मुरादाबाद खाद्य सुरक्षा विभाग की छापामार कार्रवाई में शहर के एक गोदाम से बड़ी मात्रा में नकली और रंगे हुए अंडे बरामद किए गए। टीम ने देर रात की गई इस कार्रवाई में उस फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया, जहां सफेद अंडों को केमिकल और देसी रंगों से रंगकर “देसी अंडा” बताकर बाजार में महंगे दामों पर बेचने की तैयारी की जा रही थी।
मुरादाबाद में नकली अंडों का बड़ा खुलासा- हजारों अंडे बरामद
मुरादाबाद: शहर में खाद्य सुरक्षा विभाग की एक बड़ी कार्रवाई ने मिलावटखोरी के संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया। देर रात की गई इस संयुक्त छापेमारी में एक ऐसी फैक्ट्री पकड़ी गई, जहां सफेद अंडों को देसी अंडा बताने के लिए रासायनिक और पौधों से बने रंगों के मिश्रण से रंगा जा रहा था। अधिकारी इस बात से हैरान थे कि यह पूरा काम लंबे समय से बिना किसी जांच के चल रहा था।
कैसे हुआ खुलासा
खाद्य विभाग को कुछ दिनों से बाजार में अचानक बढ़ी “देसी अंडों” की सप्लाई और उनकी असामान्य रंगत पर संदेह हुआ। इसके बाद एक गोपनीय निगरानी टीम बनाई गई जिसने आपूर्ति श्रृंखला का पीछा करते हुए शहर के बाहरी इलाके में स्थित एक बड़े गोदाम तक पहुंच बनाई। छापा मारते ही अधिकारी यह देखकर दंग रह गए कि गोदाम के अंदर हजारों अंडों को रंगने का पूरा सेटअप तैयार था- कटोरों में घुले रंग, सुखाने के लिए लगी जालियां, और श्रमिक, जो तेज़ी से अंडों को “देसी” रूप देने में लगे थे।
क्या-क्या मिला छापे के दौरान
अधिकारियों को लगभग पूरे कमरे में फैली अंडों की ट्रे, रंग के घोल और पैकिंग सामग्री मिली।
हजारों रंगे हुए अंडे: पहले से तैयार कर बाज़ार भेजने के लिए रखे हुए।
दसियों हजार सफेद अंडे: जिन्हें धीरे-धीरे रंगने का काम चल रहा था।
रंग और रसायन: चाय-पत्ती, कत्था, सिंदूरी रंग, और मिलावट के लिए इस्तेमाल होने वाले अन्य पदार्थ।
पैकिंग व लेबलिंग सामग्री: जिनका उपयोग इन्हें “देसी अंडा” बताकर ऊंचे दाम पर बेचने में किया जाता था। अधिकारियों ने मौके पर रंगाई प्रक्रिया भी देखी जिसमें अंडों को घोल में डुबोकर सुखाया जाता था ताकि वे प्राकृतिक देसी अंडों जैसे दिखाई दें।
सेहत के लिए कितना खतरनाक
विशेषज्ञों के अनुसार इन रंगों में रसायनिक मिलावट होने की आशंका सबसे बड़ी चिंता का विषय है। ऐसे रंगे हुए अंडे पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचा सकते हैं। एलर्जी, पेट दर्द, उल्टी और दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं होने की संभावना रहती है। बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए ऐसे अंडे विशेष रूप से जोखिम भरे हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इसे गंभीर खाद्य धोखाधड़ी बताते हुए चेतावनी दी है कि दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फैक्ट्री मालिक पर मुकदमा, सप्लाई चेन खंगाली जा रही
गोदाम मालिक और जुड़े हुए कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है। विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि यह नकली अंडों का जाल कितनी दूर तक फैला था? कौन-कौन से बाजार, दुकानें और रेस्टोरेंट्स इनके ग्राहक थे? संभावना जताई जा रही है कि यह कारोबार कई महीनों से चल रहा था और शहर के विभिन्न हिस्सों तक इसकी सप्लाई बढ़ चुकी थी।
पूरे इलाके में हड़कंप
