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January 27, 2026

मुंबई सेंट्रल स्टेशन पर शुरू हुआ देश का पहला डिजिटल लाउंज- अब इंतजार में भी मज़ा !

The CSR Journal Magazine

 

अब यात्रियों को ट्रेन के इंतज़ार में काम, आराम और आधुनिक सुविधाएं एक ही छत के नीचे! बिज़नेस ट्रैवलर्स और प्रोफेशनल्स के लिए खास सुविधा, हाई-स्पीड इंटरनेट और मीटिंग रूम उपलब्ध! पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर विकसित पहला डिजिटल लाउंज! भविष्य में अन्य स्टेशनों तक विस्तार की तैयारी !

रेलवे यात्रियों के लिए बड़ी पहल: मुंबई सेंट्रल पर खुला भारत का पहला डिजिटल लाउंज

भारतीय रेलवे लगातार यात्रियों की सुविधाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में पश्चिम रेलवे ने मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर एक ऐतिहासिक और अभिनव पहल की है। यहां देश का पहला डिजिटल लाउंज और को-वर्किंग स्पेस शुरू किया गया है, जहां यात्री बेहद किफायती शुल्क पर न केवल आराम कर सकते हैं, बल्कि अपने पेशेवर काम भी निपटा सकते हैं। यह सुविधा खास तौर पर बिज़नेस ट्रैवलर्स, कॉर्पोरेट प्रोफेशनल्स, फ्रीलांसर्स और उन यात्रियों के लिए उपयोगी मानी जा रही है, जिन्हें ट्रेन के इंतज़ार के दौरान शांत, सुरक्षित और तकनीक-संपन्न वातावरण की आवश्यकता होती है।

स्टेशन पर बदली यात्रियों के इंतज़ार की परिभाषा

अब तक रेलवे स्टेशनों पर प्रतीक्षालय को केवल बैठने या थोड़े समय आराम करने की जगह माना जाता था। लेकिन मुंबई सेंट्रल पर शुरू हुआ यह डिजिटल लाउंज इस सोच को पूरी तरह बदल देता है। यहां इंतज़ार का समय अब “बेकार समय” नहीं, बल्कि उत्पादक समय बन सकता है। यात्री यहां बैठकर ईमेल भेज सकते हैं, ऑनलाइन मीटिंग कर सकते हैं, प्रेज़ेंटेशन तैयार कर सकते हैं या फिर शांति से आराम भी कर सकते हैं।

मेन लाइन कॉनकोर्स स्थित डिजिटल लाउंज

यह अत्याधुनिक डिजिटल लाउंज मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन के मेन लाइन कॉनकोर्स पर स्थित है। करीब 1,712 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला यह लाउंज स्टेशन परिसर के भीतर एक प्रीमियम और सुसज्जित स्पेस के रूप में  विकसित किया गया है। यात्रियों को प्लेटफॉर्म की भीड़-भाड़ से अलग एक शांत और व्यवस्थित माहौल यहां मिलता है। इस सुविधा का उद्घाटन मध्य दिसंबर 2025 में किया गया था और इसके बाद से यह यात्रियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर आधारित परियोजना

डिजिटल लाउंज को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया गया है। इसका  संचालन Ten11 Hospitality LLP द्वारा किया जा रहा है, जो इसे INEJ Lounge ब्रांड नाम से चला रही है। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, निजी भागीदारी से न केवल सेवा की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि यात्रियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

किफायती शुल्क, हर यात्री के लिए सुलभ

डिजिटल लाउंज की सबसे बड़ी खासियत इसका किफायती शुल्क ढांचा है। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि कम समय के लिए भी यात्री इसका लाभ उठा सकें। शुल्क विवरण इस प्रकार है-
• प्रवेश शुल्क (पहला घंटा): ₹200,
• हर अतिरिक्त घंटा: ₹150,
• रिक्लाइनर सीट (दो घंटे तक): ₹700!
यात्री सीधे लाउंज के काउंटर पर भुगतान कर सकते हैं। रेलवे का मानना है कि यह शुल्क सामान्य एसी वेटिंग रूम या एयरपोर्ट लाउंज की तुलना में काफी कम है, जिससे अधिक से अधिक यात्री इसका उपयोग कर सकें।

