सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: जमीन अधिग्रहण मामलों में आर्थिक बोझ का हवाला देकर मुआवजा घटाना गलत

The CSR Journal Magazine

संविधान के तहत है मुआवज़ा का अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय में स्पष्ट किया कि जमीन अधिग्रहण के मामलों में किसानों को मिलने वाला मुआवजा, सोलैटियम और ब्याज को सरकार के वित्तीय बोझ से नहीं जोड़ा जा सकता। यह बयान चीफ जस्टिश सूर्यकांत और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया जिसमें नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने पुराने फैसले की समीक्षा की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि सही मुआवजा मिलना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने 25 मार्च, 2026 को दिए अपने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सिर्फ भारी आर्थिक बोझ का हवाला देकर भूमि अधिग्रहण के मुआवजे को कम नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि ‘उचित मुआवजे’ का संवैधानिक अधिकार एक मौलिक गारंटी है, जिसे वित्तीय कठिनाइयों के आधार पर कम (Dilute) नहीं किया जा सकता।

किसानों के हक में आए कई महत्वपूर्ण फैसले

कोर्ट ने अपने पूर्व के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि 2019 में दिए गए आदेश के अनुसार किसानों को मुआवजा और ब्याज पूर्व तारीख से लागू होगा। इस मामले में NHAI ने तर्क दिया कि इस फैसले से उसे लगभग ₹29,000 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय बोझ उठाना पड़ेगा। हालांकि, कोर्ट ने इस दावे को खारिज कर दिया और साफ किया कि आर्थिक कारणों को मुआवजा के नियमों में बाधा नहीं डालने दिया जा सकता।

ब्याज की दर को लेकर नई नियमावली

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जमीन मालिकों को मिलने वाला ब्याज 9% होगा, जबकि NHAI एक्ट के अंतर्गत यह केवल 5% की सीमा में सीमित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यह निर्णय किसानों के हक में एक सकारात्मक कदम है और इससे उनके आर्थिक दायित्वों को भी ध्यान में रखा जाएगा। कोर्ट ने अपने पहले के आदेश को बरकरार रखा कि जिन किसानों की जमीन NHAI अधिनियम के तहत अधिग्रहित की गई थी, वे भी ब्याज और सांत्वना राशि के हकदार हैं। हालांकि, कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जो मामले 28 मार्च, 2015 से पहले पूरी तरह से बंद (Finality) हो चुके हैं, उन्हें केवल इस नए कानूनी आधार पर दोबारा नहीं खोला जा सकेगा। कोर्ट ने यह भी ध्यान दिया कि सभी मामलों को दोबारा खोलने की अनुमति नहीं है। विशेषकर 2018 से पहले के मामलों को फिर से नहीं खोला जाएगा। लेकिन जो दावे पहले से लंबित हैं, उन पर उचित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार निर्णय लिया जाएगा। यह निर्णय जमीन मालिकों के अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया की स्थिरता के बीच संतुलन बनाने के उद्देश्य से लिया गया है।

भारत में भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) के तहत मुआवजे की गणना के नियम

भारत में भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) के तहत मुआवजे की गणना मुख्य रूप से ‘उचित मुआवजा और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम, 2013’ (LARR Act 2013) के आधार पर की जाती है। इसके मुख्य नियम निम्नलिखित हैं-

1. बाजार मूल्य का निर्धारण (Market Value)

सबसे पहले जमीन का आधार मूल्य तय किया जाता है, जो इनमें से जो भी अधिक हो, वह होता है:
उस क्षेत्र में पिछले 3 वर्षों के दौरान हुए रजिस्ट्री सौदों (Sale Deeds) का औसत मूल्य।
राज्य सरकार द्वारा निर्धारित सर्कल रेट (Circle Rate)।

2. गुणांक (Multiplier Factor)

बाजार मूल्य तय होने के बाद, जमीन की स्थिति के आधार पर उसे गुणा किया जाता है:
शहरी क्षेत्र (Urban): बाजार मूल्य का 1 गुना।
ग्रामीण क्षेत्र (Rural): बाजार मूल्य का 1.25 से 2 गुना (दूरी के आधार पर राज्य सरकार तय करती है)।

3. सांत्वना राशि (Solatium) – 100 प्रतिशत अतिरिक्त

यह मुआवजे का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऊपर तय किए गए कुल मूल्य (बाजार मूल्य + गुणांक) के बराबर यानी 100 फीसदी अतिरिक्त राशि सांत्वना के रूप में दी जाती है।
(उदाहरण: यदि जमीन की कीमत 10 लाख तय हुई है, तो 10 लाख सांत्वना राशि जोड़कर कुल 20 लाख दिए जाएंगे।)

4. संपत्ति का मूल्य (Assets on Land)

जमीन पर मौजूद अन्य चीजों का अलग से मूल्यांकन किया जाता है:
पेड़ और फसलें: कृषि विभाग द्वारा मूल्यांकन।
भवन या संरचना: लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों द्वारा मूल्यांकन।

5. अतिरिक्त ब्याज (Additional Interest)

अधिग्रहण की अधिसूचना (Section 11 Notification) जारी होने की तारीख से लेकर अंतिम अवार्ड सुनाए जाने तक, बाजार मूल्य पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होता है।

6. पुनर्वास और पुनर्व्यवस्था (R&R Benefits)

सिर्फ पैसा ही नहीं, प्रभावित परिवारों को अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं:
विस्थापन भत्ता: घर बदलने के लिए एकमुश्त राशि।
रोजगार: परिवार के एक सदस्य को नौकरी या उसके बदले एकमुश्त भुगतान (लगभग 5 लाख रुपये)।
घर की सुविधा: यदि घर अधिग्रहित हुआ है, तो बना-बनाया घर या घर बनाने के लिए प्लॉट।
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के अनुसार, अब NHAI (नेशनल हाईवे) के मामलों में भी पुराने नियमों के बजाय इन उदार नियमों के तहत ब्याज और सांत्वना राशि देना अनिवार्य कर दिया गया है।

बड़े बदलाव की आवश्यकता

कोर्ट ने 2019 के अपने फैसले में NHAI एक्ट की धारा 3J को असंवैधानिक ठहराया था, जिसके कारण भूमि अधिग्रहण कानून की धाराएँ लागू नहीं हो पाती थीं। इससे समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) का उल्लंघन होता था। यह निर्णय किसानों के अधिकारों की रक्षा करने में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सके।

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