Silchar Municipal Corporation Election: बैलट पेपर से हुए चुनाव, फिर भी हार गयी कांग्रेस, बीजेपी का रहा जलवा 

The CSR Journal Magazine
Silchar Municipal Corporation Election: असम के सिलचर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (SMC) में हाल ही में बैलेट पेपर से हुए चुनावों ने राजनीतिक गलियारे में हलचल मचा दी है। यहां विपक्षी दलों का प्रदर्शन बेहद खराब रहा, जबकि बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए ने 42 में से 34 सीटें जीतकर एक बार फिर से अपनी ताकत साबित की है। कांग्रेस की कहानी तो और भी दिलचस्प है, क्योंकि उसे महज दो सीटों पर ही संतोष करना पड़ा।

Silchar Municipal Corporation Election: कांग्रेस का घटता जन आधार

2014 के बाद से कांग्रेस ने हर चुनावी हार को ईवीएम की कमजोरी ठहराया था, लेकिन इस बार बैलेट पेपर के चुनाव में भी वह कुछ नहीं कर सकी। चुनाव अधिकारी बताते हैं कि कांग्रेस सिर्फ दो सीटें ही जीत पाई, वहीं बीजेपी ने शानदार 32 सीटें जीती हैं, जिसमें दो उम्मीदवार निर्विरोध भी जीते। एनडीए का इन चुनावों में कुल 34 सीटें जीतना दर्शाता है कि जनता ने एक बार फिर से विकास के एजेंडे को चुना है।

निर्दलीय उम्मीदवारों का उभरता चेहरा

सिलचर में चुनाव 3 अक्टूबर, 2026 को हुए, जहां ऐतिहासिक 70.22% मतदान हुआ। खास रूप से वार्ड एक में वोटिंग 78 प्रतिशत रही जबकि वार्ड 22 में केवल 50 प्रतिशत। यहां 133 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा, जिसमें 1.29 लाख पुरुष, 1.4 लाख महिलाएं और 11 ट्रांसजेंडर वोटर थे। इससे साफ है कि निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी जगह बनाई है, क्योंकि इसकी संख्या छह रही।

पुनर्मतगणना की मांग उठी

बीजेपी ने वार्ड संख्या 29 और 30 में पुनर्मतगणना की मांग की है, जहां निर्दलीय और कांग्रेस के उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। अधिकारियों का कहना है कि इस मुद्दे पर अभी कोई निर्णय नहीं लिया गया है। यह स्थिति उन लोगों के लिए है जो ईवीएम पर सवाल उठाते रहे हैं।

विपक्ष की प्रगति पर सवाल

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस चुनावी जीत को विपक्ष के लिए एक चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि बैलेट पेपर से मिली जीत ने ईवीएम के संदर्भ में चुनावी प्रक्रियाओं पर उठाए गए सवालों को गलत साबित कर दिया है। बीजेपी की असम इकाई के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने भी इसे कांग्रेस की विफलता के रूप में देखा।

विपक्षी पार्टियों का प्रदर्शन

विपक्षी पार्टियां इस चुनावी प्रक्रिया के खिलाफ सड़कों पर उतर आई हैं। राहुल गांधी, अखिलेश यादव जैसे प्रमुख नेता लगातार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं। इन नेताओं ने संसद भवन से चुनाव आयोग के बाहर प्रदर्शन भी किया है। ऐसा लगता है कि विपक्ष के नेताओं को अब बैलेट पेपर के नतीजों ने थोड़ी चिंता में डाल दिया है।

कांग्रेस के लिए एक और चुनौती

कांग्रेस के नेताओं की बेचैनी इस बात से पता चलती है कि वे चुनावी नतीजों को एक बार फिर से ईवीएम की मिस्ट्री से जोड़ रहे हैं। लेकिन सिलचर में हुई इस ऐतिहासिक हार ने साफ दिखाया है कि उनकी मांगें अब लोगों के बीच में कितनी भीड़ कम कर रही हैं।

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