महाराष्ट्र में सरकार की ओर से चैनलाइज तरीके से सीएसआर खर्च को लेकर कई पॉलिसियां बनी लेकिन एक भी कारगर नहीं हुई बावजूद इसके एक बार फिर से महाराष्ट्र सरकार की सार्वजनिक आरोग्य विभाग (Public Health Department, Maharashtra Government) ने नई CSR Policy 2025 जारी की है। इस नई नीति के ज़रिए अब राज्य में काम करने वाली निजी और सरकारी कंपनियां अपने Corporate Social Responsibility (CSR) फंड को सीधे स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास में इस्तेमाल कर सकेंगी।
क्या है Maharashtra New CSR Policy 2025
नई नीति का मकसद है कॉर्पोरेट फंड का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य (Public Health) में पारदर्शी और प्रभावी तरीके से किया जा सके। कंपनियों को अब अस्पतालों में उपकरण, स्वास्थ्य केंद्रों के नवीनीकरण, मेडिकल शिक्षा, आपदा राहत, और दिव्यांगों की मदद जैसे प्रोजेक्ट्स में सीधे CSR सहायता देने की अनुमति होगी। नीति के तहत CSR प्रोजेक्ट्स के लिए एक तय प्रक्रिया बनाई गई है, जिसमें यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर कंपनी का फंड सही दिशा में खर्च हो और उसका पूरा रिकॉर्ड विभाग के पास मौजूद रहे।
स्वास्थ्य क्षेत्र को प्राथमिकता
शासन निर्णय के मुताबिक, CSR फंड को खास तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण योजनाओं में उपयोग करने पर ज़ोर दिया गया है। इनमें प्रमुख हैं सड़क दुर्घटना पीड़ितों की मदद, दिव्यांग व्यक्तियों को चिकित्सा सहायता, ग्रामीण और शहरी अस्पतालों में इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं (Emergency Medical Services) का विस्तार, महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रम, साथ ही, कंपनियां चाहे तो चिकित्सा अनुसंधान (Medical Research), पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection), और खेलों के विकास (Sports Promotion) जैसे प्रोजेक्ट्स में भी निवेश कर सकती हैं।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर
Public Health Department के अनुसार, CSR के तहत मिलने वाली सहायता “In-Kind” यानी वस्तु या सेवा के रूप में होगी, नकद रूप में नहीं। कोई भी कंपनी सरकारी ज़मीन या संपत्ति की मालिक नहीं बनेगी। CSR से बने प्रोजेक्ट्स पर कंपनी का नाम भी नहीं लगाया जाएगा।
प्रोजेक्ट्स की निगरानी के लिए दो समितियां बनाई गई हैं —
1. नियामक समिति (Regulatory Committee) – जिसकी अध्यक्षता स्वास्थ्य मंत्री करेंगे।
2. कार्यकारी समिति (Executive Committee) – जिसका नेतृत्व विभाग के प्रमुख सचिव करेंगे।
₹5 करोड़ से ज़्यादा के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी नियामक समिति देगी, जबकि इससे छोटे प्रोजेक्ट्स को कार्यकारी समिति स्वीकृति देगी।
राज्य स्तरीय समन्वय अधिकारी की नियुक्ति
CSR योजनाओं की निगरानी के लिए एक State-Level Coordination Officer की नियुक्ति भी की गई है। यह अधिकारी CSR कंपनियों और विभाग के बीच समन्वय बनाएगा, प्रोजेक्ट्स की प्रगति रिपोर्ट तैयार करेगा और सरकार को समय-समय पर जानकारी देगा।
कंपनियों और सरकार दोनों के लिए फायदेमंद कदम
नई CSR Policy 2025 से सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहयोग मिलेगा, वहीं कंपनियों को भी समाज के हित में योगदान देने का मौका मिलेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह नीति “Public-Private Partnership (PPP)” मॉडल को मज़बूत करेगी और ग्रामीण इलाकों तक स्वास्थ्य सुविधाएँ पहुँचाने में मदद करेगी।
क्यों है यह कदम खास
राज्य सरकार का यह कदम उस समय आया है जब सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को आधुनिक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। नई CSR नीति से सरकारी अस्पतालों में आधुनिक उपकरण, बेहतर इलाज व्यवस्था और प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू होने की उम्मीद है। Public Health Department का कहना है कि पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) इस नीति की रीढ़ हैं। हर CSR फंड का हिसाब अब डिजिटल रिकॉर्ड में रखा जाएगा ताकि किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
इसके पहले भी कई बार सीएसआर पॉलिसी लायी गयी लेकिन सब फेल ही हुए है
महाराष्ट्र सरकार की नई CSR Policy 2025 से राज्य के स्वास्थ्य ढांचे में बड़ा बदलाव आने की संभावना है। लेकिन पहले भी महाराष्ट्र सरकार की तरफ से सीएसआर पॉलिसी लायी गयी लेकिन सब फेल ही हुए है। यह कदम Corporate Partnership, Public Health Reform और CSR Transparency की दिशा में एक ऐतिहासिक प्रयास माना जा रहा है।
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