Rice Price Update: दाल-चावल और बिरयानी खाना हो सकता है महंगा, काबू पाने के लिए सरकार ने बनाया बड़ा प्लान

The CSR Journal Magazine
नई दिल्ली. हाल ही में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद अब चावल की कीमतों में भी उछाल आने की आशंका जताई जा रही है। इस स्थिति को देखते हुए सरकार ने चावल से एथनॉल बनाने की लिमिट तय कर दी है, ताकि उपभोक्ताओं पर बढ़ी कीमत का बोझ न पड़े। इस कदम से सरकार का उद्देश्य खुदरा बाजार में चावल की कीमतों को नियंत्रित करना है।
सरकार ने कहा है कि चावल की कीमतों को काबू में करने के लिए चालू वित्त वर्ष में दोगुना चावल बाजार में उतारा जाएगा। पहले ओपन मार्केट के जरिए प्राइवेट कारोबारियों के लिए 2026-27 में करीब 25 लाख टन चावल बेचने का लक्ष्य रखा गया था, जिसे अब बढ़ाकर 50 लाख टन कर दिया गया है। इस निर्णय से बाजार में चावल की उपलब्धता बढ़ेगी और कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी।

उत्पादन में कमी की आशंका

उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि पिछले 10 साल में पहली बार चावल उत्पादन में कमी की आशंका जताई जा रही है। यह बीते 20 साल की सबसे बड़ी गिरावट होगी। फसल पकने के समय देश के ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हुई, जिससे फसल खराब हो गई। इसके परिणामस्वरूप आने वाले समय में चावल की खुदरा कीमतों पर असर पड़ सकता है।

सरकार की तैयारी

उपभोक्ताओं को इस स्थिति से बचाने के लिए सरकार भारतीय खाद्य निगम यानी एफसीआई के गोदाम से बाजार में चावल बेचने की तैयारी कर रही है। पहले ही सरकार ने आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना के दक्षिणी राज्यों को पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करने, जमाखोरी रोकने और कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए 31 जनवरी, 2027 तक चावल और धान पर स्टॉक लिमिट लगाने का आदेश दे दिया है।

भारत का चावल उत्पादन

सरकार इस योजना के तहत इस साल निजी खरीदारों को पहले ही 25 लाख मीट्रिक टन चावल बेच चुकी है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 11 लाख मीट्रिक टन बेचा गया था। इस तरह, सरकार ने पिछले साल की तुलना में चावल की बिक्री में काफी वृद्धि की है, जिससे बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।
चावल उत्पादन को लेकर चिंताएं इसलिए भी बढ़ रही हैं, क्योंकि भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल उत्पादक देश है और सबसे ज्यादा निर्यात भी करता है। इस साल मानसून की बारिश सामान्य से 13 फीसदी कम रही, जिससे चावल उत्पादन पर असर पड़ा है। इसके अलावा, फसल पकने के समय हुई बारिश ने भी उत्पादन पर बुरा असर डाला है।

सरकार का उद्देश्य

अब सरकार का मकसद सप्लाई को बेहतर बनाना और जमाखोरी-कालाबाजारी पर रोक लगाना है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि बाजार में चावल की कीमतों को भी नियंत्रित किया जा सकेगा। इस प्रकार, सरकार ने चावल की कीमतों को काबू में रखने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, जो आने वाले समय में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

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