है।

कर्नाटक

कर्नाटक के 30 जिलों में से 21 जिलों में 545 कॉरपोरेट कंपनीज ने 403 करोड़ रुपए खर्च किए। अगर जो टॉप 3 सीएसआर कंपनीज की बात करें तो विप्रो लिमिटेड, इंफोसिस लिमिटेड, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने सबसे ज्यादा खर्च एजुकेशन पर किया। उसके बाद से हेल्थ केयर पर किया और फिर एनवायरमेंट सस्टेनेबिलिटी पर सीएसआर खर्च किया।

गुजरात

गुजरात – साल 2014-15 में 519 कॉरपोरेट्स ने गुजरात के 33 जिलों में से 27 जिलों में 313 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। कॉरपोरेट कंपनी की अगर हम बात करें तो गुजरात मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, गिरी इंडस्ट्रीज लिमिटेड, टॉरेंट फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड ने यहां पर काम किया है और डेवलपमेंट सेक्टर में एजुकेशन, हेल्थ केयर और रूरल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट में यह सीएसआर के काम हुए हैं।

साल 2015-16 के टॉप 5 सीएसआर खर्च करने वाले राज्य

महाराष्ट्र

साल  2015-16 में भी महाराष्ट्र सबसे आगे है, महाराष्ट्र के 36 जिलों में से 34 जिलों में सीएसआर से बड़े पैमाने पर विकास के काम हुए हैं। 2780 कंपनियों ने महाराष्ट्र में सीएसआर के तहत इन्वेस्टमेंट किया और लगभग 2052 करोड़ रुपए खर्च किए। इन सीएसआर कंपनीज में सबसे ऊपर नाम है रिलायंस इंडस्ट्रीज का। उसके बाद बजाज ऑटो लिमिटेड का, और तीसरे पायदान पर है यस बैंक लिमिटेड। जिसमें एजुकेशन पर सबसे ज्यादा खर्च हुआ। उसके बाद नंबर आता है हेल्थ केयर का और तीसरे नंबर पर है रूरल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट।

आंध्र प्रदेश

दूसरे पायदान पर है आंध्र प्रदेश। आंध्र प्रदेश के 13 जिलों में 450 कॉर्पोरेट ने 1294 करोड़ रुपए खर्च किए। 450 कॉरपोरेट्स में सबसे ऊपर नाम है एनटीपीसी लिमिटेड का। दूसरे पायदान पर है आईटीसी लिमिटेड और उसके बाद पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड। डेवलपमेंट सेक्टर की बात करें तो आंध्र प्रदेश में साल 2015-16 में पॉवर्टी, इरेडिकेटिंग हंगर और मालनूट्रिशन पर सबसे ज्यादा काम हुआ। उसके बाद शिक्षा पर काम हुआ और तीसरे पायदान पर रहा हेल्थ केयर सेक्टर।

कर्नाटक

तीसरे नंबर पर है कर्नाटक राज्य। फाइनेंशियल ईयर 2015-16 में 1043 सीएसआर कंपनीज ने कर्नाटक के 28 जिलों में 785 करोड़ रुपए खर्च किए। इन कंपनीज में सबसे ज्यादा खर्च विप्रो लिमिटेड ने किया उसके बाद उडुपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और तीसरे पायदान पर है हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड। डेवलपमेंट सेक्टर्स की बात करें तो सबसे ज्यादा खर्च एजुकेशन पर हुआ, उसके बाद हेल्थ केयर और फिर एनवायरमेंटल सस्टेनेबिलिटी पर खर्च हुआ है।

तमिलनाडु

चौथे पायदान पर है तमिलनाडु। तमिलनाडु में साल 2015-16 में 1328 कॉर्पोरेट्स ने तमिलनाडु के 30 जिलो में 633 करोड़ रुपए का खर्च किया है। यह कंपनी है Neyveli Lignite Corporation, जोहो कॉरपोरेशन, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट और इन कंपनीज ने एजुकेशन सेक्टर में, हेल्थकेयर सेक्टर में और सैनिटेशन में खर्च किए हैं।

गुजरात

साल 2015-16 में गुजरात में 973 कंपनीज ने राज्य के 29 जिलों में 551 करोड़ रुपए का सीएसआर इन्वेस्टमेंट किया। ये कंपनीज है गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन, अदानी पोर्ट, टोरेंट फार्मासिटीकल और एजुकेशन, हेल्थ केयर और रूरल डेवलपमेंट पर ये सीएसआर खर्च किये गए।

