इस साल का गणतंत्र दिवस भारत के लिए ऐतिहासिक होने वाला है। 26 जनवरी को आयोजित होने वाली परेड में सिर्फ परंपरा और झांकियों का ही प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि भारतीय सेना की आधुनिक ताकत और रणनीतिक क्षमता का भी प्रदर्शन होगा। यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डर लेयेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी। वहीं, कई सैन्य टुकड़ियां लंबे समय बाद या पहली बार परेड का हिस्सा बनेंगी, जिससे भारत की तकनीक, परंपरा और भविष्य की तैयारी की झलक दुनिया के सामने आएगी।
साइलेंट वॉरियर्स का अद्वितीय प्रदर्शन
इस बार परेड में सबसे बड़ा आकर्षण होंगे ‘साइलेंट वॉरियर्स’। ये भारतीय सेना के रिमाउंट वेटरनरी कॉर्प्स की टुकड़ी हैं, जो दुर्गम मौसम में सीमा तक रसद और ईंधन पहुंचाने में सक्षम हैं। परेड में दो डबल हम्प ऊंट, नुब्रा और गलवान, भी नजर आएंगे। इनके साथ सेना के 22 कुत्ते, चार शिकारी पक्षी और चार ज़ांस्कर पोनीज़ भी शामिल होंगे। इस बार सिर्फ आर्मी डॉग्स नहीं, बल्कि पूरी ‘साइलेंट वॉरियर्स’ यूनिट की ताकत राजपथ पर दिखाई देगी।
ड्रोन किलर रैप्टर बर्ड्स: करन और अर्जुन
सबसे चर्चा में रहने वाले पक्षी होंगे करन और अर्जुन। ये रैप्टर बर्ड्स दुश्मन के जासूसी ड्रोन को मिनटों में नष्ट कर सकते हैं। इसके अलावा, आवश्यकता पड़ने पर ये दुश्मन के ठिकानों पर निगरानी भी कर सकते हैं। तकनीक और प्राकृतिक क्षमता के इस अनोखे मेल ने भारतीय सेना को आधुनिक युद्ध में एक अलग बढ़त दी है।
भैरव बटालियन का वैश्विक परिचय
गणतंत्र दिवस 2026 में पहली बार दुनिया के सामने पेश होगी नई स्पेशल यूनिट, भैरव बटालियन। भगवान शिव के भैरव रूप से प्रेरित इस यूनिट का उद्देश्य काउंटर टेररिज्म और कोवर्ट ऑपरेशन्स में उच्चतम दक्षता दिखाना है। नाग वासुकि इनसिग्निया वाली यह टुकड़ी ‘अदृश्य और अदम्य’ की पहचान रखती है। इसका प्रदर्शन भारत की रणनीतिक और आक्रामक क्षमता का प्रतीक भी माना जाएगा।
राजपूत रेजिमेंट: साहस और परंपरा की मिसाल
‘हो सर्वत्र विजय’ सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि राजपूत रेजिमेंट की शौर्यगाथा का परिचायक है। गणतंत्र दिवस परेड में यह दल अपने गीतों और मार्च के माध्यम से सीमा पर तैनात सैनिकों के साहस और बलिदान की कहानी प्रस्तुत करेगा। भीषण ठंड और कठिन परिस्थितियों में मुस्कुराते हुए देश की रक्षा करने वाले सैनिकों की यह झलक दर्शकों के लिए भावनात्मक और प्रेरक अनुभव साबित होगी।
आठ साल बाद लौटेगी आर्टिलरी यूनिट: गॉड ऑफ वॉर
आर्टिलरी यूनिट, जिसे ‘गॉड ऑफ वॉर’ कहा जाता है, आठ साल के अंतराल के बाद परेड में शामिल होगी। एम-46 गन, बोफोर्स, एम-777 होविट्ज़र और ब्रह्मोस मिसाइल के जरिए दुश्मन को करारा जवाब देने वाली यह यूनिट भारत की फायर पावर का प्रतीक है। 1965, 1971 और कारगिल युद्ध में इसकी भूमिका भारतीय सेना की ताकत और रणनीति का प्रमाण रही है।
राजपथ से दुनिया को संदेश
गणतंत्र दिवस 2026 सिर्फ एक सैन्य परेड नहीं होगी। यह दिखाएगी कि भारत तकनीक, परंपरा और रणनीतिक सोच में एक साथ आगे बढ़ रहा है। साइलेंट वॉरियर्स से लेकर भैरव बटालियन और गॉड ऑफ वॉर तक, इस बार परेड में एक नया, आत्मनिर्भर और सशक्त भारत नजर आएगा। दुनिया के सामने यह संदेश जाएगा कि भारत न केवल रक्षा में सक्षम है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है।
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