रमजान में रोजा छोड़कर युवक ने बचाई अनजान की जान, Eid से पहले इंसानियत की मिसाल बना अशरफ

The CSR Journal Magazine
जहां एक ओर पूरे देश में Eid-ul-Fitr Celebration की तैयारियां चल रही हैं, वहीं पश्चिम बंगाल के 20 वर्षीय मोहम्मद अशरफ अली ने इंसानियत की ऐसी मिसाल पेश की है, जो हर किसी को भावुक कर रही है। रमजान के पाक महीने में रोजा रखते हुए उन्होंने एक अनजान मरीज की जान बचाने के लिए अपना रोजा तक तोड़ दिया और Blood Stem Cell Donation कर जिंदगी का तोहफा दे दिया।

रोजा छोड़कर बचायी जिंदगी

दरअसल, भारत में हर 5 मिनट में किसी न किसी को Blood Cancer या गंभीर रक्त रोग का पता चलता है। ऐसे मरीजों के लिए Stem Cell Transplant ही जीवन बचाने का आखिरी सहारा होता है। अशरफ अली भी ऐसे ही एक मरीज के लिए उम्मीद की किरण बने। अशरफ की यह यात्रा 2022 में शुरू हुई, जब उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो देखकर DKMS Foundation India के साथ खुद को Donor के रूप में रजिस्टर किया। उस समय उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि उनका यह छोटा सा कदम किसी की जिंदगी बचा सकता है।

दो साल बाद आया वो कॉल जिसने बदल दी जिंदगी

करीब दो साल बाद DKMS की तरफ से कॉल आया कि वह एक गंभीर मरीज के लिए Perfect Match हैं। हालांकि, उनके सामने दो बड़ी चुनौतियां थीं एक तो उन्हें सुई से डर लगता था और दूसरा, यह Donation रमजान के दौरान होना था, जिसके लिए उन्हें रोजा तोड़ना पड़ता। लेकिन अशरफ ने बिना ज्यादा सोचे फैसला कर लिया। उन्होंने कहा कि जब मुझे पता चला कि मैं ही उस मरीज की उम्मीद हूं, तो मैंने सिर्फ उसकी जिंदगी के बारे में सोचा।

इंसानियत को दी प्राथमिकता

रोजा तोड़ने के सवाल पर अशरफ ने बेहद भावुक जवाब दिया। उनके मुताबिक रमजान सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं, बल्कि आत्मसंयम और सही काम करने का समय है। अगर किसी की जान बचाई जा सकती है, तो वह सबसे बड़ा पुण्य है। परिवार का भी उन्हें पूरा साथ मिला। अपनी मां और घरवालों को समझाने के बाद उन्होंने हिम्मत जुटाई, अपने डर को हराया और आखिरकार Stem Cell Donation Process पूरा किया।

देश में Donor की भारी कमी, बड़ी चुनौती

अशरफ की यह कहानी सिर्फ एक इंसानियत की मिसाल नहीं, बल्कि देश में एक बड़ी समस्या की ओर भी इशारा करती है। आंकड़ों के अनुसार, करीब 70% मरीजों को अपने परिवार में Matching Donor नहीं मिलता और उन्हें किसी अनजान Donor पर निर्भर रहना पड़ता है। चौंकाने वाली बात यह है कि भारत में अभी सिर्फ 0.09% लोग ही Stem Cell Donor Registry में शामिल हैं, जिससे हजारों मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाता।

Eid का असली संदेश: इंसानियत और मदद

DKMS के अधिकारियों ने अशरफ के इस कदम को बेहद प्रेरणादायक बताया और लोगों से आगे आकर Donor बनने की अपील की। यह कहानी बताती है कि Eid Festival सिर्फ खुशियां मनाने का नहीं, बल्कि दूसरों के लिए कुछ करने का भी अवसर है। अशरफ अली ने यह साबित कर दिया कि असली ईद वही है, जब आप किसी की जिंदगी में उम्मीद की रोशनी बनें।
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