क्या दिव्यांगता के कारण अयोग्य कैडेट भी ‘पूर्व सैनिक’ माने जाएं? सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

The CSR Journal Magazine
सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या प्रशिक्षण के दौरान घायल या दिव्यांग हुए सैन्य कैडेट को पूर्व सैनिक का दर्जा देकर सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ दिया जा सकता है। न्यायालय ने इन युवा कैडेटों को रोजगार की जरूरतों और चुनौतियों पर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट ने सरकार को इससे जुड़े मुद्दों पर विस्तृत जवाब देने का निर्देश दिया है।

कैडेटों की उम्र और रोजगार की आवश्यकता

जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने इस मामले में बताया कि अधिकांश सैन्य कैडेट की उम्र 30 वर्ष से कम होती है। उन्हें रोजगार की गंभीर आवश्यकता है। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने यह मुद्दा उठाया कि क्या चिकित्सकीय कारणों से बाहर किए गए कैडेट को भी पूर्व सैनिक माना जा सकता है, जिससे उन्हें सरकारी और अर्ध-सम्मानित पदों में आरक्षण का फायदा मिल सके।

सरकार का रुख और सार्वजनिक हित

इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एन वेंकटरमण ने आश्वासन दिया है कि इस विषय पर व्यापक उत्तर प्रदान किया जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय इस मामले की स्वतः संज्ञान सुनवाई कर रहा है, जो प्रशिक्षण के दौरान चोट लगने या दिव्यांगता के कारण कैडेटों की दिक्कतों से संबंधित है।

न्यायालय की चिंता और बीमा कवर

पिछले वर्ष, 18 अगस्त को, न्यायालय ने कहा था कि सेना के कैडेटों को साहसी होना चाहिए और प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांगता से निराश नहीं होना चाहिए। न्यायालय ने सरकार को यह भी निर्देश दिया था कि ऐसे मामलों के लिए बीमा कवर उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। इससे कैडेटों को आपात स्थितियों में सहायता मिल सकेगी।

कैडेटों के संघर्ष और अधिकार

उच्चतम न्यायालय ने केंद्र और रक्षा बलों से उन कैडेट के मुद्दों पर जवाब मांगा है जिन्हें प्रशिक्षण के दौरान दिव्यांगता के कारण चिकित्सा आधार पर बाहर किया गया। इससे पहले, न्यायालय ने कहा था कि केंद्र को विभिन्न सैन्य संस्थानों के कठोर प्रशिक्षण का सामना कर रहे कैडेटों के लिए ग्रुप इंश्योरेंस जैसी योजना लागू करने पर विचार करना चाहिए।

वर्तमान एकमुश्त राशि का मुद्दा

इसके अलावा, न्यायालय ने मौजूदा मात्र 40,000 रुपये की एकमुश्त राशि को बढ़ाने पर भी विचार करने की सलाह दी है, ताकि इन कैडेटों की चिकित्सा जरूरतों को पूरा किया जा सके। हाल ही में, न्यायालय ने एक खबर पर स्वतः संज्ञान लिया जिसमें इन कैडेटों के संघर्ष को उजागर किया गया था। इन्हें देश के प्रमुख सैन्य संस्थानों में प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न कारणों से बाहर किया गया है।

500 कैडेट की समस्या

साल 1985 से अब तक करीब 500 अधिकारी कैडेट विभिन्न स्तर की दिव्यांगता के चलते प्रशिक्षण के दौरान बाहर किए गए हैं। इस मुद्दे को लेकर सर्वोच्च न्यायालय की सक्रियता ने इन कैडेटों की समस्याओं को एक नए स्तर पर लाने का काम किया है, जिससे उनके अधिकारों और अवसरों की रक्षा हो सके।

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