छापे की खबर फैलते ही स्थानीय बाजारों में हलचल मच गई। कई दुकानदारों ने अपने स्टॉक की जांच शुरू कर दी है। उपभोक्ताओं में भी भय का माहौल है, और कई लोग दुकानों पर अंडों की बनावट व रंग को ध्यान से देखते हुए खरीदारी कर रहे हैं। खाद्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि अंडों पर असामान्य रंग दिखाई दे, छिलके पर पैच या धब्बे हों, या अंडे को धोने पर रंग उतरने लगे तो तुरंत खाद्य विभाग को शिकायत दें। विभाग ने यह भी कहा है कि ऐसी मिलावटखोरी पर सख्ती बढ़ाई जाएगी और आने वाले दिनों में शहर के कई हिस्सों में अचानक निरीक्षण जारी रहेंगे।
चंद पैसों के लिए हो रहा लोगों की सेहत से खिलवाड़
मुरादाबाद में पकड़े गए इस घोटाले ने एक बार फिर दिखा दिया है कि मिलावटखोर लगातार नई-नई तरकीबें अपनाकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं। विभाग की कार्रवाई ने फिलहाल बड़ी राहत दी है, लेकिन इसने खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
भारत में पिछले वर्षों में सामने आए बड़े और चर्चित फूड एडाल्टरेशन के मामले
1. आगर मालवा (म.प्र.)- नकली घी फैक्ट्री का भंडाफोड़
2023 में खाद्य विभाग ने एक बड़े प्रोसेसिंग यूनिट में छापा मारा, जहां वनस्पति तेल, डिटर्जेंट बेस, साबुन का घोल और सुगंधित केमिकल मिलाकर देसी घी तैयार किया जा रहा था। करीब 6,000 लीटर नकली घी और ब्रांडेड कंपनियों जैसी पैकिंग सामग्री जब्त हुई। यह माल पूरे मध्य भारत के थोक बाजारों में भेजा जाता था और स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा था।
साल 2022 में डेरी यूनिट पर छापे में पता चला कि दूध की मोटाई और झाग बढ़ाने के लिए यूरिया, डिटर्जेंट पाउडर और स्टार्च मिलाया जा रहा था। कई मशीनें, केमिकल कंटेनर और लगभग 3,000 लीटर मिलावटी दूध ज़ब्त किया गया। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि ऐसा दूध बच्चों और बुजुर्गों के लिए सबसे खतरनाक है।
साल 2024 में कई मसाला प्रोसेसिंग यूनिट्स में छापे के दौरान पाया गया कि हल्दी में मेटानिल येलो, लाल मिर्च में सिंथेटिक डाई और धनिया में चॉक पाउडर मिलाया जा रहा था। छापेमारी में टन भर मसाला पाउडर और केमिकल बैग बरामद किया गया। यह मिलावट लंबे समय तक खाने पर कैंसरजन्य जोखिम तक पैदा करती है।
4. कोलकाता – नकली चाय पत्ती रैकेट
2019 में कोलकाता पुलिस ने ऐसी फैक्ट्री पकड़ी जहां लकड़ी का बुरादा, सूखे पत्तों का पाउडर और कृत्रिम काला रंग मिलाकर “चाय पत्ती” बनाई जा रही थी। तैयार पैकिंग, डाई टैंक और कई क्विंटल मिलावटी चायपत्ती जब्त की गई। यह रंग किडनी और लिवर के लिए सबसे नुकसानदायक माने जाते हैं।
5. नागपुर – नकली बेसन की सप्लाई
2021 में नागपुर की फैक्ट्री में छापे में पाया गया कि बेसन में मक्का का आटा, ग्वार गम और पीला सिंथेटिकरंग मिलाकर थोक में बेचा जा रहा था।1,500 किलो तैयार मिलावटी बेसन और बड़ी मात्रा में कच्चा मिश्रण बरामद किया गया। इसके उपयोग से एलर्जी और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
2022 में त्योहारों के दौरान कई स्थानों पर रेड के दौरान 4–5 दिन पुराना खराब मावा, नकली रंग और मावा, फैक्ट्रियों में बचा हुआ तेल से तैयार की जा रही मिठाइयां जब्त हुईं। 1.5 टन मावा और बड़ी मात्रा में नुकसानदायक रंग पकड़ा गया। यह केस सीधा उपभोक्ताओं की त्योहारों के समय की सुरक्षा से जुड़ा होने के कारण गंभीर अपराध माना गया।
