app-store-logo
play-store-logo
January 30, 2026

मुंबई को मिलेगा नया ‘ग्रीन लंग’- रिलायंस ने की 130-एकड़ कोस्टल रोड गार्डन प्रोजेक्ट की घोषणा ! 

The CSR Journal Magazine

 

मुंबई, Reliance Foundation के नेतृत्व में मुंबई में 130-एकड़ के विशाल हरित स्थल “Coastal Road Gardens” के विकास की आधिकारिक घोषणा हुई है, जो शहर के नागरिकों के लिए एक नया सार्वजनिक हरित स्थान बनेगा। यह प्रोजेक्ट शहर की सांस लेने वाली जगहों, खुली जगहों और प्राकृतिक अनुभव की कमी को दूर करने का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

रिलायंस ने की Coastal Road Gardens परियोजना की घोषणा

मुंबई की कोस्टल रोड परियोजना पहले से ही शहर की सबसे बड़ी आधारभूत संरचना पहलों में से एक है। 29.2 किमी लंबी यह सड़क साउथ मुंबई से उत्तर की ओर जुड़ती है और भारी वाहन यातायात के लिए महत्वपूर्ण मार्ग बनेगी। लेकिन खुद कोस्टल रोड से सटे बचे हुए विस्तृत भूमि को अब केवल सड़क के लिए उपयोग नहीं किया जा रहा। इसके लिए शहर सरकार और निगम द्वारा बड़े पैमाने पर हरे क्षेत्रों, चलने-फिरने के रास्तों और सार्वजनिक उपयोग की जाने वाली जगहों की योजना बनाई गई है। Reliance Industries Ltd. के 48वें वार्षिक आम बैठक (AGM) 2025 में चेयरपर्सन नीता अंबानी ने आधिकारिक रूप से Coastal Road Gardens के विकास का ऐलान किया और इसे “मुंबई के लिए एक हरा फेफड़ा” बताया। यह परियोजना लगभग ₹400 करोड़ की लागत से होगी और इसे Reliance Foundation द्वारा CSR (कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी) पहल के तहत विकसित तथा सनभाल (Maintain) किया जायेगा।

Coastal Road Gardens – परियोजना की मुख्य विशेषताएं

यह परियोजना मुख्य रूप से मुंबई के प्रिडयारिणी पार्क से वर्ली तक समुद्र के किनारे भरे गए (Reclaimed) भूमि पर फैलेगी। लगभग 130 एकड़ का यह क्षेत्र मुंबई के लिए पर्यावरण, जीवनशैली और मनोरंजन का एक नया केंद्र बनेगा।
हरियाली और बागवानी– विशाल हरित क्षेत्र, पेड़-पौधे, फूलबाग़ और प्राकृतिक लैंडस्केप, स्थान-स्थान पर नैसर्गिक बगीचे और हरियाली के ज़ोन और शहर के वातावरण और वायु गुणवत्ता में सुधार का लक्ष्य है।
चालकों और उपयोगकर्ताओं के लिए सुविधा– पैदल चलने वाले Walkways, साइकिल ट्रैक, खुला सार्वजनिक स्थान और प्लाज़ा, खेल और मनोरंजन के लिए खुले मैदान और समुद्र के पास सुंदर समुद्री नज़ारे वाली बेंच और बैठने की व्यवस्था होगी। ये सुविधाएं इसे सिर्फ बाग़ नहीं बल्कि सिटी का एक कल्चरल औरसोशल हब भी बनाएंगी।

BMC के जिम्मे होगा अगले 30 वर्षों तक रखरखाव

Reliance Foundation को स्थानीय निकाय ब्रिहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा 30 वर्षों के लिए इस गार्डन का रख-रखाव और संचालन सौंपा गया है, और यह अवधि आगे 30 साल तक बढ़ाई जा सकती है।  यह एक महत्वपूर्ण बात है क्योंकि सिर्फ निर्माण ही नहीं, बल्कि लंबे समय तक रख-रखाव और संचालन की जिम्मेदारी किसी निजी संस्था को देना मुंबई में बड़े सामाजिक-शहरी पहलों में एक नई मिसाल बनता है। यह परियोजना अभी डिज़ाइन और क्रियान्वयन के चरण में है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, BMC और Reliance Foundation के बीच औपचारिक समझौते पर काम चल रहा है और उसके बाद ही डिज़ाइन, पौधेलगाने और सौंदर्यों के निर्माण का काम शुरू होगा। विशेषज्ञों के अनुसार अनुमानित समय लगभग 18 से 24 महीने (1.5 – 2 वर्ष) है, लेकिन सरकारी स्तर पर इसकी औपचारिक समय-सीमा अभी जारी नहीं हुई है।

पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी

मुंबई में प्रदूषण, ट्रैफिक, और खुली जगहों की कमी एक बड़ी समस्या रही है। स्थानीय सर्वे और औद्योगिक रिपोर्ट बताते हैं कि मुंबई के जनसंख्या दबाव के कारण शहर में ग्रीन कवर बहुत कम है और लोगों को खुले, हरित, सांस लेने वाले स्थानों की कमी है। Coastal Road Gardens जैसी परियोजनाएं जुड़े क्षेत्रों को हल्का-सा हरा फेफड़ा प्रदान करती हैं।

कोस्टल रोड गार्डन: मुंबई का भविष्य हरा होगा या समुद्र रहित?

मुंबई को 130 एकड़ का कोस्टल रोड गार्डन मिलने की घोषणा को विकास की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह परियोजना शहर को “Green Lungs” देगी, प्रदूषण कम करेगी और नागरिकों को खुली जगह उपलब्ध कराएगी। पहली नजर में यह सपना आकर्षक है- कंक्रीट के जंगल में हरियाली, समुद्र किनारे सुकून और भागती जिंदगी में ठहराव। लेकिन जब इस योजना को गहराई से देखा जाता है, तो यह सिर्फ एक विकास परियोजना नहीं रह जाती। यह एक बड़ा सवाल बन जाती है- “क्या प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर बनाई गई हरियाली सच में पर्यावरण संरक्षण कहलाएगी?”

मुंबई में हरियाली की सच्चाई

यह सच है कि मुंबई देश के सबसे भीड़भाड़ वाले शहरों में से एक है। यहां प्रति व्यक्ति खुली जगह बेहद कम है। बढ़ती आबादी, ऊंची इमारतें और ट्रैफिक ने शहरवासियों से खुला आसमान छीन लिया है। ऐसे में किसी बड़े हरित क्षेत्र की घोषणा लोगों को राहत देती है। यह उम्मीद जगाती है कि शायद शहर अब सिर्फ सड़कें और इमारतें नहीं, बल्कि इंसानों की सांसों के बारे में भी सोचेगा। लेकिन समस्या हरियाली की कमी नहीं, बल्कि हरियाली के नाम पर अपनाया गया रास्ता है।

समुद्र को खाली ज़मीन समझ लिया गया !

कोस्टल रोड और उससे जुड़े गार्डन समुद्र से भरी गई जमीन पर बन रहे हैं। यही वह बिंदु है जहां यह  परियोजना सबसे ज्यादा विवादास्पद हो जाती है। समुद्र कोई खाली पड़ी जमीन नहीं है, जिसे जब चाहें भरकर इस्तेमाल कर लिया जाए। समुद्र धरती का प्राकृतिक सुरक्षा कवच है, तटीय पारिस्थितिकी का आधार है, मछुआरों की आजीविका है, बाढ़ और तूफानों से शहर की ढाल है! जब समुद्र को पाटा जाता है, तो नुकसान तुरंत नहीं दिखता, लेकिन उसका असर वर्षों बाद भयावह रूप में सामने आता है।

कृत्रिम बनाम प्राकृतिक हरियाली

पेड़ लगाना और पार्क बनाना पर्यावरण संरक्षण का केवल एक हिस्सा है, पूरा समाधान नहीं! अगर हरियाली लाने के लिए समुद्री जीवन को नुकसान पहुंचे, प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो, तटरेखा कमजोर हो, तो ऐसी हरियाली दिखावे से ज्यादा कुछ नहीं। यह ठीक वैसा ही है जैसे पहले जंगल काटे जाएं और फिर पौधे लगाकर पर्यावरण प्रेम का दावा किया जाए। विकास जरूरी है, इसमें कोई संदेह नहीं। शहर को बेहतर सड़कों, परिवहन और सुविधाओं की जरूरत है। लेकिन सवाल यह है कि विकास किस कीमत पर? आज दुनिया के तटीय शहर समुद्र से दूरी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। समुद्र स्तर बढ़ रहा है, चक्रवात तेज हो रहे हैं और जलवायु संकट गहराता जा रहा है। ऐसे समय में समुद्र के भीतर जाकर विकास करना दूरदर्शिता नहीं, बल्कि जोखिम को न्योता देना है।