पिछले 6 सालों की तुलना में साल 2018-19 में सबसे ज्यादा सीएसआर खर्च

हर साल सीएसआर खर्च में महाराष्ट्र आगे

पिछले 6 सालों की बात करें तो साल 2018-19 में सबसे ज्यादा सीएसआर ख़र्च हुआ है। ज्यादा सीएसआर खर्च का मतलब कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की जिंदगियों में सकारात्मक बदलाव आया है। साल 2018-19 में महाराष्ट्र में सर्वाधिक सीएसआर इन्वेस्टमेंट हुआ। महाराष्ट्र के 32 जिलों में 2847 करोड़ रुपए के सीएसआर इन्वेस्टमेंट आये। देश की तमाम कॉरपोरेट्स ने यह इन्वेस्टमेंट किये। कॉर्पोरेट घरानों की बात करें तो 3480 कॉर्पोरेट ने महाराष्ट्र में इन्वेस्टमेंट किए। इनमें से सबसे ऊपर है रिलायंस इंडस्ट्रीज, उसके बाद बजाज ऑटो लिमिटेड और जेएसडब्ल्यू स्टील। इन कंपनीज ने महाराष्ट्र के एजुकेशन सेक्टर, हेल्थ केयर, रूरल डेवलपमेंट पर काम किए।

कर्नाटक

दूसरे नंबर पर रहा कर्नाटक राज्य। कर्नाटक के 27 जिलों में 1411 कॉर्पोरेट घरानों ने 1222 करोड़ रुपए का सीएसआर इन्वेस्टमेंट किया। यह कंपनियां है इंफोसिस लिमिटेड, विप्रो लिमिटेड, बेंगलुरु रिफायनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स। इन्होंने सबसे ज्यादा खर्च एजुकेशन पर या उसके बाद एनवायरमेंटल सस्टेनेबिलिटी पर किया और हेल्थ केयर पर किया।

गुजरात

तीसरे पायदान पर है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य गुजरात। गुजरात में सीएसआर के आकड़ों में लगातार सुधार हो रहा है। गुजरात में सीएसआर का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है। साल 2018-19 में गुजरात में सीएसआर खर्च के आकड़ा हज़ार करोड़ के ऊपर पहुंच गया। मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स के आंकड़ों की माने तो गुजरात के 27 जिलों में 1411 कंपनियों ने 1059 करोड़ों रुपए का सीएसआर किया है। इनमें से सबसे ऊपर है मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड, ओएनजीसी और अडाणी पोर्ट है। इन कंपनीज ने एजुकेशन में सबसे ज्यादा खर्च किया है। उसके बाद हेल्थ सेक्टर पर काम किया है और आखिर में रूरल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर।

तमिलनाडु

चौथे पायदान पर है तमिलनाडु। साल 2018-19 में 1441 कॉर्पोरेट कंपनी ने ₹823 करोड़ का काम तमिलनाडु के 30 जिलों में किया। यह कंपनी है एनएलसी इंडिया लिमिटेड, सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड, ट्रैक्टर्स एंड फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड। इन्होंने भी एजुकेशन, हेल्थ केयर और रूरल डेवलपमेंट पर काम किया।

उड़ीसा

उड़ीसा में भी लगातार सीएसआर के तहत काम हो रहे हैं। उड़ीसा के 25 जिलों में 232 सीएसआर कंपनीज ने 683 करोड़ रुपए का सीएसआर एक्सपेंडिचर किया है। यह कंपनियां है महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड, आईओसीएल और सिद्धार्थ इंजीनियरिंग लिमिटेड। उड़ीसा में बड़े पैमाने पर एजुकेशन पर काम हुआ है। दूसरे नंबर पर है गरीबी उन्मूलन, इरेडिकेटिंग हंगर और मालनूट्रिशन पर भी काम हुआ है। उसके बाद रूरल डेवलपमेंट पर भी काम किया गया है।

कोरोना महामारी के दौरान भी जमकर हुआ सीएसआर खर्च

कोरोना महामारी के दौरान एक दूसरे की मदद कर लोग मानवता की मिसाल पेश कर रहे है वही देश की कॉर्पोरेट्स भी इस कोरोना महामारी में किसी मसीहा से कम नहीं है। देश के कॉर्पोरेट्स बड़े पैमाने पर कोरोना काल में आम जनमानस को राहत देने के लिए बड़े पैमाने पर CSR Expenditure कर रहे है। साल 2019-20 की बात करें तो इस साल भी सीएसआर खर्च किये गए लेकिन ये खर्च ज्यादातर कोरोना महामारी से निजात पाने के लिए किया गया। मिनिस्ट्री ऑफ़ कॉर्पोरेट अफेयर्स ने 31 दिसंबर 2020 तक के आकड़ों को साझा किया है।

