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January 22, 2026

राजस्थानी लोक कलाकारों ने शकीरा के ‘वाका-वाका’ को कहा ‘खम्मा घणी’- वायरल वीडियो ने जीता दिल !

The CSR Journal Magazine
राजस्थान के लोक संगीत और वैश्विक पॉप संस्कृति के इस अनोखे संगम ने लोगों का दिल जीत लिया है। शकीरा के मशहूर गीत ‘वाका-वाका (This Time for Africa)’ को जिस अंदाज़ में इन राजस्थानी लोक कलाकारों ने पेश किया, वह सिर्फ एक प्रस्तुति नहीं बल्कि भारत की सांस्कृतिक विविधता का जीवंत उदाहरण बन गया।

राजस्थानी रंग में रंगे ‘वाका वाका’ ने जीता दिल!

राजस्थान की धरती से निकला लोक संगीत एक बार फिर वैश्विक मंच पर छा गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में राजस्थानी लोक संगीतकारों का समूह चलती बस में शकीरा के मशहूर गीत ‘वाका-वाका (This Time for Africa)’ को अपने पारंपरिक अंदाज़ में प्रस्तुत करता नजर आ रहा है। यह वही गीत है, जो 2010 फीफा वर्ल्ड कप (दक्षिण अफ्रीका) का आधिकारिक थीम सॉन्ग था। देसी लय और अंतरराष्ट्रीय धुन के इस अनोखे मेल ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया है।

चलती बस बना मंच, लोक वाद्य बने पहचान

वीडियो में देखा जा सकता है कि कलाकार बिना किसी आधुनिक साउंड सिस्टम के ढोलक, खड़ताल और पारंपरिक लोक वाद्यों के सहारे गाना गा रहे हैं। चलती बस में बैठे कलाकारों की ऊर्जा, तालमेल और  आत्मविश्वास यह दर्शाता है कि लोक संगीत केवल मंच का मोहताज नहीं, बल्कि जहां कलाकार हों, वहीं मंच बन जाता है। गाने के बीच में कलाकारों द्वारा “खम्मा घणी” और “वेलकम टू राजस्थान” जैसे पारंपरिक अभिवादन जोड़ना दर्शकों को खासा पसंद आ रहा है। इससे यह प्रस्तुति सिर्फ एक गीत नहीं रह जाती, बल्कि राजस्थान की संस्कृति, परंपरा और अतिथि-सत्कार की जीवंत झलक बन जाती है।

भारतीय लोकसंगीत की वैश्विक उड़ान

वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। कई यूज़र्स ने इसे “दिल को सुकून देने वाला” बताया। कुछ ने लिखा कि यह वीडियो भारत की सांस्कृतिक ताकत को दर्शाता है। वहीं कई लोगों ने कहा कि लोक कलाकारों को ऐसे मंच और पहचान मिलनी चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रस्तुतियां यह साबित करती हैं कि भारतीय लोक संगीत समय के साथ खुद को ढालने में सक्षम है। जब एक अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल एंथम राजस्थानी लोक रंग में ढलता है, तो यह सांस्कृतिक सीमाओं को तोड़ते हुए लोगों को जोड़ने का काम करता है।

संस्कृति का संदेश, संगीत की भाषा में

यह वायरल वीडियो यह संदेश देता है कि संगीत की कोई भाषा और कोई सरहद नहीं होती। राजस्थान की मिट्टी से उपजी धुन जब दुनिया के सबसे लोकप्रिय गीतों में शामिल हो जाती है, तो वह भारतीय संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाती है। राजस्थानी लोक कलाकारों की यह प्रस्तुति न सिर्फ मनोरंजन है, बल्कि भारतीय लोक कला की जीवंतता और रचनात्मकता का प्रमाण भी है। यही वजह है कि यह वीडियो देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में लोगों के दिलों तक पहुंच रहा है।

भारतीय संगीत और संस्कृति की वैश्विक पैठ

भारतीय संगीत और संस्कृति की जड़ें जितनी गहरी हैं, उसकी पहुंच उतनी ही व्यापक और वैश्विक है। सदियों पुरानी शास्त्रीय परंपराओं से लेकर लोक संगीत और आधुनिक फ्यूज़न तक, भारत की सांस्कृतिक धरोहर आज दुनिया के हर कोने में अपनी पहचान बना चुकी है। हाल के वर्षों में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इस वैश्विक पैठ को और मजबूत किया है।

भारतीय संगीत-संस्कृति ने बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

भारतीय शास्त्रीय संगीत, हिंदुस्तानी और कर्नाटक, ने पश्चिमी संगीत को भी प्रभावित किया है। रवि शंकर जैसे महान कलाकारों ने सितार के माध्यम से भारतीय रागों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहुंचाया, जिससे बीटल्स जैसे बैंड भी प्रेरित हुए। वहीं योग, भजन, कीर्तन और सूफी संगीत आज यूरोप और अमेरिका तक लोकप्रिय हो चुका है। लोक संगीत की बात करें तो राजस्थान, पंजाब, बंगाल और पूर्वोत्तर भारत की लोकधुनें विदेशी श्रोताओं को आकर्षित कर रही हैं। राजस्थानी मांगणियार, पंजाबी ढोल, और बंगाली बाउल गायन को दुनिया के बड़े म्यूज़िक फेस्टिवल्स में जगह मिल रही है। हाल ही में वायरल हुए राजस्थानी लोक कलाकारों द्वारा शकीरा के ‘वाका-वाका’ की प्रस्तुति इस बात का ताजा उदाहरण है कि भारतीय लोक संगीत वैश्विक धुनों के साथ तालमेल बैठाकर नई पहचान बना रहा है।

बॉलीवुड ने हॉलीवुड में पसारे अपने पैर

भारतीय सिनेमा और संगीत ने भी संस्कृति के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाई है। बॉलीवुड के गीत आज रूस, अफ्रीका, मध्य एशिया और लैटिन अमेरिका तक सुने जाते हैं। ए.आर. रहमान जैसे संगीतकारों ने ऑस्कर जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारतीय संगीत की ताकत को साबित किया है। नृत्य, पहनावा और खानपान भी भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान का हिस्सा बन चुके हैं। कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी जैसे नृत्य रूप विदेशों में सिखाए जा रहे हैं, वहीं भारतीय व्यंजन अंतरराष्ट्रीय शहरों में रोज़मर्रा का हिस्सा बन चुके हैं।
निष्कर्षतः, भारतीय संगीत और संस्कृति की वैश्विक पैठ केवल कला तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की “सॉफ्ट पावर” बनकर दुनिया को जोड़ने का कार्य कर रही है। परंपरा और आधुनिकता के इस संगम ने भारत को वैश्विक सांस्कृतिक मानचित्र पर एक विशिष्ट और सम्मानित स्थान दिलाया है।

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