काम और आराम के लिए आधुनिक सुविधाएं

डिजिटल लाउंज को इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि यहां आने वाला यात्री खुद को किसी आधुनिक ऑफिस या अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन जैसा अनुभव करे। प्रमुख सुविधाएं-
• हाई-स्पीड वाई-फाई, जिससे ऑनलाइन मीटिंग और काम बिना रुकावट हो सके!
• असीमित चाय और कॉफी, ताकि यात्री तरोताज़ा महसूस करें!
• मॉड्यूलर वर्कस्टेशन, जो लैपटॉप और दस्तावेज़ों के साथ काम के लिए उपयुक्त हैं।
• आरामदायक सोफे, जहां यात्री रिलैक्स कर सकते हैं!
• मोबाइल और लैपटॉप चार्जिंग पॉइंट्स, ताकि बैटरी की चिंता न रहे!

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और मीटिंग रूम की सुविधा

डिजिटल युग की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए लाउंज में मीटिंग रूम भी बनाए गए हैं। यहां यात्री वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर सकते हैं या छोटी मीटिंग्स आयोजित कर सकते हैं। यह सुविधा खास तौर पर उन पेशेवरों के लिए फायदेमंद है, जिन्हें यात्रा के दौरान भी काम से जुड़े रहना पड़ता है। लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए लाउंज में अपग्रेडेड वॉशरूम और शॉवर सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। इससे यात्रियों को ताज़ा होने और आराम महसूस करने में मदद मिलती है, खासकर तब जब अगली ट्रेन में समय हो।

भोजन और पेय की भी पूरी व्यवस्था

डिजिटल लाउंज में केवल बैठने और काम करने की ही नहीं, बल्कि खाने-पीने की भी पूरी व्यवस्था की गई है।
• शाकाहारी भोजन: लगभग ₹400,
• स्नैक्स: करीब ₹250,
• नॉन-अल्कोहलिक बेवरेजेस: स्वयं-सेवा के आधार पर उपलब्ध!
लाउंज का इंटीरियर और लेआउट यूरोपीय रेलवे स्टेशनों से प्रेरित बताया जा रहा है, जो इसे एक प्रीमियम और अंतरराष्ट्रीय लुक देता है।

यात्रियों की प्रतिक्रिया पर टिकी भविष्य की योजनाएं

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, मुंबई सेंट्रल का यह डिजिटल लाउंज एक पायलट प्रोजेक्ट है। फिलहाल यात्रियों की  प्रतिक्रिया, उपयोग और संतुष्टि का अध्ययन किया जा रहा है। यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो भविष्य में इसे मुंबई और अन्य महानगरों के प्रमुख स्टेशनों पर भी शुरू किया जाएगा। संभावित स्टेशनों में अंधेरी,  बोरीवली, बांद्रा टर्मिनस और गोरेगांव शामिल हैं।

रेलवे स्टेशनों को मल्टी-यूटिलिटी हब बनाने की दिशा में कदम

रेलवे का मानना है कि इस तरह की सुविधाएं स्टेशनों को केवल यात्रा स्थल नहीं, बल्कि मल्टी-यूटिलिटी हब में बदल सकती हैं। इससे यात्रियों का अनुभव बेहतर होगा और रेलवे को अतिरिक्त राजस्व भी मिलेगा। मुंबई सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर शुरू हुआ डिजिटल लाउंज भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक  महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। कम शुल्क, आधुनिक सुविधाएं और पेशेवर माहौल इस पहल को खास बनाते हैं। यदि यह मॉडल सफल होता है, तो आने वाले समय में देश के अन्य बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी यात्रियों को इसी तरह की डिजिटल और प्रीमियम सुविधाएं मिल सकती हैं।

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