महाराष्ट्र

साल 2019-20 में भी महाराष्ट्र अव्वल है। पिछले कई सालों से महाराष्ट्र में लगातार देश की कॉर्पोरेट कंपनीज ने सीएसआर एक्सपेंडिचर सबसे ज्यादा किया है। 1482 सीएसआर कंपनियों ने महाराष्ट्र के 35 जिलों में 2108 करोड़ रुपए का सीएसआर एक्सपेंडिचर किया है। इन कंपनीज में सबसे ज्यादा एक्सपेंडिचर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने किया है। उसके बाद दूसरे पायदान पर है रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और तीसरे नंबर पर है जेपी मॉर्गन सर्विसेज। यहां पर भी महाराष्ट्र में एजुकेशन को इन कंपनियों ने तर्जी दी है। दूसरे नंबर पर हेल्थ केयर है और तीसरे नंबर पर एनवायरमेंट सस्टेनेबिलिटी है।

कर्नाटक

सीएसआर एक्सपेंडिचर में साल 2019-20 में कर्नाटक दूसरे नंबर पर है। कर्नाटक राज्य में कुल 30 जिले हैं जिनमें से 767 सीएसआर कंपनीज ने 1138 करोड़ रुपए का सीएसआर एक्सपेंडिचर किया हुआ है। इनमें से सबसे ऊपर कंपनी है इंफोसिस लिमिटेड, दूसरे नंबर पर है विप्रो लिमिटेड और तीसरे नंबर पर है बेंगलुरु रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स। यहां पर भी सबसे ज्यादा खर्च एजुकेशन पर हुआ है। दूसरे नंबर पर एनवायरमेंट सस्टेनेबिलिटी है और तीसरे नंबर पर हेल्थकेयर है।

असम भी सीएसआर खर्च की लिस्ट में

असम राज्य के लिए यह बड़ी बात है कि अब तक असम टॉप फाइव सीएसआर एक्सपेंडिचर राज्य की लिस्ट में नहीं आता था। लेकिन साल 2019-20 में पहली बार असम में बड़े पैमाने पर सीएसआर एक्सपेंडिचर हुए हैं और टॉप फाइव में असम ने पहली बार जगह बनाई है। असम में कुल 33 जिले हैं 33 जिलों में से 15 जिलों में देश की 70 कॉर्पोरेट कंपनियों ने 738 करोड़ रुपए का सीएसआर एक्सपेंडिचर किया है। इन 70 कंपनियों में सबसे ऊपर जिसका नाम है वह ओएनजीसी। दूसरे पायदान पर ऑयल इंडिया लिमिटेड और तीसरे पायदान पर है इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन। असम में सबसे ज्यादा काम हेल्थ केयर पर किया गया। उसके बाद एजुकेशन पर और तीसरे पायदान पर है लाइवलीहुड प्रोजेक्ट।

तमिलनाडु भी सीएसआर खर्च में आगे

साल 2019-20 में तमिलनाडु में 650 सीएसआर कंपनीज ने तमिलनाडु के 34 जिलों में 697 करोड़ रुपए का सीएसआर एक्सपेंडिचर किया है। यह कंपनी है राणे मद्रास लिमिटेड, एनएलसी इंडिया लिमिटेड और एमआरएफ लिमिटेड। इन कंपनियों ने एजुकेशन पर सबसे ज्यादा खर्च किया है। उसके बाद हेल्थ केयर और तीसरे नंबर पर है वोकेशनल स्किल्स।

गुजरात

साल 2019-20 में गुजरात में 699 कॉरपोरेट कंपनीज ने 656 करोड़ रुपए का सीएसआर एक्सपेंडिचर किया है। यह एक्सपेंडिचर सबसे ज्यादा हेल्थ केयर पर किया गया उसके बाद एजुकेशन पर किया गया और फिर रूरल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर किए गए और जिन कंपनियों ने सबसे ज्यादा खर्च किया है वह है मारुति सुजुकी, पिडीलाइट इंडस्ट्रीज और गुजरात स्टेट पेट्रोनेट लिमिटेड।