7. लखनऊ – मछली पर केमिकल कोटिंग
2020 में बरसात में मछलियों पर फॉर्मलिन और बर्फ बनाए रखने वाले केमिकल लगाने का मामला सामने आया, जिससे वे ताज़ी दिखाई दें। मछली के ट्रक, केमिकल बोतलें और स्प्रे उपकरण का जखीरा बरामद किया गया। फॉर्मलिन शरीर के लिए जहरीला माना जाता है और कैंसरजन्य प्रभाव भी उत्पन्न कर सकता है।
2023 में कई कारखानों के निरीक्षण में पता चला कि पनीर वनस्पति तेल, गाढ़े दूध, स्टार्च और सफेदी देनेवाले मिश्रण से बनाया जा रहा था। इस छापेमारी में 800 किलो तैयार नकली पनीर ज़ब्त किया गया। ऐसा पनीर गर्म करने पर तुरंत पिघल जाता था और पाचन पर गंभीर असर डालता था।
9. पंजाब – नकली शराब मामला
साल 2020- पंजाब में कई जगहों पर अवैध यूनिट में मिथाइल अल्कोहल मिलाकर शराब तैयार की जा रही थी, जिससे कई लोगों की मौत हुई। सैकड़ों लीटर जहरीली शराब और केमिकल कंटेनर पकड़े जाने से हड़कंप मच गया। यह मामला राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी चिंता का विषय बना।
10. गुजरात – फल-सब्जियों पर कार्बाइड कोटिंग
लगातार कई वर्षों में गुजरात के कई जिलों से ऐसे कई मामले सामने आए जहां केले और आम को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड, जबकि सेब व अंगूर पर वैक्स और रसायनिक कोटिंग लगाई जा रही थी। इन केमिकल्स के लंबे समय तक सेवन से सांस और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं।
लोगों की थाली में परोसा जा रहा जहर
मुरादाबाद में नकली अंडों की फैक्ट्री पकड़े जाने की घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं, बल्कि उस कड़वी सच्चाई का हिस्सा है जिसे हम रोज़ अनदेखा करते हैं। कभी रंगे हुए अंडे, कभी यूरिया और डिटर्जेंट मिला दूध, कभी सुगंध और मोम घुलाकर बनाया गया नकली घी, ये सभी उदाहरण दिखाते हैं कि मुनाफे की अंधी दौड़ में मिलावटखोर लोगों की सेहत से खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। आज बाजार चमकदार दिखाने की कला में माहिर हो गया है। सेब वैक्स से चमकाए जाते हैं, केले कार्बाइड से पकाए जाते हैं, मावा बासी होकर भी रंगों से ताज़ा दिखाया जाता है, और अंडों को चाय-पत्ती व केमिकल में डुबोकर देसी अंडा बताया जाता है। यह सिर्फ खाना नही, धीमे ज़हर की तरह हमारे शरीर में उतरता है, बच्चों के विकास और बुजुर्गों की सेहत पर सीधा वार करता है।
जागरूकता में छिपा समाधान
सबसे बड़ी चिंता यह है कि ये मिलावट उस जगह हो रही है जिसे लोग सबसे सुरक्षित मानते हैं- अपनी थाली! जब रोज़मर्रा की चीज़ें ही भरोसेमंद न रहें, तब स्वास्थ्य व्यवस्था और नियामकों पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। कार्रवाई तो होती है, फैक्ट्री सील भी होती है, लेकिन मिलावटखोर फिर किसी नई गली, नए नाम और नई तरकीब के साथ लौट आते हैं।समाधान सिर्फ छापे नहीं- जागरूकता, कड़े कानून और उपभोक्ताओं का दबाव ही इस जहरीले कारोबार को रोक सकता है। जब लोग सवाल पूछेंगे, दुकानदार जवाब देने को मजबूर होंगे। जब लोग गुणवत्ता पर समझौता नहीं करेंगे, तब मिलावटखोरी का बाजार खुद टूटेगा। यह समय है कि समाज मिलकर कहे- लाभ का खेल नहीं चलने देंगे, हमारी सेहत कोई सौदा नहीं।
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