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क्या राम मंदिर, गोकशी, जुमला, हनुमान की जाति ने बीजेपी की लुटिया डूबाई?

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ठीक एक साल पहले राहुल गांधी की ताजपोशी हुई थी, राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था लेकिन सही मायने में एक साल बाद चुनावी नतीजों ने राहुल गांधी के सिर पर ताज पहनाया है। हमेशा कांग्रेस पूछती कि कहाँ है अच्छे दिन, वाकई में चुनावी नतीजों ने कांग्रेस के अच्छे दिन फिर से लौटा दिया है, लोकतंत्र के इस महापर्व में मंगलवार का दिन कांग्रेस के लिए एक नया सवेरा लेकर आया है, कांग्रेस की डूबती नैया को किनारा मिलता दिख रहा है, पांच राज्यों में हुए चुनाव में कांग्रेस का पिछले पांच सालों में सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा, देश के राज्यों से जनाधार खोती कांग्रेस के लिए ही नहीं बल्कि कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए भी ये पांच राज्यों के चुनाव अस्तित्व की लड़ाई थी, चुनाव के परिणामों ने ना सिर्फ कांग्रेस पार्टी को जिताया बल्कि राहुल गांधी को उस मुहाने पर ला खड़ा कर दिया है कि अब राहुल गांधी का महागठबंधन में नेतृत्व पर सवाल खड़े करने वालों को दो बार सोचना पड़े।

मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत ने पार्टी के कार्यकर्ताओं में फिर से नया जोश भर दिया है, कांग्रेस की जीत और बीजेपी की हार से देश की राजनीती ने एक नया बहस खड़ा कर दिया है, जहाँ बीजेपी एक के बाद एक राज्य जीतती जा रही थी वही कांग्रेस ने बीजेपी के विजय रथ पर ब्रेक लगा दिया है, बीजेपी की हार से जहाँ कांग्रेस मुक्त भारत का सपना चकनाचूर हो गया वही जाहिर है इस चुनाव के परिणाम आम चुनावों के परिणामों पर भी असर डालेंगे, बहरहाल पांच राज्यों के परिणामों ने कई सवाल खड़े कर दिए कि आखिरकार पांच में से तीन राज्यों में कांग्रेस की जीत क्या ये जीत राहुल गांधी की है या स्थानीय नेतृत्व की, क्या करिश्माई नेता नरेंद्र मोदी की पॉपुलैरिटी घट रही है, या बड़बोले मोदी की झूठ की कलई सब के सामने आ रही है, या फिर क्या राम मंदिर, गोकशी, जुमला, भगवान हनुमान की जाति ने बीजेपी की लुटिया डुबो दी।

इन सवालों के जवाब नरेंद्र मोदी और बीजेपी के चाणक्य अमित शाह को जरूर तलाशना चाहिए लेकिन इनसब के बीच इसे बिलकुल नहीं झुटलाया जा सकता है कि नरेंद्र मोदी के लिए और बीजेपी के लिए 2019 के चुनाव आसान नही रहने वाले है, आम चुनाव से पहले ये चुनाव सेमीफइनल के रूप में देखा जा रहा था जिसके परिणाम ने 2019 की तस्वीर को कुछ हद तक साफ़ कर दिया, चुनावों के नतीजों ने इतना तो तय कर दिया है कि आगामी लोकसभा चुनाव के लिए राहुल गांधी, मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ी चुनौती बन कर उभरेंगे। लोकसभा और राज्यों के चुनावों में कांग्रेस की करारी हार ने कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर कई तरह के सवाल खड़े हो गए थे, यहाँ तक कि कांग्रेस ने उस दौरान कई क्षेत्रीय पार्टियों से गठबंधन कर एक मजबूत विपक्षी पार्टी बनाने की कोशिश की थी लेकिन कई क्षेत्रीय पार्टी के नेता विपक्षी पार्टी में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के दावेदार के रुप में देखने को तैयार नहीं थे, लेकिन इस बार हुए पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के नतीजों ने इन संदेहों को कमजोर कर दिया है। इस चुनाव परिणाम के बाद राहुल गांधी की नेतृत्व पर भी विश्वास किया जा सकेगा। ये चुनाव नतीजे देश की राजनीति को एक नई दिशा देंगे। साथ ही मोदी को सोचने पर मजबूर करेंगे कि गोकशी, संप्रदाय, मंदिर मस्जिद, धर्म और भगवान की जाति के मुद्दे से देश का विकास नहीं होता।