जलवायु परिवर्तन: भविष्य नहीं, वर्तमान

मुंबई पहले ही बाढ़, जलभराव और चक्रवात जैसी समस्याओं से जूझ रही है। हर मानसून में शहर ठहर जाता है। विशेषज्ञ चेतावनी देते रहे हैं कि समुद्र से छेड़छाड़, मैंग्रोव का नुकसान, प्राकृतिक नालों का अवरोध- इन सबका सीधा संबंध शहर की आपदाओं से है। कोस्टल रोड और उससे जुड़े गार्डन इस खतरे को और बढ़ा सकते हैं।

निजी संस्था और सार्वजनिक संसाधन

इस परियोजना का एक और संवेदनशील पहलू है- सार्वजनिक भूमि का निजी संस्था द्वारा दीर्घकालीन रख रखाव। आज यह मॉडल आकर्षक लगता है, सरकार पर खर्च का बोझ कम, बेहतर प्रबंधन की उम्मीद। लेकिन इतिहास गवाह है कि जब सार्वजनिक संसाधन निजी हाथों में जाते हैं, तो धीरे-धीरे नियम सख्त होते हैं, पहुंच सीमित होती है और आम आदमी पीछे छूटता है। इसलिए गारंटी चाहिए कि यह गार्डन भविष्य में भी पूरी तरह सार्वजनिक रहेगा।

पारदर्शिता की कमी क्यों?

अगर यह परियोजना वाकई जनहित और पर्यावरण हितैषी है, तो सवाल उठता है-
• पर्यावरण प्रभाव रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं?
• तटीय नियमों (CRZ) पर खुली बहस क्यों नहीं?
• मछुआरा समुदाय और तटीय निवासियों को भरोसे में क्यों नहीं लिया गया?
विकास अगर सच में टिकाऊ है, तो उसे सवालों से डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

विकल्प मौजूद थे, पर आसान रास्ता चुना गया

मुंबई में हरियाली बढ़ाने के लिए समुद्र को छूना जरूरी नहीं था। मुंबई शहर में बंद पड़े मिल परिसर, रेलवे की अनुपयोगी जमीन, सरकारी खाली प्लॉट, औद्योगिक परित्यक्त क्षेत्र- इन सभी को हरित क्षेत्र में बदला जा सकता था। लेकिन समुद्र सबसे आसान विकल्प है, क्योंकि वह विरोध नहीं करता। आम नागरिक इस परियोजना से उम्मीद कर रहा है- खुली हवा, सुकून और बेहतर जीवन। यह उम्मीद गलत नहीं है। गलत है तो वह भ्रम, जिसमें हर चमकती योजना को बिना सवाल किए स्वीकार कर लिया जाता है। विकास तभी सार्थक है, जब वह आने वाली पीढ़ियों के लिए खतरा न बने।

संतुलन ही रास्ता है

इस परियोजना को पूरी तरह नकारना समाधान नहीं है, लेकिन आंख मूंदकर स्वीकार करना भी खतरनाक है। ज़रूरत है पारदर्शी योजना की, पर्यावरण विशेषज्ञों की भागीदारी की, नागरिक संवाद की, समुद्री और तटीय सुरक्षा को प्राथमिकता देने की! हरियाली अगर टिकाऊ नहीं है, तो वह कुछ वर्षों का सुकून और दशकों का संकट दे सकती है। कोस्टल रोड गार्डन मुंबई के लिए एक परीक्षा है। यह परीक्षा इस बात की है कि- क्या हम विकास को प्रकृति के साथ जोड़ सकते हैं, या फिर हमेशा उसे कुचलकर आगे बढ़ेंगे?
मुंबई को हरियाली चाहिए, लेकिन समुद्र की कीमत पर नहीं। शहर को विकास चाहिए, लेकिन भविष्य को गिरवी रखकर नहीं। अगर आज सवाल नहीं उठाए गए, तो कल जवाब देने वाला कोई नहीं होगा, क्योंकि तब हमारे पास पार्क तो होंगे, लेकिन समुद्र सिर्फ यादों में रह जाएगा।

Long or Short, get news the way you like. No ads. No redirections. Download Newspin and Stay Alert, The CSR Journal Mobile app, for fast, crisp, clean updates!

App Store –  https://apps.apple.com/in/app/newspin/id6746449540

Google Play Store – https://play.google.com/store/apps/details?id=com.inventifweb.newspin&pcampaignid=web_share

Latest News

Popular Videos